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नियमों की नहीं परवाह,कृषि भूमि पर काट रहे अवैध कॉलोनियां!

Irrespective of rules, illegal colonies are being cut on agricultural land! खेती की जमीन में उगा रहे मकानों की फसल,ठगे जा रहे लोग, नगरपरिषद की नहीं निगरानी

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नियमों की नहीं परवाह,कृषि भूमि पर काट रहे अवैध कॉलोनियां!

नियमों की नहीं परवाह,कृषि भूमि पर काट रहे अवैध कॉलोनियां!

हिण्डौनसिटी. कोरोना महामारी के बाद प्रोपर्टी बाजार में आई आर्थिक मंदी के बावजूद उपखंड मुख्यालय पर कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां काटी जा रहीं हंै। भूमाफियाओं का यह अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है, लेकिन प्रशासन के अलावा नगरपरिषद के अधिकारी आंखे मूंद कर बैठे हुए हैं।

बेनियम काटे जा रहे भूखंडों पर बिना अनुमति के अवैध निर्माण भी हो रहें है। कॉलोनाइजर लोगों को सस्ते भूखंड का लालच देकर बिना रजिस्ट्री के ही पॉवर ऑफ अटॉर्नी (शपथ पत्र) पर भूखंड बेच रहे हैं।


सूत्रों के मुताबिक प्रापर्टी कारोबार से जुड़े लोग व भूमाफिया मिलकर शहरी क्षेत्र में किसानों से उनकी खातेदारी की कृषि भूमि को खरीद कर अवैध रूप से भूखंड काट रहे हैं, जो कि टाउनशिप पॉलिसी 2010 का उल्लंघन है। लेकिन कड़ी कार्रवाई नहीं होने से प्रापर्टी कारोबारी कुकुरमुत्तों की तरह शहर के आसपास कई कॉलोनियां काट चुके हैं। जबकि विभिन्न मार्गों पर अब भी अवैध रुप से कॉलोनियां काटी जा रही है।

इन मार्गों पर काट रहे कॉलोनी-
सूत्रों के अनुसार शहर के महवा रोड़, करौली रोड़, बयाना रोड़, बाईपास पर राजकीय महाविद्यालय के पीछे, निर्माणाधीन ओवरब्रिज के पास, बरगमां रोड़, झारेड़ा रोड़, तेली पंसरी रोड़, लपावली रोड़, खरेटा रोड़, बाजना रोड़, बनकी रोड़ समेत अन्य कई स्थानों पर कृषि भूमि में धडाधड़ अवैध कॉलोनियां काटी जा रही है। लेकिन प्रशासन कड़ी कार्रवाई की जहमत नहीं उठा रहा।

झांसे में आएं, तो उम्रभर पड़ेगा पछताना -
सूत्रों के अनुसार कॉलोनी काटने के दौरान प्रॉपर्टी कारोबारी बिजली, पानी सहित तमाम सुविधाएं मुहैया कराने का भरोसा देते हैं। लेकिन प्लॉट बिकने के बाद कॉलोनी की खैर खबर तक नहीं लेते। भूखंड खरीदने वाले लोग बाद में जमीन मालिक और कॉलोनाइजर के यहां चक्कर लगाते रहते हैं। इसलिए प्रापर्टी कारोबारियों के झांसों में नहीं आएं, नहीं तो बाद में भुगतना पडेगा।

ले-आउट और भूमि रुपांतरण अनिवार्य-
नियमानुसार कृषि भूमि पर भूखंड काटने से पहले भूमि को आवासीय या व्यावसायिक भूमि में परिवर्तन कराना अनिवार्य होता है। इसके लिए धारा 90ए के तहत प्रक्रिया पूरी की जाती है। बाद में कॉलोनाइजर संस्था के नाम जमीन स्थानांतरित हो जाती है। इसके बाद लेआउट पास कराना होता है। जिसमें कुल भूमि के 60 प्रतिशत भाग पर भूखंड व 40 प्रतिशत हिस्से पर पार्क व पार्किंग, सडक़ जैसी सुविधाएं होती हैं। इसके बाद नगरपरिषद इस जमीन पर खरीदे गए भूखंड का पट्टा जारी कर सकती है। (पत्रिका संवाददाता)

बगैर अप्रूव्ड कॉलोनी के बड़े नुकसान-
1. कृषि भूमि पर बसी बगैर अपू्रव्ड ऐसी कॉलोनी में खरीदे गए प्लॉट का पट्टा जारी नहीं हो सकता।
2. आवासीय या व्यवसायिक निर्माण की स्वीकृति भी नहीं मिलेगी।
3. भवन निर्माण के लिए किसी भी बैंक से लोन स्वीकृत नहीं होगा।
4. सडक़, बिजली-पानी, सीवरेज आदि के कनेक्शन भी नहीं मिल सकते।

होगी कार्रवाई, आयुक्त को दिए निर्देश-
नगरीय क्षेत्र में प्लान स्वीकृत कराए बिना कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां काट भूखंडों का बेचान करने की जानकारी मिली है। भूमाफिया व प्रॉपर्टी कारोबारियों पर ठोस कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए नगरपरिषद आयुक्त को आदेश जारी किए हैं।-
सुरेश कुमार यादव, एसडीएम, हिण्डौनसिटी।