
Sneha's story: meet the Indian woman Snehlata Bhardwaj
''कड़ी मेहनत और लगन के साथ अगर परिवार का साथ मिल जाए तो कोई भी सफलता दूर नहीं।'
बेहद साधारण परिवार में जन्मी डॉ. स्नेहलता भारद्वाज का जीवन इसी बात का उदाहरण है। वह राजस्थान की राजधानी जयपुर में पुराना रामगढ़ मोड़ स्थित सरस्वती विद्यापीठ सीनियर सेकंडरी स्कूल की प्रिन्सीपल हैं। इनका बचपन संघर्षपूर्ण रहा। आर्थिक तंगी के कारण पूरी पढाई सरकारी स्कूल से हुई। बचपन में ही मां का साया छूट गया। इस कारण जिंदगी में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन कभी हार नहीं मानी।
— 18 वर्ष की उम्र में राजेश भारद्वाज से शादी हुई। इसके बाद पति के सहयोग से शिक्षा जगत में पहला कदम रखा। इसके साथ ही एम.ए., बी.एड, एवं डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की।
— लड़कियोंं के पढाई में वंचित रह जाने के कारण इन्होंने स्नेह फाउण्डेशन की स्थापना की, ताकि बेटियां शिक्षा से वंचित न हों। इसके साथ ही निरक्षर महिलाओं को साक्षर बनाने के लिए 'पहला कदम' नाम से अभियान चलाया।
प्रेरणा : अपने जीवनसाथी और अपने सहयोगियों को अपने जीवन के लिए प्रेरणा मानती हैं।
विजन : शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना मूल उद्देश्य है, क्योंकि 'पढ़ेगा भारत तो बढ़ेगा भारत।
बदलाव : महिलाओं पर अत्याचार, उत्पीडऩ रोकना और लड़कियों की पढाई कराना चाहती हैं।
चुनौतियां : बचपन से ही हर कदम पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसी के बीच जीना सीख लिया। बचपन में ही माता-पिता का साथ छूट गया। इसके साथ ही आर्थिक तंगी ने परिस्थितियों को और विषम बना दिया।
विशेष: इनके स्कूल में अनाथ व गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाया जाता है। सभी बच्चों की मानसिक स्तर को लेकर कई प्रकार की काउंसलिंग क्लासेज भी लगाई जाती हैं।
सम्मान: शिक्षा व सामाजिक कार्य के लिए अब तक कई संस्थाएं सम्मानित कर चुकी है। समाज रत्न, सिटी आइकॉन, वूमन ऑफ द फ्यूचर अवार्ड, महिला सशक्तिकरण, बेटी बचाओ-बेटी पढाओ, वेस्ट प्रिन्सीपल, कम्युनिटी लीडरशिप अवॉर्ड, राष्ट्रीय साहित्य अवॉर्ड समेत कई सम्मान मिल चुके हैं।
वो सोच, जो देती है संघर्ष की ताकत
सवाल : पुरुषों से भरे एक कमरे में आप खुद को कैसा महसूस करेंगी?
जवाब: मैं अपने आपको एक शक्ति के रूप में देखूंगी। जब भी मेरे सामने ऐसी परिस्थिति आती है तो मैं स्वय को ऊर्जावान महसूस करती हूं।
सवाल: आप इतना काम करती हैं और भागदौड़ करती हैं तो आपके पति बुरा नहीं मानते हैं?
जवाब: वह हमेशा मेरा सहयोग करते हैं। हर परिस्थिति में मुझे आगे बढऩे के लिए मोटीवेट करते हैं।
एक सकारात्मक सोच और विश्वास। की आज भी किसी एक औरत को सही सीख मार्गदर्शन दे पाऊंगी.
सवाल: एक महिला के रूप में आपकी नजर में दुखद पहलू क्या है?
जवाब: एक औरत के रूप में जन्म लेकर मैंने वो सारे दु:खद एहसास जो स्त्री जाति से जुड़े हैं, उन सबको अपने सुखद एहसास में बदल डाला। बस एक बार जब बचपन मे मां का निधन हो गया, तब से ऐसा होश संभाला की कभी अपने अतीत में मुड़ कर नहीं देखा। किसी भी महिला को अपने अतीत के पलों में जाने के बजाय आगे बढऩे के लिए पूरी ऊर्जा लगानी चाहिए।
सवाल: आप महिलाओं को क्या संदेश देना चाहती हैं?
जवाब: मैं समाज के द्वारा दी गई कोई भी चुनौती को अपना टास्क मानकर पूरा करती हूं। कोई भी महिला कभी अपने आप को कभी कमजोर न समझे। अपने आप को काबिल बनाओ। जो समाज आपको चुनौती देगा, उसे आपने अपने पेट मे 9 महीने तक संजोया है, उसे जीवन दिया है। वह शक्ति हर नारी में है।
Published on:
22 Mar 2018 11:04 pm
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