
दशकों के इंतजार के बाद करीब 13 वर्ष पहले स्वीकृत धौलपुर-गंगापुरसिटी वाया करौली रेल परियोजना अभी तक सिरे नहीं चढ़ पा रही है। हालांकि वर्षों के इंतजार के बाद परियोजना के प्रथम फेज का कार्य सरमथुरा से धौलपुर तक चल रहा है, लेकिन द्वितीय चरण में सरमथुरा से गंगापुरसिटी वाया करौली के कार्य के लिए डीपीआर अभी रेलवे बोर्ड में लंबित है। करीब 1861 करोड़ रुपए से अधिक की इस डीपीआर को मंजूरी मिल जाए तो करौली शहरवासियों सहित इससे जुड़े क्षेत्रों के बाशिंदों का सपना पूरा हो सकेगा। साथ ही एक नया रेलवे कॉरीडोर भी विकसित होगा। मंगलवार को मोदी सरकार 3.0 के पहले आम बजट से लोग इस परियोजना को लेकर आस लगाए बैठे हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2010-11 में धौलपुर-गंगापुरसिटी वाया करौली रेल परियोजना की स्वीकृति मिली थी। केन्द्र सरकार की इस घोषणा से क्षेत्र के बाशिंदों में खुशी की लहर दौड़ गई थी, लेकिन यह इस रेल परियोजना शुरूआत से ही धीमी गति रही है। इसके लिए करीब 13 वर्ष का लबा अरसा गुजरने के बाद भी अभी तक करौलीवासियों को रेल का इंतजार बरकरार है।
1861 करोड़ से अधिक की है डीपीआर : हालांकि प्रथम पेज में धौलपुर-सरमथुरा के बीच नैरो गेज से ब्रॉड गेज लाइन परिवर्तन का काम जारी है, जबकि द्वितीय फेज में सरमथुरा से गंगापुरसिटी वाया करौली की करीब 76 किलोमीटर लबी रेल लाइन के लिए करीब 6 माह पहले रेलवे बोर्ड को 1861 करोड़ रुपए से अधिक की डीपीआर भिजवाई गई, जो अभी तक लंबित है।
रेल परियोजना के प्रथम चरण में सरमथुरा-धौलपुर तक नेरो गेज को ब्रॉड गेज में परिवर्तन का कार्य चल रहा है। जबकि द्वितीय चरण में सरमथुरा से गंगापुरसिटी वाया करौली की 76 किलोमीटर की रेल परियोजना के लिए डीपीआर अभी रेलवे बोर्ड में लंबित है। यदि बजट में मंजूरी मिलकर कार्य जल्द शुरू हो जाए तो क्षेत्रवासियों का दशकों का सपना पूरा हो सकेगा। साथ ही जयपुर से धौलपुर तक रेलवे का एक नया कॉरीडोर भी विकसित होगा।
ऐसे में लोग इस डीपीआर की मंजूरी की आस लगाए हुए हैं। इस डीपीआर के मंजूर होने के बाद ही सरमथुरा-करौली-गंगापुरसिटी रेल लाइन के विस्तार का कार्य शुरू हो सकेगा। गौरतलब है कि दशकों की मांग के बाद धौलपुर-गंगापुरसिटी वाया करौली रेल लाइन वर्ष 2010-2011 में स्वीकृत हुई थी। इससे लोगों को रेल का सपना पूरा होने की उमीद जागी। लेकिन शुरू से ही यह रेल परियोजना धीमी गति से चली है। जिसके चलते अब तक एक भी चरण का कार्य पूरा नहीं हुआ है।- वेणुगोपाल शर्मा, महासचिव, रेल विकास समिति, करौली
स्वीकृति के वर्ष 2012-13 में परियोजना के सर्वे का काम हुआ। साथ ही वर्ष 2013 में सरमथुरा में इस परियोजना का शिलान्यास हुआ। इसके बाद कार्य भी शुरू हो गया, लेकिन फिर कार्य बंद कर दिया गया। इसके बाद फिर से कार्य शुरू हुआ। परियोजना के प्रथम चरण में धौलपुर से सरमथुरा तक लगभग 69 किलोमीटर आमान परिवर्तन का कार्य उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज के अधीन किया जा रहा है। इस चरण की अनुमानित लागत लगभग 747 करोड़ रुपए है। जबकि दूसरे चरण में सरमथुरा से करौली होते हुए गंगापुरसिटी तक रेल ट्रेक का विस्तार होना है।
कारोबारी जगमोहन शर्मा ने बताया की केन्द्रीय बजट में गुड्स शेड्स के विकास की घोषणा की उमीद है। मानकों के अनुसार मालगोदाम शेड 750 मीटर लबा व 15 मीटर लबा होता है। लेकिन हिण्डौन में 650 मीटर लबे प्लेटफार्म में 120 मीटर लबा गुड्स शेड मात्र 5 मीटर चौड़ा है।
द्वितीय चरण की डीपीआर में सरमथुरा से गंगापुरसिटी तक की लगभग 76 किमी की दूरी में इस दूरी में 15 बड़े पुल तथा 71 छोटे पुल के निर्माण भी शामिल हैं। इस चरण में 36 आरयूबी और 8 आरओबी भी निर्धारित हैं।
Published on:
23 Jul 2024 11:06 am
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