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वादों पर खरी नहीं उतरी सरकार

www.patrika.com/rajasthan-news/ हिण्डौनसिटी. आगामी चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ओर से तैयारियां चल रही है। दोनों दलों में टिकट की आपाधापी मची है। चुनाव की कांग्रेस की क्या हैं तैयारी और सत्ताधारी दल से मुकाबले के लिए क्या है रणनीति। ऐसे ही कुछ सवालों को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश मामू से खास बातचीत की रिपोर्टर अनिल दत्तात्रेय ने।  

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हिण्डौनसिटी. आगामी चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ओर से तैयारियां चल रही है। दोनों दलों में टिकट की आपाधापी मची है। चुनाव की कांग्रेस की क्या हैं तैयारी और सत्ताधारी दल से मुकाबले के लिए क्या है रणनीति। ऐसे ही कुछ सवालों को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश मामू से खास बातचीत की रिपोर्टर अनिल दत्तात्रेय ने।


प्रश्न-राज्य मेंं डेढ़ माह बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। जिले में कांग्रेस की कैसी तैयारी हैं?
उत्तर- विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस द्वारा जमीनी स्तर से तैयारी की है। कुछ दिन पहले मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम हुआ। प्रदेश में संभाग स्तर पर संकल्प रैली निकाली गई। सितम्बर में करौली मेंं हुई रैली में उमड़ी लाखों लोगों की भीड़ कांग्रेस की सरकार में जोरदार वापसी कर ट्रेलर था। चुनाव के ऐन पहले तक गांव-ढाणी तक कार्यक्रम होंगे। लोगों को भाजपा की किसान और युवा विरोधी नीतियों के बारे में बताया जा रहा है।


प्रश्न- कोई बड़ी रणनीति तैयार की जा रही है। या फिर हर बार बदलाव की बयार चलना मान सरकार में आने का इंतजार है?
उत्तर- ऐसा नहीं है। सरकार के बदलने की व्यवस्थाएं हैं जो कार्यांे पर निर्भर करती हैं। जनता जब कार्यों से असंतुष्ट होती है, तब सरकार को बदलती है। भाजपा सरकार से कर्मचारी वर्ग असंतुष्ट है। वादे के मुताबिक युवाओं को नौकरियां नहीं मिल पाईं। महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं। किसानों को कर्जा माफी की बात भी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। इससे जनता नाराज है।


प्रश्न- गत विधानसभा चुनाव में करौली जिले में कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शन रहा। चार में से तीन सीट मिली थी। इस बार कैसा प्रदर्शन रहने की उम्मीद कर रहे है ?
उत्तर- जिले में निश्चित तौर पर इस बार चारों सीट कांग्रेस की आएंगी। संकल्प रैली में जनता ने जोश दिखाया था। हिण्डौन से करौली तक रोड जाम हो गया था।


प्रश्न- इस बार कद्दावर नेता डॉ. किरोडी लाल मीणा फिर से भाजपा में हैं। भाजपा ने उन्हें विशेष रूप से करौली जिले का जिम्मा सौंपा है। कांग्रेस पर इसका क्या असर पड़ेगा ?
उत्तर- कांग्रेस पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। भाजपा के शासन में मीणा समाज व समाज के अधिकारियों ने खुद को घुटा-घुटा सा महसूस किया है। ब्यूरोक्रेसी के लोगों की अनदेखी की गई। ऐसे में मीणा कम्युनिटी किसी की बात नहीं मानेगी। उन्होंने कांग्रेस को वोट देने का निश्चय कर लिया है।


प्रश्न- करौली जिले में कांग्रेस के तीनों विधायक अपने क्षेत्रों में खास छाप नहीं छोड़ पाए। क्षेत्र में उनका विरोध भी हो रहा है, जो कांग्रेस की करौली रैली में भी नजर आया। ऐसे कांग्रेस फिर से उन्हीं पर दांव लगाएगी या फिर नए चेहरे तलाशेगी।
उत्तर- ये आलाकमान का देखने का मामला है। कांगे्रस का मूवमेंट देखते हुए आम लोग कांग्रेस का टिकट मांग रहे हैं। जो दिख रहा है वो विरोधाभास नहीं है। खाली टिकट मांगने वालों का वर्तमान विधायकों से विरोध है।


