2 नवंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पुलिस कार्रवाई को लेकर मांगी गई प्रगति रिपोर्ट

आशंका है कि पुलिस पीडित के खिलाफ झूठे साक्ष्य एकत्र कर संगीन आरोप दर्ज करने का प्रयास कर रही है..
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

करौली

•

image

Vijay ram

•

Updated: 27 Feb 2019, 12:00 AM IST

Rajasthan News - Latest Hindi News & Updates of Rajasthan

Rajasthan News - Latest Hindi News & Updates of Rajasthan

करौली.
एक माह पहले दायर किए गए इस्तगासे पर पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रगति रिपोर्ट मांगी गई हैं। इस संबंध में गुरुवार को परिवादी की ओर से अदालत में धारा २१० के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया।

स्थानीय अदालत के एडवोकेट दिनेश शर्मा ने बताया कि सूरौठ निवासी प्रदीप अग्रवाल की ओर से एमजेएम न्यायालय में सीआरपीसी की धारा २१० के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर एक माह पहले दायर इस्तगासे पर सूरौठ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है। प्रदीप की ओर से १४ मई को पेश किए गए इस्तगासे पर सुनवाई के बाद अदालत ने १५ मई को सूरौठ पुलिस को केस दर्ज करने के आदेश दिए थे।

उक्त इस्तगासा १६ मई को अदालत द्वारा सूरौठ थाने को भेज दिया गया। प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया है कि पुलिस कार्रवाई से आशंका है कि पुलिस पीडित के खिलाफ झूठे साक्ष्य एकत्र कर संगीन आरोप दर्ज करने का प्रयास कर रही है। एक माह में पीडित कई बार सूरौठ थाने में उपस्थित हो चुका है, लेकिन टालमटोल कर उसे थाने से वापस भेज दिया जाता है।

आरोपियों को जेल भेज दिया
करौली. महिला की दुष्कर्म के बाद हत्या करने के आरोपियों को कैलादेवी पुलिस ने न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।

पुलिस के अनुसार ९ जून को अलवितकी निवासी रामकेश बैरवा ने थाने पर मामला दर्ज कराया था कि उसकी भाभी का दो लोग अपहरण कर ले गए और बाद में दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। साथ ही आरोप लगाया कि आरोपियों ने खजूरा गांव के पास हत्या के इरादे से उसके साथ मारपीट की और उसे एक्सीडेंट का रूप दिया। पुलिस ने इस मामले में आरोपी रामकुमार पुत्र ग्याजीत निवासी दल्लापुरा एवं राजेश सिकलीगर पुत्र रामप्रसाद निवासी कैलादेवी को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर लिया था। गुरुवार को उन्हें रिमांड अवधि पूरी होने पर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।