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अधूरे उपचार के बीच अस्पताल से पलायन कर जाते हैं रोगी

Patients escape from hospital amid incomplete treatment 40 फीसदी रोगी पूरा उपचार लिए बिना वार्डों से हो जाते हैं रवाना

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हिण्डौनसिटी. राजकीय चिकित्सालय में हर वर्ष चिकित्सा सुविधाओं में इजाफा हो रहा है लेकिन पूरा उपचार लिए बगैर वार्ड से बंक (पलायन) करने वाले रोगियों की संख्या कम नहीं हो रही है। कुछ बेहतर उपचार की मंशा तो कई अधूरे इलाज को पर्याप्त अस्पताल की असुविधा से बचने के लिए बिना बताए वार्ड से नदारद हो हो रहे हैं। आधा अधूरा उपचार ले रवानगी लेने वाले रोगियों का आंकड़ा एक माह में हजार का पार कर रहा है। बीते 12 माह में राजकीय जिला चिकित्सालय से 28 हजार 171 रोगी की बंक कर गए। यह संख्या कुल भर्ती रोगियों की करीब 40 फीसदी है।
उपखण्ड मुख्यालय स्थिति 250 पलंग क्षमता के जिला स्तरीय चिकित्सालय में हिण्डौन के सहित करौली, नादौती, टोडाभीम व बयाना क्षेत्र के गांवों से रोगियों को आवक होती है। दैनिक औसत 1800-2000 रोगियों संख्या वार्षिक आवक 6 लाख से अधिक होती है। औसत रोगी भर्ती संख्या 70 हजार से अधिक है। रोगी भार की तुलना में चिकित्सालय में सरकार ने स्तरीय के चिकित्सा सुविधाएं विकसित की है। ऐसे में अधिकांश वार्डों में कमोबेश वर्ष पर क्षमता अधिक रोगी संख्या रहती है। ऐसे में मेडिकन वार्ड, सर्जीकलवार्ड, शिशु वार्ड से एक चौथाई से अधिक रोगी चिकित्सक और नर्सिंगकर्मियों को बिना बताए ही पलंग छोड़ कर घर या अन्य चले जाते हैं। चिकित्सालय सूत्रों के अनुसार वर्ष 2022 में आउट डोर में 6 लाख 65 हजार 524 रोगी उपचार परामर्श के लिए पंजीकृत हुए। चिकित्सकीय परामर्श पर 73 हजार 323 रोगियों को विभिन्न वार्डों में भर्ती किया गया। इनमें से 28 हजार 171 रोगी बिना पूरा उपचार लिए ही वार्डों से निकल गए। बीते माह जनवरी में आडटडोर में 52 हजार रोगियों को चिकित्सा परामर्श दिया गया। जिनमें से भर्ती किए 4 हजार 104 रोगियों में से 1706 से रोगी बंक कर गए।


शिशु वार्ड में सर्वाधिक मामले-
चिकित्सालय में रोगी बंक करने क ा आंकड़ा शिशु वार्ड में सर्वाधिक है। जनवरी माह में भर्ती हुए 1264 रोगियों में सें 617 बीमार बच्चों को परिजन बिना जानकारी दिए ले गए।
वहीं मेडिकल वार्ड से 545, सर्जीकल वार्ड से 236 व एएनसी वार्ड से 288 तथा प्रसूति वार्ड से 20 रोगियों ने वंक किया।

इनका कहना है

स्वास्थ्य लाभ मिलने पर रोगी स्वेच्छा से बिना बताए वार्ड से रवाना हो जाते हैं। जो कि चिकित्सा नियमों के अनुसार गलत है। रोगियों को स्वास्थ्य औरउपचार के प्रति गंभीर रहने के लिए जागरुक किया जाएगा।

डॉ. पुष्पेंद्र कुमार गुप्ता, पीएमओ,

राजकीय चिकित्सालय, हिण्डौनसिटी.