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विक्रेताओं का नहीं रुझान, एक माह से रेलवे स्टेशन पर बंद दुकान

No trend of vendors, shop closed at railway station for one month मूंगी की वर्फी के बाद के लाख चूड़े की दुकान भी नहीं चली एक रेलवे स्टेशन एक उत्पाद योजना

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हिण्डौनसिटी. रेल मंत्रालय की एक रेलवे स्टेशन एक उत्पाद योजना उत्पाद बदलने के बाद भी सिरे नहीं चढ़ सकी है। रेलवे जोन मुख्यालय से हिण्डौन रेलवे स्टेशन की स्टॉल के लिए मीठी मूूंग की बर्फी को चयनित किया था। लेकिन मिष्ठान विक्रेताओं के रुझान नहीं दिखाने पर लाख की चूड़ी व पत्थर की मूर्ति के उत्पाद बदले गए। इसके बावजूद रेलवे को स्टॉल संचालक नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में एक माह से रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर स्थापित की स्टॉल एक माह से बंद है।
रेलवे ने लोकल फॉर वोकल के तहत क्षेत्रीय लघु उद्योगों के लोकल उत्पादों को बढ़ावा बीते वर्ष सितम्बर माह में एक स्टेशन एक उत्पाद योजना (ओएसओपी) लागू की थी। इसके तहत कोटा मंडल के 15 रेलवे स्टेशनों में हिण्डौनसिटी व श्रीमहावीरजी रेलवे स्टेशन को योजना में शामिल किया। हिण्डौन रेलवे स्टेशन पर मीठी मूंग दाल की बर्फी व श्रीमहावीरजी रेलवे स्टेशन पर जैन दर्शन की साहित्य सामग्री को लोकल फॉर वोकल के लिए चिह्नित किया। उस दौरान दोनों ही रेलवे स्टेशनों पर रेलवे अधिकारियों ने स्टॉल लगवा कर योजना का शुभारंभ कराया। लेकिन विके्रता के रुझान नहीं दिखाने से रेलवे की ओएसओपी स्टॉल शोपीस बन कर रह गई। स्टॉल के संचालन के लिए रेलवे अधिकारियों ने हिण्डौन रेलवे स्टेशन के लिए तय उत्पाद मूंग की बर्फी के स्थान लाख की चूड़ी में तब्दील करा दिया। लेकिन लाख चूड़ी का कोई दस्तकार रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म पर दुकान लगाने के लिए आगे नहीं आया है। कमोबेश यहीं स्थिति श्रीमहावीरजी रेलवे स्टेशन की है। जहां वानरों के उत्पात के कारण स्टॉल संचालन सामान समेट कर ले गया।

यात्रियों की पहुंच से दूर स्टॉल –
स्थानीय विके्रताओं का कहना है कि रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म क्रमांक 1 पर कोटा की तरफ के छोर स्टॉल स्थापित है। महज दो मिनट ट्रेनों का ठहराव होने से यात्री खरीदारी के लिए स्टॉल तक नहीं आ पाते हैं। वहीं 750 मीटर लम्बे प्लेटफार्म पर सामने आकर ठहरी बोगी के यात्रियों को ही स्टॉल का पता चल पाता है। आमतौर पर यात्रियों को ठहराव रिफ्रेशमेंट केंटीन के पास होता है।

खर्चा ज्यादा आय कम-
एक विके्रता ने बताया कि एक स्टेशन एक उत्पाद योजना खर्च की तुलना में आय नहीं होने से घाटे का सौदा साबित हो रही है। 15 दिन के रोटेशन के लिए स्टॉल लेने के लिए रेलवे स्टेशन पर एक हजार शुल्क देना होता है। वहीं बिजली व अन्य खर्च भी चुकाने पड़ते हैं। पुन: नवीनीकरण कराने पर एक माह के लिए 2 हजार रुपए देने होते हैं। दिन भर में एकाध खरीदार के आने से विक्रेता योजना से दूरी बनाने लगे हैं।

एक और स्टॉल होगी स्थापित
रेलवे सूत्रों के अनुसार रेलवे स्टेशन पर एक स्टेशन एक उत्पाद योजना की एक और स्टॉल स्थापित होगी। जिसे प्लेटफार्म क्रमांक दो पर लगाया जाएगा। वहीं भी स्थानीय उत्पादों को विक्रय के लिए रखा जाएगा।

इनका कहना है-
एक स्टेशन एक उत्पाद योजना में उत्पाद को बदला गया है। हालांकि स्थानीय उत्पाद विक्रेताओं का रुझान कम है। विक्रेताओं को रोटेशन में स्टेशन पर दुकान लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
-हरीराम महरौलिया, सीएमआई गंगापुरसिटी।