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VIDEO: सेहत सुधार और प्ले ग्रुप मॉड्यूल शिक्षा का दावा खोखला, बिजली-पानी की भी नहीं सुविधा

करौली. आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की सेहत सुधार से लेकर प्ले ग्रुप मॉड्यूल के तहत स्कूल पूर्व शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे तो सरकार खूब कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।

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करौली. आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की सेहत सुधार से लेकर प्ले ग्रुप मॉड्यूल के तहत स्कूल पूर्व शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे तो सरकार खूब कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। सरकारी उपेक्षा के कारण वर्तमान हालात में जिले के 1309 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 170 किराए के भवन में चल रहे हैं। वहीं 1269 में बिजली, 835 में पेयजल और 773 में शौचालय की सुविधा भी नहीं है।
ऐसे में यह गंभीर हो जाता है कि, भीषण गर्मी में हवा और पीने के पानी के बिना बच्चे कैसे पढेंगे और आगे बढेंगे।
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिला मुख्यालय पर संचालित कई आंगनबाड़ी केंद्रों को भी सरकारी भवन नसीब नहीं हो रहा है। जिससे 363 जर्जर भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। जहां हरपल खतरा रहता है। इतना ही नहीं भवन किराए पर लेने के लिए भी विभाग से पर्याप्त किराया नहीं मिल रहा। नतीजतन गली-मोहल्लों में छोटे-छोटे कमरे लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है।
786 आंगनबाडी केन्द्रों पर ही आया चाइल्ड फ्रेंडली फर्नीचर : महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिलेभर में विभागीय भवनों में संचालित एवं सरकारी विद्यालयों में समन्वित 786 आंगनबाड़ी केन्द्रों में सरकार की ओर से चाइल्ड फ्रेंडली फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है, जबकि 523 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर अभी तक फर्नीचर नहीं आया है।
उल्लेखनीय है कि नौनिहालों को प्ले ग्रुप मॉड्यूल के तहत स्कूल पूर्व शिक्षा देने की मंशा से सरकार ने प्रदेश के प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र पर 16-16 कुर्सियां, 2-2 राउंड टेबल, फिसल पट्टी समेत बच्चों के खेल-कूद एवं मनोरंजन युक्त शिक्षा का सामान मुहैया कराया जा रहा है।

करौली और हिण्डौन शहर में किराए के भवन
जिले की करौली और हिण्डौन परियोजना के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में 174 आंगनबाड़ी केन्द्र किराए पर संचालित हैं। इनमें से 105 शहर व 69 ग्रामीण क्षेत्र में चल रहे हैं। विभाग की ओर से शहरी क्षेत्र 750 रुपए एवं ग्रामीण क्षेत्र में 200 रुपए प्रतिमाह आंगनबाडी केन्द्र का किराया दिया जाता हैं। इस मामूली किराए में आंगनबाड़ी केन्द्र के लिए भवन मिलना टेढ़ी खीर है।

563 के निजी भवन, इनमें से 363 जर्जर हाल
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में 563 आंगनबाडी केन्द्र स्वयं के भवनों में संचालित हैं। ये भवन 20 से 25 वर्ष पुराने हैं। इनमें से 363 भवन ऐसे हैं, जो जर्जर हालत में हैं। इनकी मरम्मत कराया जाना बेहद जरूरी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। जानकारी के अनुसार 443 आंगनबाडी केन्द्र विद्यालय भवनों में, 66 केन्द्र सामुदायिक भवनो में तथा 67 केन्द्र अन्य सरकारी भवनों में चल रहे हैं।

फैक्ट फाइल
परियोजना आंगनबाड़ी केन्द्र
करौली 350
हिण्डौन 334
टोडाभीम 227
सपोटरा 176
नादौती 124
मंडरायल 198

इनका कहना है
जिले के 786 आंगनबाड़ी केन्द्रों को प्ले ग्रुप मॉड्यूल में विकसित किया गया है। जबकि जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए जिला परिषद एवं पंचायत समितियों को लिखा है। भूमि आवंटन की मांग कई बार कर चुके हैं।
सुशीला देवी, उप निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, करौली।