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राजस्थान के डांग के गांवों में सौर ऊर्जा प्लांटों ने तोड़ा दम

19 साल पहले रोशनी से हुए थे जगमग, अब छाया है अंधेरा  

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करौली

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Vinod Sharma

Jun 18, 2019

Solar power plant bad, dark in villages

राजस्थान के डांग के गांवों में सौर ऊर्जा प्लांटों ने तोड़ा दम

करौली. बिजली संकट से बचने के लिए सरकार सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है, लेकिन करौली जिले के डांग के गांवों में दो दशक पहले स्थापित किए गए सौर ऊर्जा के प्लांट दम तोड़ चुके है।

इसका नतीजा है कि 19 साल पहले सौर ऊर्जा की रोशनी से जगमग हुए गांवों में अंधेरा छाया है। खास बात यह है कि सरकार ने इन गांवों को रोशन दर्शा रखा है।
हालांकि अक्षय ऊर्जा निगम ने फिर से इन गांवों में रोशनी का प्रयास शुरू किया लेकिनयह गति धीमी हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2000-2002 में कैलादेवी अभयारण्य व वन क्षेत्र में आने वाली निभैरा, राहिर, दौलतपुरा, नानपुर, महाराजपुर पंचायत के 14 गांवों में 2 करोड़ 80 लाख रुपए की लागत से सौर ऊर्जा के प्लांट लगाए।
एक प्लांट पर लगभग २० लाख रुपए से अधिक की लागत आई। सौर ऊर्जा की बिजली लगने से गांव रोशनी से जगमग हो गए। करीब दस साल तक लोगों को सौर ऊर्जा की बिजली मिली। बाद में देखरेख की कमी से सौर ऊर्जा प्लांटों ने दम तोड़ दिया और गांवों में अंधेरा छाया है।

बैट्ररी खराब, उपकरण खुर्दबुर्द
निभैरा, मरमदा, खिजूरा, रायबेली, आशाकी, बहरदा, चौडियाखाता, रावतपुरा, नैनियाका गुआडी सहित अन्य गांवों में सौर ऊर्जा के प्लांट स्थापित किए गए। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी एक कंपनी को दी गई। बाद में कंपनी का कार्यकाल समाप्त होने पर अक्षय ऊर्जा निगम को इनकी देखरेख करनी थी।

आरोप इनकी देखभाल में लापरवाही रही। खिजूरा सौर ऊर्जा प्लांट समिति के अध्यक्ष रूपसिंह गुर्जर ने बताया कि गांवों के प्लांटों की बैट्ररी खराब हो चुकी है, जिससे वे काम नहीं कर रहे हैं। अधिकतर प्लांटों के उपकरण खुर्द-बुर्द हो गए हैं।

100 रुपए शुल्क पर कनेक्शन दिए थे
अक्षय ऊर्जा निगम ने राहिर, निभैरा व दौलतपुरा सहित क्षेत्र के गांवों में पंचायतों की जमीन पर प्लांट स्थापित किए। प्लांट स्थापित करने पर तीन-तीन हजार रुपए का शुल्क ग्रामीणों ने जमा कराया। शेष राशि सरकार ने वहन की। प्लांटों से गांवों के चौराहों पर पोल लगाकर लाइन डाली गई। घरों में कनेक्शन दिए गए। प्रति कनेक्शन पर 100-100 रुपए का शुल्क लिया गया। प्रतिमाह सौर ऊर्जा के कर्मचारी शुल्क वसूलते थे।

अब देश दुनिया से दूर
निभैरा के ग्रामीण व मौरेची प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक भगवानलाल शर्मा ने बताया कि सौर ऊर्जा की बिजली से गांव रोशनी से जगमग थेे। रात में अच्छा उजाला होता और कूलर-पंखे चलते थे। टीवी से देश दुनिया की खबरें मिलने लगीं। स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा ने कदम बढ़ाए। लोगों को लगने लगा कि वे देश की प्रगति की दौड़ में शामिल हो गए हैं। दस साल बाद सौर ऊर्जा के प्लांटों की बैट्ररी खराब व अन्य तकनीकी खराबी से वे फिर अंधेरे में है। निभैरा पंचायत की सरपंच गायत्री देवी शर्मा ने बताया कि सौर ऊर्जा संयत्रों के बंद होने को लेकर अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों से अनेक बार शिकायत और इनको चालू कराने की मांग की, लेकिन वो अभी अंधेरे में ही डूबे हैं।

अब चालू कराएंगे
सौर ऊर्जा के प्लांट गांवों में बंद पड़े होने से अंधेरा छाया हुआ है।अब इन प्लांटों को चालू कराया जाएगा।
रमेश मीना सपोटरा विधायक व खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री

निजी स्तर पर उपलब्ध कराना शुरू किया है
डांग के गांवों में सौर ऊर्जा के प्लांट खुर्द-बुर्द हो गए हैं। लेकिन अब व्यक्तिगत स्तर पर लोगों को कम दरों पर सौर ऊर्जा की प्लेट उपलब्ध कराना शुरू किया है। इससे कुछ राहत मिलेगी।
सतीश विधूड़ी सहायक अभियंता अक्षय ऊर्जा निगम

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