
बिन फेरों के हुई शादी,भारतीय संविधान को बनाया साक्षी
हिण्डौनसिटी. ‘बिन फेरे हम तेरे’ यह गाना अब तक सिर्फ फिल्म में सुना था, लेकिन मंगलवार को यह चरितार्थ भी हुआ। शादी का नाम आते ही जेहन में मंगलसूत्र और अग्नि के समक्ष फेरे के दृश्य और रीति रिवाज आते हैं। शहर की जाटव बस्ती में एक अनूठी शादी हुई। जिसमें वर-वधू ने सात फेर लेने की जगह भारतीय संविधान को साक्षी मानकर परस्पर दाम्पत्य सूत्र में बंधने का वचन लिया और शपथ ग्रहण की।
दरअसल मामला कुछ इस प्रकार है कि हिण्डौन की जाटव बस्ती के खारा कुआ के समीप के निवासी दौलतराम व सोहनदेई की दो बेटी रीना और मीना की शादी बयाना के लाल दरवाजा निवासी रुपेन्द्र सिंह व वीरमति के बेटे राहुल एव भूपेन्द्र के साथ हुई। मंगलवार रात को बारात दुल्हनों के घर पहुंची।
जहां धम्म कीर्ति आचार्य लोकपाल तथा गोपाल स्वामी बौद्ध ने बौद्ध धम्म की परंपरा के अनुसार वर-वधुओं को 22 प्रतिद्धता दिलाई। इसके बाद दोनो जोडों को भारतीय संविधान की शपथ लेकर सात जन्म तक एक-दूजे का साथ देने का वादा किया।
शादी संपन्न होने के उपरांत दुल्हनों के भाई सुंदर सिंह ठेकेदार ने दोनों नव दंपतियों को संविधान की किताब और संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर की तस्वीर उपहार स्वरूप भेंट की। वर वधु का मानना है कि समाज में लेन-देन जैसी प्रथा व खर्चीली कुरीतियां फैली हुई है। जिन्हें बंद होना चाहिए और इस तरह की शादी कर फिजूल खर्च बचाना चाहिए, जो कि किसी नेक कार्य में लगाया जा सके।
शादी पाण्डाल में लगाई महापुरुषों की तस्वीरें-
शादी समारोह का पाण्डाल की सजावट भी अलहदा रही। रंग बिरंगी रोशनी से जगमग विवासह समारोह स्थल पर महापुरुषों के चित्र लगाए गए। स्टेज से लेकर पूरा पांडाल झलकारी बाई, सम्राट अशोक, संत वाल्मीकि, संत रविदास, रमाबाई अंबेडकर,कांशीराम, रामास्वामी पेरियार, संत गाडगे, शहीद भगतसिंह, भगवान गौतम बुद्ध, डॉ. भीमराव अंबेडकर, संत कबीर दास समेत कई महापुरुषों के चित्रों से अटा नजर आया।
Published on:
17 Mar 2021 09:23 am
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