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निर्भया कांड: बेटे को फांसी की सजा पर फफक पडी मां…… करौली का नाम फिर चर्चा में

करौली. दिल्ली गैंग रेप (निर्भया कांड) के चार दोषियों की सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी की सजा बरकरार रखने के फैसले के बाद करौली के कल्लादह स्थित मुजरिम मुकेश के घर सन्नाटा पसरा है। छप्परपोश घर में मुकेश की बुजुर्ग मां रहती है। जब मुकेश की मां से कोर्ट के फैसले के बारे में बात की, तो वह फफक पड़ी।

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दिल्ली गैंग रेप (निर्भया कांड) के चार दोषियों की सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी की सजा बरकरार रखने के फैसले के बाद करौली के कल्लादह स्थित मुजरिम मुकेश के घर सन्नाटा पसरा है। छप्परपोश घर में मुकेश की बुजुर्ग मां रहती है। जब मुकेश की मां से कोर्ट के फैसले के बारे में बात की, तो वह फफक पड़ी।

गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2012 को हुई घटना में मुकेश का बड़ा भाई रामसिंह मुख्य आरोपित था। उसने प्रकरण की सुनवाई के दौरान 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर जान दे दी थी। हालांकि रामसिंह की मौत के बाद उसके परिवार वालों व वकील ने कहा कि जेल में उसकी हत्या की गई है।

शराब पीकर करते थे हंगामा

मुख्य आरोपित रामसिंह और मुकेश दिल्ली की रविदास कॉलोनी में रहते थे। दोनों भाइयों की आपराधिक व शराब पीकर हंगामा करने आदतों की वजह से कॉलोनी में कुख्यात थे। जानकारी के अनुसार पत्नी की बीमारी से मौत होने के बाद रामसिंह बहुत ज्यादा शराब पीना शुरू कर दिया था।

पिता की हो चुकी मौत

मुकेश व रामसिंह के माता-पिता भी उनके साथ काफी समय दिल्ली में रहे थे। गत तीन माह पहले करौली में पिता मांगीलाल माली की मौत हो गई। इसके बाद उनकी मां करौली स्थित कल्लादह में अकेली रह रही है।

अकेली रहती है बूढी मां

दिल्ली गैंग रेप के दोषियों में शामिल करौली के कल्लादह इलाके के मुकेश का घर भद्रावती नदी के किनारे है। नगर परिषद क्षेत्र में शुमार कल्लादह की दूरी करौली शहर से करीब चार किलोमीटर है। छप्परपोश घर में मुकेश की मां कल्याणी रहती है। उसकी उम्र करीब 65 वर्ष है। वहां छितराई हुई आबादी है। यहां बने घरों की दूरी मुकेश के घर से 50 मीटर से 100 मीटर तक है। मुकेश अविवाहित है। वह अपने तीन भाइयों के साथ दिल्ली में रहता था। मां कल्याणी के अनुसार वह भी पहले बेटों के पास दिल्ली आती-जाती रहती थी। करीब तीन माह पहले मुकेश के पिता मांगीलाल की मौत के बाद से यहीं रह रही है।

दुर्गम है रास्ता

मुकेश के घर तक पहुंचने का रास्ता काफी दुर्गम है। भद्रावती नदी के किनारे ऊंचाई पर स्थित उसके घर तक पहुंचने के लिए पहले करीब 400 मीटर तक कच्चे-पथरीले रास्ते से गुजरकर नदी तक पहुंचना पड़ता है। नदी पार करने के बाद संकरे से कच्चे रास्ते पर चलने के बाद उसका घर आता है।

फांसी की सजा बरकरार रखने का स्वागत

शहर के बाशिंदे राजेन्द्र सारस्वत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत है, इससे न्यायपालिका के प्रति आमजन में विश्वास बढ़ेगा।

अपराधियों में भय कम होगा

करौली नगर परिषद की पार्षद अर्चना सेठी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अपराधियों में भय व्याप्त होगा। इससे महिला सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।

इसी प्रकार मदनमोहन स्वामी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का करौली के सभी लोग स्वागत करते हैं। अपराधियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यह आज कोर्ट के फैसले से साबित हो गया है।