www.patrika.com/rajasthan-news/ 14 वर्ष में लखन सिंह ने 256 को दी मुफ्त शिक्षा, लोकतंत्र के हीरो
हिण्डौनसिटी. भारतीय थल सेना के कैप्टन के पद से सेवानिवृत हुए लखनसिंह निजी स्कूल संचालित कर वेबा महिलाओं की संतान और दिव्यांगों को नि:शुल्क पढ़ाई करा रहे हैं। 14 वर्ष में वे 256छात्र-छात्राओं को मुफ्त शिक्षण का चुके हैं। चालू सत्र में 22 छात्र-छात्राएं विभिन्न कक्षाओं में नि:शुल्क पढ़ रहे हैं। सेना में देश सेवा और सेवानिवृति के बाद कैप्टन की अनूठी सेवा का जज्बा शिक्षा के व्यवसायीकरण के दौर में मिशाल बना है।
विशेष बात है कि पूर्व सैनिक के इस स्कूल में शिक्षा के अधिकार की 25 फीसदी नि:शुल्क शिक्षा से अलग है। बकौल कैप्टन लखन सिंह राजपूत रेजीमेंट में सेवारत रहने के दौरान सैन्य विधवाओं और डिफेंस हैण्डीकैप्ट (सैन्य दिव्यांगों) की मदद करते जागा सेवा का जज्बा सेवानिवृत होने बाद भी जहन में बरकरार रहा। सेना से पेंशन होने बाद लखन सिंह ने बेवाओं की संतान और दिव्यांग बच्चों के लिए कुछ करने ठान पटेल नगर में वर्ष 2500 में उत्तम पब्लिक स्कूल शुरू किया। स्कूल मेें दिव्यांग और बेवा संतानों को बिना कोई कोटा तय कि प्रवेश दिया। पूर्व सैनिक के विद्यालय से कक्षा एक से10 तक करीब 256 छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा दी चुकी है। कैप्टन लखन सिंह निदेशक के तौर पर विद्यालय को कामकाज संभालते हैं।
सेवा में एक लाख रुपए की फीस माफी-
कैप्टन ने बताया कि वेवाओं की बच्चे व दिव्यांगों की शत प्रतिशत शुल्क माफी दी जाती है। इसे विद्यालय को हर वर्ष एक लाख रुपए की शुल्क आय को सेवा के मद में अंकित किया जाता है।
सेना में क्लर्क ट्रेनिक स्कूल के प्रिंसिपल-
कैप्टन लखनसिंह ने बताया कि वे राजपूत रेजीमेंंंट के फतेहगढ़ मुख्यालय में क्लेरिकल बिंग में थे। बाद में वे रेजीमेंट के क्लर्क ट्रेनिंग स्कूल के प्रिसिंपल (जेसीओ) बनाए गए। स्कूल में क्लर्क सैनिकों को सैनिकों की वेतन, पेंशन, प्रमोशन, सैन्य विधवाओं व सैन्य दिव्यांगों की मदद करना सिखाया जाता है। सैनिकों को सेवा की शिक्षा देते हुए उनके जहन में भी सेवा का भाव ऐसा घुला कि सामाजिक पीड़ा से टूटे हुए वर्ग सेवा करने की ठान ली।