हिण्डौनसिटी. बर्षों बाद आए दोहरे सावन में भी जलसेन तालब में अपेक्षित जलभराव नहीं हुआ है। शहर की पुरानी आबादी क्षेत्र का प्रमुख जल स्त्रोत रहे जलसेन तालाब में महज घाटों के पास ही बारिश जल जमा हुआ है, जबकि दूर तक अधिकांश पेटा सूखा पड़ा है।
पुरानी आबादी क्षेत्र के बुजुर्गों ने बताया कि पहले सावन माह मेंं जलसेन तालाब पूरा भर जाता है। हवा के झोकों से पानी की सतह पर इठलाती जल तरंगें घाटों की सीढिय़ों को छूकर मनोरम दृश्य बनाती थी। तालाब पर सुबह-शाम नहाने व तैरने वालों की भीड़ लगती थी। लेकिन करीब डेढ दशक से जलसेन तालाब में बारिश के दौर में पानी की आवक थम गई है। कैचमेंट एरिया में नालों व पानी आने के रास्तों के अवरुद्ध होने से अब जलसेन आस-पास से बह कर आया जल ही एकत्र हो सका है। ऐसे में गोमती आश्रम के पिछवाड़े से लेकर छत्तू घाट, राम घाट मसान घाट, पीरिया की कोठी व पंचायती मंदिर के घाटों के पास छोटे से क्षेत्र में पानी जमा है। लोगों का कहना है कि इस वर्ष दोहरा सावन होने से अच्छी बारिश व जलसेन में पूरा जल भराव की उम्मीद थी। अधिक मास के बाद सावन माह भी चार दिन में बीतने को है, लेकिन जलसेन में सीमित क्षेत्र में एकाध सीढ़ी ही जलभराव हो सका है। तहसील कार्यालय सूत्रों के अनुसार इस वर्ष 15 जून से अब तक शहरी क्षेत्र में 374 एमएम बाारिश दर्ज की गई है। जबकि वर्ष गत वर्ष में मानसून सीजन में 573 एमएम बारिश हुई थी।
जलसेन से जुड़ी हैं धार्मिक आस्थाएं-
जलसेन तालाब से शहर की धार्मिक आस्थाएं भी जुड़ी हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के बाद जलझूलनी एकादशी पर पांच प्राचीन मंदिरों से कृष्ण विग्रह प्रतिमाओं को डोलों में विराजित कर नगर भ्रमण करवा जलसेन के छत्तूघाट पर लाया जाता है। सभी पांच डोलों में सजी झांकियों को सामूहिक आरती के बाद ब्रज परम्परा के अनुसार जलसेन के घाट पर जल से प्रतीकात्मक स्नान व कान्हा की पोषाक पखारी जाती हैं।
इनका कहना है
बीते पांच साल से क्षेत्र में कम बारिश होने से जलसेन में पानी की आवक है। अमृत योजना के तहत जलसेन तालाब की सार संभार की जा रही है। सिटी पर्यटक स्थल के रूप में विकसित कर तालाब के स्वरूप को फिर से जीवंत किया जा रहा है।
महेंद्र सिंह, कार्यवाहक अधिशासी अभियंता ्र
नगर परिषद, हिण्डौनसिटी.
फैक्ट फाइल-
जलसेन का जल आवक क्षेत्र (कैचमेंट एरिया)- 6.73 वर्ग किलोमीटर
जलभराव क्षेत्र- 125 एकड
भराव क्षमता- 15 एमसीएफटी (5 फीट)
पाल की लंबाई- 105 चैन (10500 फीट)
घाटों की संख्या- 20
जल आवक स्त्रोत- तीन नाले
पूर्ण भराव- 1972, 1995 व 2005
वर्तमान हाल- पेटे में घाटों के पास जल भराव, कचरे से अटे घाट