प्रश्न- पिछले चुनाव में जिले की तीन सीट कांंग्रेस के खाते में आर्ई, लेकिन आपके गृह नगर हिण्डौन की सीट को बच नहीं पाई। मंत्री रहने के बावजूद भरोसीलाल जाटव हारे। इसके क्या कारण रहे ?
उत्तर- उसके पीछे थोड़़ा तो मोदी लहर कारण था। फिर कई कम्युनिटियोंं से जितना हम सोच रहे थे, उतना वोट नहीं दिया। इस बार में ध्यान देंगे। इस बार कांग्रेस ही हिण्डौन सीट जीतेगी।


प्रश्न- इस बार विधानसभा चुनाव में टिकट के मापदण्ड क्या रहेंगे?
उत्त्तर- आलाकमान द्वारा साफ सुथरी छवि और जिताऊ को ही टिकट दिया जाएगा।


प्रश्न- दागी और बागियों को लेकर क्या स्थिति रहेगी?
उत्तर- जिले में दागी और बागी नहीं है। वर्तमान विधायक भी ठीक छवि के हैं।


प्रश्न- टोडाभीम सें पीआर मीणा बागी रहे थे। इस बार उनको लेकर क्या सोचते हैं ?
उत्तर- टिकट निर्धारण आलाकमाण द्वारा किया जाएगा। इस बार ऐसा कुछ नपहीं होगा।


प्रश्न - जानकारी में आया है कि इस बार कांग्रेस गत चुनाव में पराजित हुए प्रत्याशियों से किनारा कर रही हैं। क्या आप इस बार जिले के एक मात्र पराजित प्रत्याशी भरोसीलाल जाटव के टिकट के लिए सिफारिश करेेंगे ?
उत्तर- भरोसीलाल चुनाव जरुर हारे थे, लेकिन अन्य के बजाय उनका प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। उन्होंने 54 हजार वोट लिए थे। केवल 8 हजार वोटों से हारे। जबकि दूसरे क्षेत्रों में कांग्रेस के प्रत्याशी बीस-बीस, तीस-तीस हजार वोटों के अंतर से हारे। प्रदेशाध्यक्ष या एआईसीसी के नेता निश्चित तौर पर इनके प्रदर्शन पर ध्यान देंगे।


प्रश्न- क्या आपकी ओर से सिफारिश की जाएगी ?
उत्तर- व्यक्तिगत तौर पर प्रदेशाध्यक्ष से किसी की सिफारिश नहीं करेंगे।


प्रश्न- इस बार जिले में विधानसभा चुनाव के लिए क्या मुद्दे रहेंगे ?
उत्तर- भाजपा विधायक ने शहर के लिए कोई नया काम नहीं किया। जो भी काम हुए वे कांगे्रस के टाइम पर स्वीकृत हुए थे।


प्रश्न- जिन मुद्दों पर वर्ष 2013 में विधानसभा चुनाव लड़ा और जीते उनका क्या हुआ। समस्याएं जस की तस हैं ?
उत्तर- कांग्रेस ने जो वादे किए थे उनको पूरा किया है।


प्रश्न- फिर विरोध क्यों हो रहा है। टोडाभीम और सपोटरा में विरोधी स्वर मुखर हो रहे हंै?

उत्तर- कांग्रेस की जीत की संभावनाओं को देखते हुए केंडिडेट््स ज्यादा हैं। टिकट चाहने वालों द्वारा आपस में ही विरोध किया जा रहा है। अकेले टोडभीम में 40 टिकट के दावेदार हैं।


प्रश्न- लोकसभा चुनाव में भाजपा को हिण्डौन विधानसभा क्षेत्र से सर्वाधित वोट मिले थे। हिण्डौन से जीत हासिल करने की क्या रणनीति रहेगी ?
उत्तर- बीजेपी के शासन की बुराइयों को हर बूथ पर जाकर बता रहें हैं। व्यापारी नोटबंदी और जीएसटी से परेशान है। मजदूर को रोजगार युवाओं को नौकरी नहीं मिली। सभी वर्ग सरकार से असंतुष्ट हैं। कांग्रेस के घोषणा-पत्र में बेरोजगार स्नातक युवाओं को साढ़े तीन हजार रुपए का भत्ता देना प्रस्तावित करेंगे।


