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जहर न बन जाए ये जल

खुले पड़े हैं जलाशय और टंकियांपत्रिका पड़ताल

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हिण्डौनसिटी. राजकीय चिकित्सालय की एमसीएच इकाई की छत पर बिना ढक्कन वाली टंकियां।

हिण्डौनसिटी. गर्मी के मौसम में पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ बनाने के लिए प्रशासन व जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी भले ही दिन-रात जुटे हुए हैं, लेकिन लोगों को पिलाए जाने वाला जल कितना स्वच्छ है, इस और किसी का ध्यान नहीं हैं। नतीजतन लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसको लेकर सोमवार को राजस्थान पत्रिका टीम ने पड़ताल की तो चौंका देने वाली हकीकत सामने आई। विभाग के जलाशय हो या फिर राजकीय चिकित्सालय की टंकियों से जलापूर्ति का मामला। कहीं पर टंकियों के ढक्कन खुले पड़े थे तो कहीं भूतल जलाशय गंदगी से अटे नजर आए।

स्थान- खरेटा रोड स्थित पम्प हाउस
हालात-खरेटा रोड स्थित जनस्वास्थ्य अभियंात्रिकी विभाग के पम्प हाउस से पूरे शहर को जालपूर्ति की जाती है। परिसर में बने तीन भूतल जलाशयों में जलोत्पादन के बाद नलों के माध्यम से शहर में अलग-अलग स्थानों पर बनी टंकियों में जल संग्रहण किया जाता है। इसके बाद नलों के जरिए प्रतिदिन शहरवासियों को जलापूर्ति की जाती है। पत्रिका टीम पम्प हाउस पहुंच पड़ताल में जुट गई। एकबारगी तो वहां के हालात देख हम भी दंग रह गए। सबसे खतरनाक बात यह थी कि भूतल जलाशय में नीचे उतरने का दरवाजा खुला पड़ा था। मुख्य दरवाजा व व्यू हॉल के खुले होने से पानी में पक्षी या जानवर गिरने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। समीप ही बने एक अन्य भूतल जलाशयों के बाल्व की ओर का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त, जहां होकर गंदगी या फिर कोई कीड़ा-मकौड़ा और पशु-पक्षी जलाशय में घुस सकता है। जलाशयों में काई की परत जमी हुई थी, वहीं कचरा पानी में तैरता नजर आया।

स्थान- राजकीय चिकित्सालय
हालात- चिकित्सालय की मातृ एवं शिशु इकाई के दो मंजिला भवन की छत पर और भी अधिक चौंकाने वाले हालात थे। छत पर रखी सभी आठ टंकियों के ढक्कन टूटे हुए थे। झांक कर देखा तो टंकियों के तले में मिट्टी व कचरा जमा था और काई की परतें जमी हुई थी। इतना ही नहीं मरे हुए मच्छरों का ढेर लगा हुआ था। इन टंकियों से प्रसूति वार्ड, एसएनसीयू वार्ड, शिशु वार्ड, टीकाकरण इकाई, आउटडोर व पंजीयन काउण्टरों पर जलापूर्ति होती है। नवजात शिशु से लेकर प्रसूता व उनके परिजन इसी पानी को उपयोग में लेते हैं।
स्थान- एसडीओ कार्यालय
हालात- उपखंड कार्यालय के मुख्य द्वार पर बनी प्याऊ के उपर बनी टंकी में प्रशासन ने भले ही टाईल्स लगवा रखीं है। लेकिन लम्बे समय से सफाई नहीं होने के कारण टंकी में भरा हुआ पानी गंदला है। वाटर कूलर लगा होने से लोगों को यहां जल शीतल तो मिलता है, लेकिन स्वच्छता की कोई गारंटी नहीं है।

स्थान- पुरानी कचहरी का उच्च जलाशय
हालात- शहर के एक तिहाई आबादी को जलापूर्ति करने वाला पुरानी कचहरी स्थित उच्च जलाशय जीर्णशीर्ण अवस्था में पड़ा हुआ है। इसके चलते एक दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी इसकी सफाई नहीं हुई है। जलदाय विभाग ने भी जर्जरहाल टंकी से दूर रहने की चेतावनी लिख रखी है। टंकी की सीढिय़ां भी टूटी हुई हैं। ऐसे में यह भी पता नहीं है कि जलाशय में कितनी गंदगी भरी हुई है। जलापूर्ति के समय आए दिन नलों में कबूतरों के पंख व अवशेष निकलते हैं। फिर भी लोग इस दूषित पानी को पीने को मजबूर हैं।