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रंग लाई पत्रिका की मुहिम :14 माह बाद जिला चिकित्सालय में डायलिसिस शुरू, किडनी रोगियों को मिली बाहर जाने से राहत

हिण्डौनसिटी. सवा साल के लम्बे इंतजार के बाद आखिरकार जिला चिकित्सालय में सोमवार को डायलिसिस सुविधा शुरू हो गई। अब क्षेत्र के किडनी रोगियों को इसके लिए दूसरे शहरों में जाने से राहत मिल गई है। चिकित्सालय की ओपीडी विंग में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ.पुष्पेंद्र कुमार गुप्ता ने फीता काट व मशीनों का विधिवत पूजन कर डायलिसिस यूनिट का उद्घाटन किया। पहले दिन बयाना के गांव धाधरैन निवासी किड़नी रोगी का डायलिसिस किया गया। डायलिसिस सेवा शुरू कराने के लिए पत्रिका ने मुहिम चला कर शृंखलाबद्ध समाचार प्रकाशित किए थे।

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हिण्डौनसिटी. सवा साल के लम्बे इंतजार के बाद आखिरकार जिला चिकित्सालय में सोमवार को डायलिसिस सुविधा शुरू हो गई। अब क्षेत्र के किडनी रोगियों को इसके लिए दूसरे शहरों में जाने से राहत मिल गई है। चिकित्सालय की ओपीडी विंग में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ.पुष्पेंद्र कुमार गुप्ता ने फीता काट व मशीनों का विधिवत पूजन कर डायलिसिस यूनिट का उद्घाटन किया। पहले दिन बयाना के गांव धाधरैन निवासी किड़नी रोगी का डायलिसिस किया गया। डायलिसिस सेवा शुरू कराने के लिए पत्रिका ने मुहिम चला कर शृंखलाबद्ध समाचार प्रकाशित किए थे। दरअसल पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने किड़नी रोगियों की सुविधा के लिए प्रदेश के 175 जिला व उप जिला चिकित्सालयों में डायलिसिस सेवा की घोषणा की थी। इसके तहत हिण्डौन जिला अस्पताल में गत वर्ष फरवरी माह में राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने दो हीमो डायलिसिस मशीन भिजवाई थीं। डायलिसिस मशीनों को पीपीपी मोड़ पर संचालन की टेण्डर प्रक्रिया के लम्बी खिंचने व कोलकाता की एक कम्पनी के शर्तों पर पीछे हटने से 22 लाख रुपए कीमत की डायलिसिस मशीनें सात माह तक स्टोर में डिब्बाबंद पड़ी रही।

उस दौरान पत्रिका में खबरें प्रकाशित होने से संचालन के लिए राज्य स्तर पर टेण्डर होने पर कक्ष तय कर मशीनों को ओपीडी में स्थापित करा दिया। क्रियान्वयन की कछुआ चाल के चलते रीएजेंट (कंजूएबल आइटम) अन्य संसाधनों के अभाव में मशीनों का संचालन शुरू नहीं हुआ। इसको लेकर पत्रिका ने अप्रेल माह में ‘किडनी रोगियों का कष्ट बरकरार, सवा साल से डायलिसिस शुरू होने का कर रहे इंतजार’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। इस पर हरकत में आए चिकित्सालय महकमे ने नई सेवा प्रदाता कम्पनी द रीनल प्रोजेक्ट मुम्बई के तकनीशियन को बुलवा कर मशीन व आरओ प्लांट को इंस्टॉल कराया। सभी जांच प्रक्रिया पूरी होने पर सोमवार सुबह यूनिट प्रभारी डॉ. प्रेमसिंह गोगा ने एक रोगी को भर्ती कर चिकित्सालय में डायलिसिस सुविधा को सुचारू कर दिया। इस दौरान पीएमओ ने डायलिसिस टैक्नीशियन अजय चेतीवाल व पहले रोगी रविंद्र कुमार का माला पहना कर स्वागत किया।

अब 10 बैड की डायलिसिस यूनिट की तैयारी : जिला चिकित्सालयों में 10 बैड के डायलिसिस की बजट घोषणा की है। ऐसे में हिण्डौन में दो बैड की डायलिसिस यूनिट के 10 बैड में विस्तार की कवायद शुरू हो गई है। पीएमओ ने बताया कि सरकार की ओर 8 और हीमो डायलिसिस मशीनें आने पर जिला अस्पताल में एक साथ 10 रोगियों का डायलिसिस हो सकेगा। फिलहाल अस्पताल में 2 बैड की डायलिसिस यूनिट शुरू हुई है। डायलिसिस के बाद रोगी बोला थैंक्यू पत्रिका
चार घंटे की डायलिसिस प्रक्रिया के बाद बयाना के धाधरैन के नगला जाटवान निवासी रोगी रविन्द्र कुमार ने कहा कि धन्यवाद राजस्थान पत्रिका। जिसमें शृंखलाबद्ध खबरें प्रकाशित होने पर हिण्डौन जिला चिकित्सालय में डायलिसिस शुरू हो सका है। अब उसे डायलिसिस के लिए भरतपुर जाना नहीं पड़ेगा। उसके किडऩी रोग के चले उसे तीन वर्ष से सप्ताह में दो बार डायलिसिस करना पड़ता है। तकनीशियन के जयपुर के विभिन्न चिकित्सालयों में 10 हजार से अधिक डायलिसिस का अनुभव होने से सहजता से डायलिसिस हो गया।

टोडाभीम व सपोटरा में इंतजार
हिण्डौन जिला चिकित्सालय बाद अब सपोटरा व टोडाभीम क्षेत्र के रोगियों को अपने उपखंड मुख्यालय के चिकित्सालय में डायलिसिस सेवा शुरू होने का इंतजार है। राज्य सरकार ने बीते वर्ष सपोटरा व टोडाभीम के उपजिला चिकित्सालय में भी हीमोडायलिसस मशीनें भेजी थी। मशीनें कक्षों में तो स्थापित हो गई है, लेकिन अभी संचालन शुरू नहीं हुआ है। इनका कहना है
चिकित्सालय में डायलिसिस यूनिट शुरू हो गई है। पहले दिन एक रोगी का डायलिसिस किया गया। रोगियों की संख्या बढ़ने पर स्लॉट बुक किए जाएंगे। फिलहाल ओपीड़ी पारी में यूनिट शुरू की गई है।

पुष्पेंद्र कुमार गुप्ता,पीएमओ, जिला चिकित्सालय, हिण्डौनसिटी.