प्रश्न- कांगे्रस ने एक सर्वे करवाया था, उसके आधार पर कितनी सीटें मिलने के आसार है ?
उत्तर- सर्वे तो कई चैनलों का भी आया है। कांग्रेस ने भी कराया है। उन्होंने 140 -150 सीटें बताई हंै। लेकिन मेरा यह सोचना है कि सरकार के प्रति आमजन में आक्रोश है। ऐसे में कांग्रेस की 170-175 सीटें आने की उम्मीद है।


प्रश्न- करौली में पिछली बार रेल योजना के लिए सरमथुरा में मनमोहन सरकार के रेल राज्यमंत्री ने उद्घाटन किया था। योजना अटकी पड़ी है। क्या सरकार बनने पर आगे प्रयास किए जाएंगे ?


उत्तर- भाजपा सरकार की मुख्यमंत्री ने रेल योजना को बंद करा दिया। हमने इसे घोषणा पत्र में इसे शामिल किया है। सरकार आने रेलवे लाइन का कार्य शुरु कराया जाएगा


प्रश्र- हाल ही में 25 से अधिक विभागों के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। क्या कांगे्रेस इसे मुद्दा बनाएगी और सरकार में आने पर मांगों का हल निकालने का प्रयास करेगी।
उत्तर- प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने पहले ही कह दिया था, कि सरकार आने पर कर्मचारियों की तर्कसंगत मांगों को तबज्जो दी जाएगी।


प्रश्न- इस बार टिकटों के चयन मेंं केवल जिताऊ को ध्यान में रखा जाएगा। या ईमानदार छवि को भी देखा जाएगा?


उत्तर- दोनों पर ही ध्यान दिया जाएगा। प्रत्याशी जिताऊ भी हो उसका चरित्र भी ठीक हो। जनता में उसकी साफ सुधरी छवि हो।


प्रश्न- महिलाओं को टिकट देने में पार्टी की क्या स्थिति रहेगी?
उत्तर- राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की सोच है कि चुनाव में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं और युवाओं को टिकट दिया जाए।


प्रश्न- टिकट देने में शिक्षा का स्तर क्या रहेगा ?
उत्तर- कोशिश रहेगी कि पढ़े लिखे लोगों को टिकट मिले। कोई व्यक्ति राजनीति में प्रसिद्ध है, जनता चाहती है तो कम पढा लिखा भी हो सकता है।


प्रश्न- करौली जिला डांग क्षेत्र में है। अधिकांश इलाके पिछड़े रहे है। गत बार आप सरकार में रहे। उस समय डांग विकास बोर्ड कुछ खास नहीं कर पाया। चुनाव में डांग विकास या विशेष पैकेज देने का मुद्दा बनाएंगे ?

उत्तर- हमारी सरकार आती है तो हम डांग विकास के लिए ज्यादा से ज्यादा बजट देंगे। पिछड़े इलाकों में अधिक कार्य कराए जाएंगे।


प्रश्न- करौली जिले में जाति आधारित राजनीति बढ़ चढ कर है। इसका आप कैसे मुकाबला करेेंगे।
उत्तर- जाति कोई मुद्दा नहीं है। जनता में किसी प्रतिनिधि को चुनना चाहती है तो जाति को नहीं देखती। अच्छे व्यक्ति को ही वोट देती है।


प्रश्न- करौली जिले में जातिगत सामाजिक नेता हैं। उनका ज्यादा प्रभाव है। क्या मानते हैं।
उत्तर- जाति के नाम पर जो राजनीति करता है उसका प्रभाव थोड़े ही दिन चलता है।


प्रश्न- जानकारी में आया है कि गुर्जर नेता कर्नल किरोडी सिंह बैसला भी अपने पुत्र के लिए करौली से टिकट चाह रहे हैं। जातिय नेता हावी रहेंगे या कार्यकर्ता को तवज्जो मिलेगी।
उत्तर- हमारी पार्टी में तो उन्होंने न तो टिकट के लिए आवेदन किया है और न ही सम्पर्क में आए है।