
हमारी विरासत: तिमनगढ़ की कलाकृतियां स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना
करौली. जिले की मासलपुर तहसील मुख्यालय से करीब 13 किलोमीटर दूर सागर नामक स्थान की पहाड़ी पर स्थित तिमनगढ़ किले का प्राचीन ऐतिहासिक महत्व है। किले का निर्माण 1100 ईस्वी में कराया गया था। एक हमले में यह किला क्षतिग्रस्त हो गया था। बाद में 1244 ईस्वी में यदुवंशी राजा तिमनपाल ने इस किले का दुबारा निर्माण कराया। किले के भीतर बाजार, फर्श, बगीची, मंदिर, कुओं के अवशेष आज भी मौजूद हैं। किले को देखने के लिए स्थानीय सहित अन्य जगह से लोग आते हैं।
मौजूद है दर्जनों प्राचीन अवशेष
तिमनगढ़ का किला आज भी शिल्पकला का बेजोड़ नमूना है। सैकड़ों वर्षों बाद भी किले की शिल्पकला को देखकर यहां आने वाले लोग मुग्ध हो जाते हैं। यहां पाए जाने वाले प्राचीन कुआं, प्राचीन लम्बी सुरक्षा दीवार, सनातन मंदिर, मंदिरों के अवशेष, जैन मंदिरों की श्रंृखला, मंदिर, सती चिह्न, शिलालेख आदि इसकी ऐतिहासिकता को दर्शाते हैं।
संरक्षण बिना अस्तित्व पर संकट
तिमनगढ़ किले और इसमें पाए जाने वाले ऐतिहासिक अवशेषों का संरक्षण नहीं होने से यह जर्जर हो रहे हैं। ऐसे में किले के अस्तित्व पर संकट है। किले में मौजूद प्राचीन मंदिर, कलाकृतियां आदि देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहे हैं।
परकोटा बयां करता है मजबूती
तिमनगढ़ का किला पहाड़ी पर काफी मजबूती के साथ बनाया गया है। परकोटे की मजबूत दीवारें, शिल्पकला, जाली, झरोखे किले की बेहतरीन कारीगरी को दशाते हैं। सैकड़ों साल बाद भी किला मजबूती के साथ खड़ा है। तिमनगढ़ किले से आसपास का प्राकृतिक नजारा सभी को मोह लेता है। किले के विशाल दरवाजों पर मौजूद गुम्बदनुमा गुमटियों में विशेष कलाकृति झलकती है। रेस्ट हाउस बनाया गया था, लेकिन इसमें भी कोई इंतजाम नहीं ना ही इसकी देखरेख हो रही है।
Published on:
18 Dec 2022 11:59 am
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