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दो माह में तैयार हो जाएगा हिण्डौन बायपास का आरओबी

ROB of Hindaun bypass will be ready in two months आरओबी की हरियाणा में बन रहीं गर्डर एसडीएम व स्टेशन अधीक्षक ने लिया आरओबी निर्माण का जायजा -पश्चिम-मध्य रेलवे जबलपुर जोन के रेल अधिकारियों से की बात

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दो माह में तैयार हो जाएगा हिण्डौन बायपास का आरओबी

दो माह में तैयार हो जाएगा हिण्डौन बायपास का आरओबी


हिण्डौनसिटी. करौली-महवा बायपास पर बन रहे रेलवे ओवरब्रिज(आरओबी) को वैसे वर्षों पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन सरकारी तंत्र के नए-नए प्रयोग रोडे बन गए। लेकिन बायपास के ब्रिज पर फर्राटे भरने का शहरवासियों का सपना अब जल्द साकार होगा।

हिण्डौन के इस आरओबी के लिए हरियाणा के सोनीपत में गर्डर तैयार की जा रहीं हैं। अगर सबकुछ ठीक रहा तो आगामी दो माह में यह पूरा पुल बनकर तैयार हो जाएगा। सोमवार को एसडीएम अनूप सिंह व रेलवे स्टेशन अधीक्षक त्रिलोक चंद राजौरा ने निर्माणाधीन आरओबी का जायजा लिया। साथ ही पश्चिम-मध्य रेलवे के जबलपुर जोन के रेलवे अधिकारियों से इसके संबंध में बात की। अधिकारियों का दावा है कि गर्डर फेब्रिकेशन पूरा होने के बाद एक पखवाड़े के भीतर ब्लाक लेकर रेलवे ट्रैक के ऊपर गर्डर डाल दी जाएगी। इसके बाद ब्रिज के दोनों ओर सड़क निर्माण किया जाएगा।

दरअसल साल 1991 में शहर में यातायात के अधिक दबाव को देखते हुए सरकार ने करोड़ों रुपए का मुआवजा देकर करौली-महवा बायपास के लिए भूमि अधिग्रहण किया था। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने बायपास पर टू लेन आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) के निर्माण करने का प्लान तैयार किया था। तब से ही लोग ब्रिज के पूरा होने की बाट जोह रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि रेलवे क्षेत्र में काम करने की अनुमति नहीं मिलने, रेलवे के जबलपुर जोन मुख्यालय में ड्राइंग फेल होने पर फिर से डिजाइन तैयार करने तथा फाउंडेशन के लिए बनाई जाने वाली पाइल का नमूना फेल होने के कारण आरओबी निर्माण में देरी हुई। इस पर आरओबी निर्माण कर रही पीआरएल कंपनी पर आरएसआरडीसी द्वारा 10 प्रतिशत पेनेल्टी भी लगाई जा चुकी है।

2017 में पूरा होने वाला पुल 2022 तक अधूरा-


सूत्रों के अनुसार सरकार ने करौली-महवा बायपास पर 10 मीटर चौड़ाई और 8 00 मीटर लंबाई के आरओबी निर्माण के लिए वर्ष 2015 में 31 करोड़ 35 लाख रुपए स्वीकृत किए थे। इसके बाद कार्यकारी एजेंसी राजस्थान स्टेट रोड डवलपमेन्ट्स कॉर्पोरेशन (आरएसआरडीसी) द्वारा दिल्ली की पीआरएल कंपनी को निविदा जारी की गई। जुलाई 2015 में आरओबी का निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया। वर्ष 2017 में निर्माण कार्य पूरा होना था, लेकिन इसके अवधि पार होने के बाद पांच वर्ष और बीत गए। फिर भी आरओबी निर्माण अधूरा है।

85 फीसदी निर्माण, 15 करोड़ का भुगतान-


आरएसआरडीसी के अभियंताओं के अनुसार आरओबी का करीब 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। जिसके एवज में संवेदक को लगभग 15 करोड़ रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है। रेलवे ट्रैक के दोनों ओर रेप का कार्य पूरा हो चुका है। लेकिन रेलवे सीमा में तैयार फाउंडेशन पर गर्डर डालने का कार्य अटका हुआ है। ओवरब्रिज बनने के बाद करोड़ों की लागत के बायपास का उपयोग हो सकेगा। महवा मार्ग के 220 केवी बिजली स्टेशन से, मंडी यार्ड के सामने होकर मंडावरा मार्ग, झारेड़ा मार्ग, सिकरौदा मार्ग होते हुए राजकीय कॉलेज के पीछे से करौली मार्ग तक जाने वाले बायपास मार्ग से शहरी क्षेत्र को भारी वाहनों एवं शहर में नहीं रुकने वाले यात्री वाहनों से निजात मिल सकेगी।