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चम्बल नदी पर पुल तैयार, फर्राटे से होगी चम्बल पार, राजस्थान-मध्यप्रदेश की राह सुगम

करौली. राजस्थान-मध्यप्रदेश की सीमाओं को विभाजित कर रही चम्बल नदी को पार करने में अब चुटकियों का समय लगेगा। यह संभव हुआ है

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चम्बल नदी पर पुल तैयार, फर्राटे से होगी चम्बल पार, राजस्थान-मध्यप्रदेश की राह सुगम

चम्बल नदी पर पुल तैयार, फर्राटे से होगी चम्बल पार, राजस्थान-मध्यप्रदेश की राह सुगम

करौली. राजस्थान-मध्यप्रदेश की सीमाओं को विभाजित कर रही चम्बल नदी को पार करने में अब चुटकियों का समय लगेगा। यह संभव हुआ है मण्डरायल स्थित चम्बल पर बने हाई लेवल ब्रिज बनने से। इससे दो राज्यों की बीच की दूरी तो घटेगी ही, साथ ही आवागमन भी सुगम होगा। पहले जहां जयपुर से ग्वालियर-मुरैना के लिए धौलपुर होकर लगभग 370 किलोमीटर का रास्ता नापना पड़ता था, वहीं अब यह दूरी मण्डरायल होकर 235 किलोमीटर रह जाएगी।

यानी 135 किलोमीटर कम चलना पड़ेगा। इससे मध्यप्रदेश के मुरैना, सबलगढ़, कैलारस, विजयपुर से जयपुर, करौली, कैलादेवी, मेहन्दीपुर बालाजी की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। दशकों का इंतजार हुआ पूरा: दशकों से बहुप्रतीक्षित उच्च स्तरीय पक्का पुल का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इससे क्षेत्रवासियों का दशकों पुराना सपना पूरा हुआ है। मंगलवार को केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी वर्चुअल माध्यम से पुल का लोकार्पण करेंगे। पुल निर्माण से दो राज्यों मध्यप्रदेश-राजस्थान की राह आमजन के लिए न केवल सुगम होगी, बल्कि मुम्बई सहित कई शहरों की दूरी भी कम होगी।

जिले के मण्डरायल कस्बे से करीब पांच किलोमीटर दूर चम्बल नदी पर इस पुल का निर्माण हुआ है। करीब 1150 मीटर लम्बे उच्च स्तरीय इस पुल पर करीब सवा सौ करोड़ रुपए की लागत आई है। सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चम्बल पुल का निर्माण कार्य गत माह पूर्ण हो गया है।

जुलाई 2019 में शुरू हुआ था निर्माण कार्य
राजस्थान-मध्यप्रदेश की सीमाओं को विभाजित कर रही चम्बल नदी पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण का कार्य जुलाई 2019 में शुरू हुआ था। 126.76 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस हाई लेबल ब्रिज की लम्बाई 1150 मीटर है। वहीं दोनों राज्यों की सीमाओं की ओर 1740 मीटर की अप्रोच सड़क का भी निर्माण शामिल है।

23 स्पान और 24 पिलर तैयार
सार्वजनिक निर्माण विभाग सूत्रों के अनुसार इस हाई लेबल ब्रिज में निर्माण के तहत राजस्थान के राजघाट से मध्यप्रदेश सीमा अटार घाट तक पुल के लिए कुल 24 पिलरों का कार्य पूर्ण हो चुका है। प्रत्येक पिलर की ऊंचाई 50 मीटर है। पूरे पुल पर कुल 23 छत डाली गई हैं। इसके साथ ही दोनों ओर सुरक्षा दीवार-रैलिंग, फैसिंग का कार्य किया गया।

व्यापारिक रिश्ते होंगे मजबूत
पुल निर्माण से दोनों राज्यों के शहरों-कस्बों के बीच व्यापारिक-सामाजिक रिश्ते भी मजबूत होंगे। वहीं मुम्बई सहित अन्य शहरों की सड़क मार्ग की दूरी भी कम होगी। अभी लोग स्टीमर से और गर्मियों में लगने वाले अस्थाई पॉन्टून पुल पर होकर आवागमन करते हैं। बारिश के दिनों में जब चम्बल में पानी की आवक बढ़ती है तो आवागमन बंद हो जाता है। वहीं स्टीमर से नदी को पार करना किसी खतरे से कम नहीं होता। पूर्व में स्टीमर के जरिए दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। लेकिन अभी तक पुल के अभाव में जोखिमभरी यात्रा करना यात्रियों की मजबूरी है।

वर्चुअल माध्यम से होगा लोकार्पण
चम्बल नदी पर नवनिर्मित हाईलेबल ब्रिज का मंगलवार 4 जुलाई को केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी वर्चुअल माध्यम से लोकार्पण करेंगे। सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता शरत कुमार मीना ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी 4 जुलाई को प्रतापगढ से वर्चुअल माध्यम से पुल का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर यहां कलक्ट्रेट स्थित जिला स्तर के डीओआईटी के वीसी कक्ष में लोकार्पण का लाइव प्रसारण होगा। इस मौके पर ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री रमेश चंद मीना एवं क्षेत्रीय सासंद डॉ. मनोज राजौरिया सहित अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इधर सोमवार को सांसद डॉ. मनोज राजोरिया ने यहां सर्किट हाउस में पत्रकारवार्ता में जानकारी दी कि केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी राजस्थान दौरे के दौरान वर्चुअल माध्यम से पुल का उद्घाटन करेंगे। सांसद ने कहा कि चम्बल पुल से न केवल दोनों राज्यों के बीच आवागमन सुगम होगा, बल्कि विकास में भी सहायक होगा। साथ ही पुल के माध्यम से विभिन्न शहरों की दूरी कम हो जाएगी।