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हिन्दी को बढ़ावा देने की खातिर दो मित्र इस तरह से जुटे हैं प्रयासों में

हिन्दी में अभिव्यक्ति को लेकर आई समस्या को तलाशा समाधानहिन्दी दिवस पर विशेष  

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हिन्दी को बढ़ावा देने की खातिर दो मित्र इस तरह से जुटे हैं प्रयासों में

हिन्दी को बढ़ावा देने की खातिर दो मित्र इस तरह से जुटे हैं प्रयासों में

दिनेश शर्मा

करौली. आईआईटी कर चुके जिले के निवासी दो मित्र हिन्दी भाषा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 'पंक्तियां नामक प्रयास में जुटे हैं। दोनों साथी हिन्दी के प्रचार-प्रसार की खातिर इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी मंशा है कि हिन्दी ना केवल व्यक्तिगत स्तर पर प्रचारित हो, बल्कि यह सामुदायिक स्तर पर वृहद रूप ले।

करौली जिले में टोडाभीम इलाके के जिंसी का पुरा निवासी दीपक शंकर जौरवाल एवं रायसना निवासी अभिषेक मेहर घनिष्ठ मित्र हैं। ये दोनों वैसे तो कानपुर से आईआईटी कर चुके हैं, लेकिन हिन्दी को बढ़ावा देने के मिशन में इन दिनों जुटे हैं। आईआईटी के दौरान खुद के विचारों को अभिव्यक्त करने में अंग्रेजी भाषा को लेकर समस्या आई तो दोनों ने इसे एक चुनौती माना। इसके समाधान की मन में ठानकर हिन्दी को बढ़ावा देने के प्रयास में जुट गए। पहले सोशल मीडिया पर सक्रिय रूप से इस प्रयास में 6 लाख लोगों को जोड़ा। उसके बाद अप्र्रेल 2021 में दोनों ने 'पंक्तियां नामक मोबाइल ऐप तैयार किया। इसके जरिए लोग हिन्दी भाषा में विचारों का आदान-प्रदान कर रहे हैं। अभी ये दोनों गुडग़ांव में रहकर इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं।

इसलिए की शुरूआत

दीपक और अभिषेक कहते हैं कि किसी भी सफर की शुरू करना आसान नहीं होता, लेकिन विश्वास के साथ आगे बढऩे पर सफलता जरूर मिलती है। वे कहते हैं कि उन्हें आईआईटी कानपुर में अंग्रेजी न बोल पाने की समस्या का सामना किया। वहां मंच पर जाने वाला हर व्यक्ति अंग्रेजी में अपनी बात रखता है। इससे हिन्दी या क्षेत्रीय भाषी लोग मंच पर जाने से कतराते, जो भाषा एक अभिव्यक्ति का माध्यम होती है, वही इनके सामने एक अवरोध बनकर खड़ी हो गई। दीपक कहते हैं कि अंग्रेजी भाषा सीखी और बोली तो जानी चाहिए, लेकिन हिन्दी भाषा समृद्ध है, जिस पर नाज करते हुए गहराई से समझा और बोला जाना चाहिए।

ताकि हिन्दी में रख सकें अपने विचार


लोग हिन्दी भाषा में विश्वास के साथ अपने विचार रख सकें, इस मंशा को लेकर दीपक ने सभी सोशल मीडिया पर हिन्दी पंक्तियां नाम से एक पेज बनाया। लोग अपने विचार वहां पहुंचाते, उसमें से छंटनी कर कुछ विचारों को पेज पर जगह देते थे। दीपक के अनुसार प्लेस्टोर से ऐप को अब तक 20 हजार से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं। दीपक व अभिषेक बताते हैं कि इस एप के माध्यम से उनकी कोशिश हिन्दी भाषी लोगों एवं संस्थाओं को एक कॉमन प्लेटफार्म पर लाने की है, जिससे लोगों को सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर न जोड़कर एक कम्युनिटी स्तर पर जोड़ा जा सके और और लोग विभिन्न विषयों पर अपने विचारों का आदान प्रदान भी कर सके।