
करौली. ठेकरा गोशाला में बायोगैस संयंत्र का चल रहा निर्माण। Image Source: ChatGpt
करौली। जिले में बायोगैस के उत्पादन की मंशा से शुरू कराया गया बायोगैस संयंत्र का निर्माण अब गति पकड़ रहा है। गुबरेड़ा ग्राम पंचायत अन्तर्गत ठेकरा गोशाला में इसका निर्माण चल रहा है। उम्मीद है कि अगले माह तक यह प्लांट तैयार हो जाएगा। हालांकि प्लांट का निर्माण पूर्ण होने की निर्धारित तिथि से काफी विलंब से चल रहा है, लेकिन अधिकारियों की सख्ती के बाद अब संबंधित फर्म ने कार्य को गति दी है। गौरतलब है कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के द्वितीय चरण के अन्तर्गत गोबर-धन योजना के तहत यह बायोगैस संयंत्र स्थापित किया जा रहा है।
इस योजना के तहत करौली के लिए राशि स्वीकृत हुई थी। राज्य सरकार की 100 दिवसीय बजट घोषणा में शामिल इस प्लांट को स्थापित कराने के लिए एक कम्पनी को टेंडर दिया गया। बायोगैस का मुख्य उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। इसके अलावा यह अपशिष्ट पदार्थों (जैसे गोबर और कचरे) को उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद में बदलने का प्रमुख साधन है।
जिला परिषद सूत्र बताते है कि इस संयंत्र के स्थापित होने से न केवल मॉडल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के द्वितीय चरण के अन्तर्गत गोबर-धन योजना के तहत जिले में पहला बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के लिए मासलपुर ब्लॉक क्षेत्र की गुबरेड़ा ग्राम पंचायत अन्तर्गत संचालित ठेकरा गोशाला का चयन किया गया था। इस परियोजना की क्षमता 85 क्यूबिक मीटर है। इसके मुख्य घटकों ने आधुनिक बायोगैस संयंत्र, स्लरी संग्रहण टैंक, गैस पाइपलाइन सिस्टम, जैविक खाद निर्माण इकाई, पशु आहार निर्माण व्यवस्था आदि शामिल है।
बायोगैस संयंत्र से बड़ा फायदा मिलेगा। गोबर के माध्यम से बायोगेस तैयार होगी, जिसकी आपूर्ति घरों, संस्थानों को की जा सकेगी। वहीं बिजली में भी इसको परिवर्तन किया जा सकेगा। इससे यह मॉडल व्यापार के रूप में विकसित होगा। इसके अलावा प्रदूषण कम होगा। साथ ही गोबर का समुचित उपयोग होने से सफाई व्यवस्था सुदृढ़ होगी। वहीं बायोगैस के बाद इससे निकलने वाले स्लरी का उपयोग खाद में परिवर्तित कर खेतों में जैविक खाद के रूप में हो सकेगा।
योजना का लाभ किसानों और पशुपालकों को भी मिलेगा। इस योजना का सबसे बड़ा फायदा प्रदूषण को कम करने में मिलेगा। साथ ही किसानों व पशुपालकों की आमदनी भी बढ़ेगी। पशुओं के गोबर, कृषिजनित अपशिष्ट एवं ऑर्गेनिक वेस्ट को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत तथा ऑर्गेनिक खाद के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
गौरतलब है कि मासलपुर क्षेत्र की ठेकरा गोशाला जिले की सबसे बड़ी गोशाला है। इस गोशाला में वर्तमान में करीब दो हजार से अधिक गोवंश है। इसी वजह से यह प्लांट ठेकरा गोशाला में स्थापित किया जा रहा है। यह गोशाला गोपालन विभाग से भी पंजीकृत है।
दिसम्बर 2023 में जारी किए गए कार्यादेश में निविदा शर्तों के अनुसार 45.91 लाख रुपए की लागत से 9 माह में यह कार्य पूर्ण होना था। कम्पनी की ओर से मासलपुर क्षेत्र की ठेकरा गोशाला परिसर में प्लांट निर्माण के लिए कार्य भी शुरू कर दिया गया, लेकिन शुरूआत से ही कार्य की गति धीमी रही। ऐसे में इस पंचायत मासलपुर पंचायत समिति के विकास अधिकारी की ओर से ओर से कम्पनी को पत्र भेजने के साथ मौखिक रूप से भी कई बार अवगत कराते हुए शीघ्र कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर सख्ती दिखाते हुए कम्पनी को पूर्व में नोटिस दिया गया। अब पिछले दिनों जिला कलक्टर अक्षय गोदारा की ओर से सख्ती से निर्देश देने के बाद कार्य में गति आई है और जून माह तक कार्य के पूर्ण होने की उम्मीद है।
ठेकरा गोशाला में बायोगैस संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जो अगले माह तक तैयार हो जाएगा। फर्म की ओर से देरी करने पर नोटिस भी दिए गए। जिला कलक्टर ने भी सख्त निर्देश दिए हैं। संयंत्र के स्थापित होने से बायोगैस तैयार होगी, स्लरी से जैविक खाद का उत्पादन होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के साथ पर्यावरण संरक्षण व स्वच्छता में मदद मिलेगी।
-लखन सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद करौली
Updated on:
22 May 2026 11:20 am
Published on:
22 May 2026 09:59 am
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