
चम्बल का पानी आए तो जगर बांध को मिले संजीवनी
हिण्डौनसिटी. जिले का दूसरा बड़ा जगर बांध कई दशक से पूर्ण भराव के निशान को नहीं छू सका है। कई वर्षों से पर्याप्त बारिश नहीं होने से बांध में नाम मात्र की जल आवक हो पाई। पाल से दूर पेटे में पानी के सिमटने से बांध दूर तक रीता पड़ा है। अब क्षेत्र के लोगों को बारिश की अपर्याप्तता से सूखे रहे बांध को चम्बल के पानी की संजीवनी का इंतजार है।
क्षेत्र के किसान करीब डेढ़ दशक से चम्बल नदी का पानी लिफ्ट परियोजना के जरिए पांचना बांध और फिर जगर बांध में लाने की मांग कर रहे हैं। गत दिनों क्षेत्रीय सांसद डॉ. मनोज राजौरिया द्वारा केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र ङ्क्षसह से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपने से लोगों की उम्मीद को बल मिला है।
गेज पर सूखा, पेटे में सिमटा पानी-
30 फुट भराव क्षमता के जगर बांध में बीते मानसून सीजन में गेज तक महज 9.6 फीट जल भराव हुआ था। जो अब सूख गया है। चौमासे के चार माह बाद ही बांध में डेड स्टॉक लायक पानी नहीं है। बांध के रीता रहने से क्षेत्र के किसानों की इस बार भी नहरों से रबी की फसल की सिंचाई की आस अधूरी रह गई। अब बांध के सूखने से भूजल स्तर के गिरने की चिंता सताने लगी है।
मानसून की बेरुखी-
डांग क्षेत्र की कैचमेंट एरिया में मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश नहीं होने से क्षेत्र के प्रमुख जल स्रोत जगर बांध में पर्याप्त पानी की आवक नहीं हो सकी। बीते दो वर्ष से बारिश करी अपर्याप्तता के कारण पानी बांध की विंगवाल और वेस्टवीयर को छू नहीं सका है। बांध में दूर तक पेटा सूखा पड़ा है। इससे आगामी गर्मियों में पेयजल संकट के हालात और गंभीर होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। जगर के पास पटपरीपुरा में 30 नलकूप लगे हैं। जिनसे जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग शहर में पेयजल आपूर्ति करता है।
वर्ष 1967 में चली थी चादर
आजादी के बाद वर्ष 1957 में 88 वर्ग मील क्षेत्र में मिट्टी की पाल से जगर बांध का निर्माण किया गया था। उस दौरान बांध की भराव क्षमता 27 फीट थी। वर्ष 1967 में पर्याप्त बारिश होने पर पाल से तीन फीट ऊपर यानी 30 फीट पर बांध पर चादर चली थी। बांध की भराव क्षमता को वर्ष 2004 में 27 फीट से ऊंचा कर 30.6 फीट किया गया।
12 वर्ष से सूखी हैं नहरें-
जगर बांध में पर्याप्त भराव नहीं होने से 12 वर्ष से नहरें सूखी पड़ी हैं। जल संसाधन विभाग के सूत्रों के अनुसार कलक्टर की अध्यक्षता में समिति के निर्णय पर नवम्बर-दिसम्बर माह में गेहूं-चना की फसल के लिए बांध से पानी छोड़ा जाता है। नहरों में 13 नवम्बर 2008 के बाद पानी नहीं छोड़ा गया है। ऐसे में किसानों को 800-900 फीट की गहराई में नलकूप खुदवाकर फसल की सिंचाई करनी पड़ रही है।
26 गांवों से निकल रही आठ नहरें-
क्षेत्र के जगर बांध से सिंचाई क्षेत्र में 26 गांव शामिल हैं। इस गांवों में सिंचाई के लिए बांध का पानी पहुंचाने के लिए बांध से मुख्य नहर सहित आठ माइनर नहरों निकल कर रही है। जो बांध से पानी छोडऩे पर 6265 हैक्टेयर भूमि को सिंचित करती हैं। 44 किलोमीटर लम्बी नहर में18 किलोमीटर मैन कैनाल व 26 किलोमीटर की आठ माइनर कैनाल हैं।
यह होता है डेड स्टॉक
जन स्वास्थ्य अभियात्रिकी विभाग की मांग पर बांध में 8 फीट पानी डेड स्टॉक में आरक्षित रखा जाता है। बांध में 288.89 एमसीएफटी पानी से आस-पास लगे सरकारी नलकूप रिचार्ज होते हैं। लेकिन वर्तमान में बांध में गेज पर सूखा है।
इनका कहना है-
चम्बल का पानी आए तो वर्ष भरा रहेगा बांध
दो वर्ष से अच्छी बारिश नहीं हो रही है। बीते मानसून सीजन में कैचमेंच एरिया में बारिश नहीं हुई। फिलहाल गेज के पास पानी नहीं होने से बांध सूखा है । लिफ्ट परियोजना से पांचना का पानी आए ता ेबांध में वर्ष भर जलभराव रह सकेगा।
शिवराम मीणा, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग, हिण्डौनसिटी
फैक्ट फाइल
जगर बांध
भराव क्षमता- 30.6 फीट गेज(1640 एमसीएफटी)
कैचमेंट एरिया - 227.80 वर्ग किलोमीटर
नहरों की लम्बाई- 44 किलोमीटर
सिंचाई के गांव- 26
सिंचाई क्षेत्रफल- 6265 हैक्टेयर भूमि
बांध में जल भराव की स्थिति
वर्ष गेज
2016 26 फीट 6इंच
2017 15 फीट 6 इंच
2018 18 फीट 6 इंच
2019 11 फीट 2 इंच
2020 9 फीट 6 इंच (अब सूखा)
Published on:
24 Jan 2021 10:00 am
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