
आरोपों और तकरार में ही सिमट गई बैठक
करौली. जिला परिषद की साधारण सभा की बुधवार को हुई बैठक में एजेन्डे से अलग बिन्दुओं पर हंगामे के कारण मूल मुद्दे गौण होकर रह गए। हंगामे के बीच एक बार तो जिला प्रमुख, विधायक तथा उनके समर्थन में कुछ सदस्य बैठक से उठकर चले गए लेकिन कुछ देर बाद ही लौट भी आए।
जिला प्रमुख अभय मीना की अध्यक्षता में बैठक की शुरूआत ही तनाव के माहौल में आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे से हुई। सपोटरा विधायक रमेश मीणा सहित अन्य सदस्यों ने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा अन्य अधिकारियों पर जनहित के कामों में अडंगा लगाने और योजनाओं में शिथिलता के आरोप लगाए। करौली विधायक दर्शन सिंह ने आरोप लगाया कि जलदाय अधिकारियों की उदासीनता से पानी संकट है। विधायक कोष से स्वीकृत हैण्डपम्प स्थापित नहीं किए हैं। सपोटरा प्रधान रामलाल मीना ने टैंकरों में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते कहा कि एक टैंकर संचालित होता है, भुगतान चार टैंकर का उठाया जा रहा है।
हिण्डौन, मण्डरायल प्रधान सहित अन्य सदस्यों ने जलदाय अफसरों की कार्यप्रणाली के खिलाफ बोला। विभाग के अधीक्षण अभियंता नाराज सदस्यों के सवालों के जवाब नहीं दे सके। जिला परिषद सदस्य डॉ. सौम्या गुर्जर, पीआर मीना ने सपोटरा विधायक व कांग्रेस के कुछ सदस्यों पर बैठक को हाइजैक करने के आरोप लगाते हुए कहा कि अनेक सदस्यों को बोलने ही नहीं दिया जाता है। बैठक सिर्फ पानी, बिजली के मुद्दों पर समाप्त हो जाता है। बाद में सदस्यों की सहमति से ग्रामीण विकास की योजनाओं पर चर्चा की गई।
जांच की मांग
सदस्य शिवचरण, करौली विधायक तथा अन्य ने कहा कि सांसद कोष से स्वीकृत टैंकरों की क्वालिटी घटिया स्तर की है। सपोटरा विधायक ने कहा कि एक टैंकर को एक लाख ६० हजार रुपए में खरीदा है, जो बाजार में ५०-५५ हजार रुपए का है। ये ही सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा है। सीईओ ने इस मामले की जांच का विश्वास दिलाया।
विधायक व सीईओ में हुई तकरार
विधायक रमेश मीणा ने जिला परिषद के सीईओ पर पानी के लिए आवंटित पैसे का समुचित उपयोग नहीं करने सहित अनेक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एक जैसा कार्य अलग-अलग एजेन्सियों को नहीं दिया जा सकता है। इस जवाब से सीईओ तथा विधायक में तकरार शुरू हो गई। विधायक ने कहा कि वे लोकसेवक की तरह काम नहीं कर रहे हैं। सीईओ ने नियमों को बताना शुरू किया तो सपोटरा विधायक ने बोला कि उनकी पत्नी का नियमों के विपरीत करौली के राजकीय अस्पताल में पदस्थान किया गया है। इसका सीईओ ने जोरदार विरोध किया तथा बताया कि उनकी पत्नी नि:शुल्क रूप से सेवा दे रही है। अन्य सदस्यों ने भी ऐसे आरोप को लेकर आपत्ति जताई। सीईओ का कुछ सदस्यों ने पक्ष लेते हुए विधायक का विरोध किया। उन्होंने एजेन्डे से विपरीत मुद्दे उठाने तथा अन्य सदस्यों को नहीं बोलने देने को लेकर विधायक रमेश मीणा को आरोपित किया। सौम्या ने कहा कि महिलाओं की उपेक्षा की जाती है। उनको बोलने नहीं दिया जाता। जबरन बोलने से रोकना बरदाश्त नहीं किया जा सकता।
पहले बहिष्कार फिर लौटे
कुछ ग्राम पंचायतों को मनमाने तरीके से राशि आवंटित करने का आरोप तथा उनकी उपेक्षा करने की बात कहकर जिला प्रमुख, सपोटरा, करौली विधायक, कांग्रेस के प्रधान व जिला परिषद के अनेक सदस्य बैठक का बहिष्कार कर चले गए। उनके जाने पर सीईओ ने नियमों का हवाला देते हुए उपजिला प्रमुख को बैठक की अध्यक्षता करने के लिए बुलाया और बैठक कार्रवाई को जारी रखा। बात कुछ आगे बढ़ती इसी बीच कांग्रेस सदस्य बैठक में वापस लौट आए। लेकिन तनाव व विवाद के चलते बैठक कुछ देर बाद ही समाप्त हो गई। इस कारण अन्य मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई।
शौचालय निर्माण में घोटाला
मण्डरायल प्रधान ने कहा कि कम्प्यूटर ऑपरेटर ने शौचालय निर्माण के लाभार्थियों की राशि दूसरों के खाते में ट्रान्सफर करके लगभग एक करोड़ का घोटाला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उसके खिलाफ विकास अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। पंचायत समिति के विकास अधिकारी ने बताया कि कम्प्यूटर ऑपरेटर से कुछ राशि वसूल कर ली गई है, रिकॉर्ड लिया जा रहा है। मामले की विस्तृत जांच भी की जा रही है।
Published on:
19 Jul 2018 11:47 am
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