
सुभाष चन्द्र बोस के नारे तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दिलाऊंगा से उत्तेजित होकर राजपुर गांव के स्वतंत्रता सेनानी किशनलाल गुर्जर अंग्रेजों की सेना में बगावत कर डाली थी।
वो सुभाष चंद बोस की आजाद हिन्द फौज में शामिल हुए और पहली बार हांगकांग में जाकर तिरंगा झण्ड़ा लहरा दिया। किशन लाल (१०२) २५ साल की उम्र में अंग्रेजों के शासन में गठित सेना लाहौर टू पंजाब रेजीमेंट में वर्ष 1941 में सैनिक के तौर पर भर्ती हुए थे। यह भर्ती करौली डाक बंगले में हुई थी। इसके बाद अंग्रेजी हुकूमत ने उनकी रेजीमेंट को लडऩे के लिए रंगून भेजा था। वहां पर वे तथा साथी सुभाष के सम्बोधन और संघर्ष से प्रेरित हुए। सभी अंग्रेजों की सेना से बगावत कर आजाद हिन्द फौज में शामिल हो गए।
रंगून में लड़ाई के बाद वे म्यामांर, वर्मा तथा हांगकॉंग पहुंचे। किशनसिंह ने बताया कि आजाद हिन्द फौज ने १५ फरवरी ४२ को हांगकॉंग में तिरंगा झण्ड़ा फहराया था। 1945 में वे वापस देश में आए तो अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। लगभग ढाई साल उन्होंने जेल में बिताए। देश की आजादी पर स्वतंत्रता सेनानियों को रिहा किया जिसमें किशनसिंह भी शामिल थे।
अब हुए अक्षम
शतायु पार किशनलाल अब शारीरिक तौर पर अक्षम हो चुके हैं। अधिकांश वक्त उनका पलंग पर बीतता है। दैनिक नित्यकर्म भी परिजन की मदद से कर पाते हैं। उनका पूरा परिवार उनकी सेवा में लगा रहता है। इलाके में उनका सम्मान है। इस इलाके में इकलौते रह गए आजादी के इस सिपाही को सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर अनेक बार सम्मानित किया जा चुका है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी उनको सम्मानित किया था।
किया सम्मान
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जिला प्रशासन की ओर से अतिरिक्त जिला कलक्टर राजनारायण शर्मा राजपुर गांव पहुंचे और स्वतंत्रा सेनानी किशनलाल का सम्मान किया। गुर्जर को साफा पहनाया गया। इस दौरान उपखण्ड अधिकारी रामजीलाल कुमावत, पंचायत समिति प्रधान इन्दू देवी मौजूद थी।
Published on:
27 Jan 2018 08:09 pm
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