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सरसों का रकबे के साथ बढ़ रहा उत्पादन, ऑयल यूनिटों में इजाफे की दरकार

हिण्डौनसिटी. सेण्ड स्टोन के लिए विदेशों तक ख्यात करौली जिला कृषि क्षेत्र में भी सोपान चढ़ रहा है। मौसम की अनुकूलता और मिट्टी के मिजाज के संयोग से सरसों के उत्पादन में जिला पहचान कायम कर रहा है। वर्ष दर वर्ष बढ़ते बुवाई क्षेत्र और उपज में इजाफे से यहां की सरसों का देश के अनेक राज्यों सहित नेपाल तक निर्यात होता है। सरसों के बम्पर उपज क्षेत्र में मस्टर्ड ऑयल प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित हो तो जिले की सरसों तेल उद्योग से नई पहचान बन सकती है। साथ ही लोगों को कृषि आधारित रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं।

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हिण्डौनसिटी.
सेण्ड स्टोन के लिए विदेशों तक ख्यात करौली जिला कृषि क्षेत्र में भी सोपान चढ़ रहा है। मौसम की अनुकूलता और मिट्टी के मिजाज के संयोग से सरसों के उत्पादन में जिला पहचान कायम कर रहा है। वर्ष दर वर्ष बढ़ते बुवाई क्षेत्र और उपज में इजाफे से यहां की सरसों का देश के अनेक राज्यों सहित नेपाल तक निर्यात होता है। सरसों के बम्पर उपज क्षेत्र में मस्टर्ड ऑयल प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित हो तो जिले की सरसों तेल उद्योग से नई पहचान बन सकती है। साथ ही लोगों को कृषि आधारित रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं।
राज्य सरकार ने औद्योगिक नगरियों से बाहर जिलों में उद्योग लगाने के लिए राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट से प्रदेश में विकास की नई शुरुआत की है। लेकिन कच्चे माल की बहुलता के क्षेत्र में उसी से संबंधित उद्योग लगेे तो औद्योगिक विकास के साथ रोजगार के अवसरों की दोगुनी रफ्तार हो सकती है। करौली जिले में अन्य फसलों की तुलना में सर्वाधिक सरसों की फसल होती है। कम लागत व अधिक दाम होने से किसानों का सरसों की खेती के प्रति रुझान बढ़ रहा है। इस बार रबी की फसली सीजन में जिले के करौली, हिण्डौन, नादौती, टोडाभीम, सपोटरा सहित अन्य क्षेत्र में 1 लाख 11 हजार हैक्टेयर भूमि में सरसों की फसल की बुवाई हुई है। जो इन दिनों सरसों के दानों से भरी फलियों से लकदक है। इसके बावजूद जिले में बड़ी ऑयल मिलों की संख्या है। 60-70 छोटे स्पेलरों के अलावा हिण्डौन रीको औद्योगिक क्षेत्र में 5 व करौली में एक बड़ी ऑयल मिल है। ऑयल मिलों की संख्या कम होने से जिसे अधिकांश सरसों हिण्डौन कृषि मंडी के जरिए दूसरे राज्यों की बड़ी मिलों के लिए ट्रेडिंग होती है। यदि उत्पादन के अनुरूप ऑयल मिल खुुलें तो जिले को सरसों तेल उद्योग के रूप में पहचान बन सकती है।

नेपाल तक भेजते सरसों
कृषि उपज मंडी व्यापार मंडल के अध्यक्ष महेशचंद व महामंत्री सौरभ बंसल ने बताया कि सीजन में मंडी से सरसों नेपाल और कोलकाता तक के व्यापारी मांग भेजते हैं। आमतौर सरसोंं खरीदारी अलवर व भरतपुर की मिला संचालक करते हैं।

सात माह चलती हैं मिलें
सरसो तेल उद्यमी मुकेश बंसल ने बताया कि क्षेत्र में सरसों ऑयल की मध्यम औद्योगिक यूनिट हैं। सीजन में मंडी में सरसों की बम्पर आवक होती है। समीप के जिलों में भरतपुर, अलवर, कोटा व बंूदी में बड़ी ऑयल मिल हैं। यहां फरवरी माह में नई सरसों के आने से मई माह तथा दीपावली से मकर संक्रांति तक तेल मिल चलती हैं। बड़ी मिलें लगें तो क्षेत्र में सरसों ऑयल उद्योग विकसित हो सकता है। हालांकि इनमें एक मिल बड़ी भी है।

फैक्ट फाइल
जिले में सरसों की स्थिति

वर्ष बुवाई (है.) उत्पादन (मी.टन)
2021 118192 205636
2022 111686 202606
2023 105784 221982
2024 111115 245600(अनुमानित)

इनका कहना है
जिले में सरसों की फसल के लिए मौसम और मिट्टी का मिजाज कमोबेश अनुकूल रहता है। खराबे की कम संभावना के चलते किसानों में भी इसके प्रति रुझान बढ़ा है। हिण्डौन में एक बड़ी ऑयल यूनिट है,क्षेत्र में सरसों तेल और यूनिटें स्थापित हों तो कृषि आधारित नए उद्योग और रोजगार के अवसर विकसित होगें हैं।
वीडी शर्मा, संयुक्त निदेशक
कृषि विभाग करौली।