
हिण्डौनसिटी. सरस डेयरी प्लांट में रीते पड़े दुग्ध संग्रहण पात्र व कोल्ड स्टोर में चल रहा निर्माण। फोटो: पत्रिका
करौली। महज छह माह के संचालन के बाद सरस डेयरी के हिण्डौन प्लांट के एक बार फिर बंद होने की स्थिति बन गई है। डेयरी संघ ने दो दिन पहले अचानक प्लांट में दूध का संकलन बंद कर दिया है। साथ ही प्लांट में कार्यरत चार कर्मचारियों को हटा दिया है। गर्मियों में दूध के संकट के दौर में डेयरी में प्रति दिन 7 हजार लीटर दूध की आवक हो रही थी। एकाएक प्लांट में दुग्ध संग्रहण बंद होने से सम्बद्ध समितियों व पशुपालकों को समक्ष दूध को खपाने का चिंता हो गई है।
दरअसल सवाई माधोपुर-करौली जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ ने छह माह पूर्व शहर के सरस डेयरी प्लांट को शुरू किया था। एक वर्ष तक प्लांट बंद रहने से विमुख हुई दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को डेयरी कर्मचारियों ने संघ से जोड़ा था। दूध की फिर से आवक शुरू होने से प्लांट में घी व पनीर का निर्माण शुरू हो गया था। गर्मियों में दूध की किल्लत के दौर में भी प्लांट में 6500-7000 लीटर दूध की आवक हो रही थी। इस दौरान
डेयरी संघ के अधिकारियों का तर्क है कि अधिक तापमान के कारण दूध खराब हो रहा है, इसलिए संकलन रोकना पड़ा। प्लांट की मशीनों में तकनीकी खामी आने से अवशीतलन का न्यूनतम तापमान गड़बड़ा रहा था। गत दिनों हिण्डौन से भीलवाड़ा भेज गया दूध तापमान के असर से मानकों पर खरा नहीं उतरा। ऐसे में करीब 12 हजार 500 लीटर दूध से भरे हुए टेंकर को अस्वीकृत कर दिया गया।
डेयरी संघ के प्रबंध संचालक ने 18 मई से दूध का संकलन बंद कर दिया है। ऐसे में प्लांट कर्मचारियों को 17 मई की शाम को दुग्ध उत्पादक समिति सचिवों को दूध लेकर आने से मना कर दिया। वहीं प्लांट में दुग्ध प्रसंस्करण बंद होने से संचालन के लिए लगाए चार कार्मिकों की सेवाए खत्म कर हटा दिया। गौरतलब है कि हिण्डौन सरस डेयरी प्लांट में वर्तमान में जिले की 15 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों और 3 बीएमसी से दूध की आपूर्ति हो रही थी।
डेयरी प्लांट के स्थानीय प्रभारी आनंद सिंह सैनी ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज बड़ा होने से ठंडक कम मिल रही थी। स्टोर को छोटा कर दो पार्ट में बांटा गया है। इससे दुग्ध उत्पादों को नियत न्यूनतम तापमान मिल सकेगा। हालांकि दुग्ध समितियों का कहना है कि दूध के अवशीतलन और टैंकरों से बाहर भेजने में कोल्ड स्टोरेज का सीधा संबंध नहीं है।
हिण्डौन को 4-5 दिन के लिए बंद किया गया है। प्लांट की मशीनों की खामी के चलते दुग्ध की मानक चिलिंग नहीं हो पा रही थी। भीषण गर्मी में भीलवाड़ा तक पहुंचने में दूध का तापमान प्रभावित हो रहा था। -सुरेश कुमार सैन, प्रबंध संचालक सवाईमाधोपुर-करौली जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ, सवाई माधोपुर।
Updated on:
20 May 2026 03:46 pm
Published on:
20 May 2026 03:46 pm
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