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किसानों को 3 करोड़ का ‘चूना’, पाले से गल गया ‘पान’

देश-विदेश में प्रसिद्ध मासलपुर का पान सर्दी और पाले की वजह से गलने लगा है। पान की खेती के गर्दिश में आने से इससे जुड़े सैकड़ों परिवारों के समक्ष रोजगार का संकट पैदा हो रहा है। अधिकांश फसल खराब होने से किसान आहत हैं...

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करौली

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Dinesh Saini

Jan 10, 2020

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- दिनेश शर्मा

करौली। देश-विदेश में प्रसिद्ध मासलपुर का पान सर्दी और पाले की वजह से गलने लगा है। पान की खेती के गर्दिश में आने से इससे जुड़े सैकड़ों परिवारों के समक्ष रोजगार का संकट पैदा हो रहा है। अधिकांश फसल खराब होने से किसान आहत हैं। अनुमान है कि किसानों को करीब तीन करोड़ का नुकसान हुआ है। पान की खेती को उद्यानिकी विभाग की योजना में शामिल नहीं किया है। इससे किसानों को इसकी खेती पर ना तो अनुदान मिल पाता और ना ही फसल खराब होने पर सरकारी सहायता। सरकार की इस उपेक्षा से पान की फसल संकट के दौर में है। जबकि उत्तरप्रदेश में पान की खेती को सरकारी संरक्षण प्राप्त है। प्रदेश में पान की खेती विशेष तौर से मासलपुर, उपरेला के अलावा भरतपुर जिले के खरेरी, बागरेन, बूंदी के लाखेरी इलाके में होती है। इनमें सर्वाधिक खेती मासलपुर, उपरेला में करीब 6 हैक्टेयर में की जाती है।

विदेशों में मिली पहचान
मासलपुर-उपरैला में करीब 20-25 बीघा भूमि में पान की खेती हो रही है। इसमें विशेष तौर पर तमोली जाति लगी है। यहां का पान दिल्ली मण्डी में भेजा जाता है, जहां से यह विभिन्न इलाकों में सप्लाई होता है। इसके अलावा अलीगढ़, सहारनपुर, मेरठ, ग्वालियर, जयपुर, आगरा में भी पान काफ ी मात्रा में जाता है। यहां के पान की खाड़ी देशों में अधिक मांग रही है।

बहुतायत में यह विदेशों में जाने से किसानों की आय भी खूब होती थी, लेकिन लागत और मेहनत अधिक होने से नई पीढ़ी का पान की खेती से मोह भंग होने लगा है। कुछ वर्ष पहले तक जहां मासलपुर इलाके के 300-350 परिवार पान की खेती करते थे, उनकी संख्या घटकर अब करीब 200 ही रह गई है।

- पान की खेती बागवानी मिशन में शामिल नहीं है। हालांकि हमारी ओर से सरकार को पान की खेती को बागवानी में शामिल करने और सब्सिडी के लिए प्रस्ताव भेजे हुए हैं। किसानों ने नुकसान का ज्ञापन सौंपा है जिसको सरकार को भेज दिया है।
रामलाल जाट, सहायक निदेशक, उद्यानिकी विभाग, करौली