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जलसेन में पानी आने के रास्तों से अवरोध होंगे ध्वस्त

पर्यावरण विशेषज्ञ टीम के साथ जलसेन विकास समिति ने चिह्नित किए अवरोधकसभापति ने जेईएन एवं नगर नियोजक को अवरोधकों को हटाने के दिए निर्देश

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जलसेन में पानी आने के रास्तों से अवरोध होंगे ध्वस्त


हिण्डौनसिटी. राजस्थान पत्रिका के अमृतं जलम् अभियान से जलसेन के विकास की जगी अलख का प्रभावी असर दिखाई देने लगा है। रविवार को पर्यावरण विशेषज्ञ टीम के साथ जलसेन विकास समिति एवं नगर परिषद के तकनीकी अधिकारियों ने जलसेन में पानी आने के अवरोधकों को देखा। पहाड़ की तलहटी में जलसेन का कैचमेंट एरिया होने के बाद भी बिना स्वीकृति बनाए गए एनीकटों को देख पर्यावरण विशेषज्ञ टीम आश्चर्यचकित रह गई।

नगर परिषद के सभापति व उपसभापति ने भी कैचमेंट एरिया में बनाए गए अवरोधकों पर चिन्ता व्यक्त की। सभापति अरविन्द जैन ने नगर नियोजक एवं जेईएन को मानसून से पहले जलसेन के अवरोधकों को हटाने एवं पहाड़ों की तलहटी से जलसेन तक नालों का प्रवाह बनाने के साथ क्षतिग्रस्त घाटों की मरम्मत का तत्काल कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए।


कई वर्षों से सूखे पड़े जलसेन को इस बार जल से लबालब कर देने के अमृतं जलम् अभियान के तहत नगर परिषद एवं शहर के प्रमुख लोगों की ओर से प्रारंभ किए गए साझा प्रयासों के तहत रविवार को नगर परिषद के सभापति अरविन्द जैन, उपसभापति नफीस अहमद, नगर नियोजक विनोद शर्मा, जेईएन नरसी मीना, राजपूताना सोसायटी के पर्यावरण विशेषज्ञ सत्यप्रकाश मेहरा, जलसेन विकास समिति के सदस्य डॉ. सुरेश गर्ग, चंद्रकेतु बेनीवाल, राकेश गुम्बर, महेश सोनी, सुनील सिंहल, अमित गुप्ता, मनोज कुमार, मनीष बंसल आदि आसमां से बरस रही आग की परवाह किए बिना दक्षिण-पूर्व की पहाडिय़ों तक फैले जलसेन के जलसंग्रहण क्षेत्र को देखने पहुंचे। जलसेन में जल की आवक के प्रमुख स्त्रोत दो नालों की दुर्दशा एवं बिना स्वीकृति बनाए गए कच्चे एनीकटों को देख यह टीम काफी व्यथित दिखाई दी। पर्यावरण विशेषज्ञ मेहरा ने अवरोधकों को जलसेन का अस्तित्व मिटाने की साजिश का अंग बताया और कहा कि अवरोधकों को नहीं हटाया तो हिण्डौन की लाइफ लाइन कहे जाने वाले जलसेन को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा। सभापति जैन ने गंभीरता दिखाते हुए परिषद के जेईएन को दक्षिण-पूर्व की कई किलोमीटर क्षेत्र में फैली पहाडिय़ों में बसरने वाले वर्षा-जल की हर बूंद को रीते पड़े जलसेन बांध तक पहुंचाने की कार्ययोजना तत्काल तैयार कर अमलीजामा पहनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलसेन के अस्तित्व को बचाने के लिए जरुरी है कि वर्तमान में जिन्दा नालों के बीच आए सभी अवरोधों को दूर कर जलसंग्रहण क्षेत्र में बहकर जाने वाले पानी की हर बूंद को जलसेन तक पहुंचाया जाए।


जलसेन के विकास में आड़े नहीं आएगी धन की कमी
सभापति जैन ने जलसेन के विकास की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राजस्थान पत्रिका के अमृतं जलम् अभियान के तहत जलसेन के विकास के लिए नगर परिषद की ओर से २५ लाख रुपए के कार्य कराए जाएंगे। इसके बाद भी जलसेन के विकास में धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। जलसेन के नालों के अवरोधों को हटाने एवं घाटों की मरम्मत में धन की आवश्यकता होगी तो और भी राशि का प्रबंध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सूखे पड़े जलसेन के पेटे में बिवाई की मानिंद चौड़ी होती दरारें और फफोलों की भांति उचलती पपडिय़ों को देख शहरवासियों में नैराश्य भाव उत्पन्न हो गया है, जिसे दूर करने की पहली जरूरत है।


कैचमेंट में बनाए एनीकट सरकारी राशि का अपव्यय-
खेड़लियान का पुरा एवं पहाड़ी की दूसरी ओर जलसेन के जलसंग्रहण क्षेत्र में भू-जल संरक्षण विभाग की ओर से अवैधानिक और गैर तकनीकी ढंग से कच्चे एनीकटों के रूप में बनाए गए अवरोधों को देख भरतपुर से आए जल संरक्षण एवं पर्यावरण विशेषज्ञ सत्यप्रकाश मेहरा ने भारी अचरज जताया। उन्होंने कहा कि भू-जल संरक्षण विभाग का यह कार्य न सिर्फ सरकारी धनराशि का अपव्यय है, बल्कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एवं सर्वोच्च न्यायालय की ओर से जल स्त्रोतों के संरक्षण के संबंध में जारी किए दिशा निर्देशों के भी सर्वथा विपरीत है। सभापति जैन ने बताया कि इस बारे में राज्य सरकार व भू-जल संरक्षण के उच्चाधिकारियों को शिकायत की जाएगी।