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अन्नपूर्णा रसोई की थाली का बढ़ा जायका, निर्धनों को मिला सम्बल

locationकरौलीPublished: Feb 02, 2024 03:16:48 pm

Submitted by:

Kirti Verma

प्रदेश में सरकार के बदलते ही इंदिरा रसोई अब अन्नपूर्णा हो गई है। सरकार ने अन्नपूर्णा रसोई में निर्धनों के लिए दाम वही आठ रुपए रखे हैं। थाली का जायका बढ़ाने के लिए चावल के साथ अचार की अतिरिक्त व्यवस्था भी की है। इससे अब अन्नपूर्णा रसोई में भोजन करने वाले लोगों को रोटी के साथ दो सब्जी, चावल और अचार मिलेगा।

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प्रदेश में सरकार के बदलते ही इंदिरा रसोई अब अन्नपूर्णा हो गई है। सरकार ने अन्नपूर्णा रसोई में निर्धनों के लिए दाम वही आठ रुपए रखे हैं। थाली का जायका बढ़ाने के लिए चावल के साथ अचार की अतिरिक्त व्यवस्था भी की है। इससे अब अन्नपूर्णा रसोई में भोजन करने वाले लोगों को रोटी के साथ दो सब्जी, चावल और अचार मिलेगा। निर्धनों व किसी परिस्थिति के चलते यहां भोजन करने वाले लोगों को अन्नपूर्णा रसोई बहुत ही राहत प्रदान कर रही है। अन्नपूर्णा रसोई की थाली में पहले 450 ग्राम भोजन मिलता था। वह अब 600 ग्राम हो गया है। करीब सवा सौ ग्राम की बढ़ोतरी हो गई है। खासकर बाहर से अस्पताल आने वाले लोगों व उनके परिजनों आदि को अन्नपूर्णा रसेाई से भोजन की सुविधा मिलने से आसानी हो रही है।

रोजाना का मीनू निर्धारित
सरकार ने अन्नपूर्णा रसोई योजना में लाभार्थियों को परोसी जाने वाली थाली में मात्रात्मक व गुणवत्ता पूर्वक सुधार करते हुए रोजाना का मीनू निर्धारित किया है। अब सरकार ने थाली में चपाती के साथ दाल, सब्जी के साथ चावल, आचार, खिचड़ी आदि को रखा है।

परोसी जाने वाली थाली का कुल वजन अब 600 ग्राम होगा। कुल लागत पहले 22 रुपए थी जो अब बढ़कर 30 रुपए हो गई है। इसमें सरकार की ओर से 22 रुपए का अनुदान संबंधित फर्म को दिया जाएगा। वहीं निर्धनों से प्रति थाली के मात्र आठ रुपए ही लिए जाएंगे।

अन्नपूर्णा रसोई घर में भोजन कर रहे सिरमौर व आलोक ने बताया कि सरकार ने अन्नपूर्णा रसोई में चावल के साथ अचार की अतिरिक्त व्यवस्था कर थाली का जायका बढ़ा दिया है। इंदिरा अन्नपूर्णा रसोई में गर्म चपाती के साथ चावल व गुणवत्तापूर्ण सब्जी मिलती है।

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जो खाने में भी स्वादिष्ट होती है। इधर अन्नपूर्णा रसोई संचालक विजय सिंह ने बताया कि रोजाना 80 से 100 लोग खाना खा रहे हैं। रसोईघर में प्रात: 8.30 बजे से दोपहर 1 बजे तक व शाम को 5 बजे से रात 8 बजे तक संचालित होती है। भोजन पकाने में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। अन्नपूर्णा रसोई के ब्लॉक इंचार्ज राकेश मीणा ने बताया कि नादौती तहसील में नादौती, गुढ़ाचंद्रजी, गढ़मोरा, शहर, सोप, कैमला में अन्नपूर्णा रसोई संचालित हो रही है।

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