
रास आ रही पपीता की बागवानी, किसानों की बढ़ी आमदनी
छ: बीघा में पपीते के 1,500 पौधे
किसान राधेश्याम रावत, राजाराम सहित अन्य किसानों ने दो वर्ष पहले परम्परागत खेती के साथ बागवानी की शुरुआत की। किसानों ने खेतों में मेड़ और सिंचाई की नालियोंं के किनारे के देसी किस्म के पपीते के पौधे रोपे। आधा दर्जन किसानों ने करीब 6 बीघा क्षेत्रफ ल में पपीते के करीब 1500 पौधे रोप दिए। सालभर बाद इनमें फ ल लगना शुरू हो गया।
स्वयं तैयार किए बीज और पौधे
किसान देवीसिंह ने बताया कि उन्होंने दो वर्ष पहले के हिण्डौन फल मंडी से खराब (सड़े -गले) पपीते खरीद कर बीज तैयार किए। साथ ही गत जुलाई माह में डिस्पोजेबल गिलासों में बीज डाल कर पौध तैयार की। बाद में पौधों को खेत में रोपा गया। एक वर्ष बाद पौधों में फूल आने के बाद फ ल आना शुरू हो गया। इसमें अक्टूबर से मई तक फल आते हैं।
जैविक खाद का उपयोग
किसान राधेश्याम ने बताया कि पपीता की बागवानी में पौध तैयार करने से लेकर फ ल आने तक रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक का प्रयोग नहीं करते। उन्होंने पौधों में केवल वर्मी कम्पोस्ट, देसी खाद आदि डाल कर आर्गेनिक बागवानी की है। वहीं, फलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट और मच्छरों को गोंद प्लेट पर बल्व की रोशनी से नियंत्रित करते हैं।
क्षेत्र की मंडियों में खूब मांग
बीजों से भरे सुनहरे गूदेदार स्वादिष्ट मीठे पपीते की क्षेत्र की मंडियों में खूब मांग हैं। आसपास की मंडियों में थोक फ ल विक्रेता गांव पहुंचकर पपीते की खरीदारी कर रहे हैं। कई किसान सूरौठ, हिण्डौन व बयाना की मंडी में पपीते भेज रहे हैं। पपीते के फलोत्पादन के एक सीजन में किसानों को 2 से 5 लाख रुपए की आमदनी हो रही है।
इनका कहना है...
सूरौठ के बाइजट्ट गांव में किसान पपीता की बागवानी कर रहे हैं। इससे उन्हें अच्छी आमदनी भी हो रही है। अन्य फ लों की भी बागवानी के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
रामलाल जाट, उपनिदेशक, उद्यानिकी विभाग करौली
अनिल दत्तात्रेय — हिण्डौनसिटी
Published on:
19 Mar 2023 11:44 am
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