
सिलिकोसिस बीमारी से बचाव के लिए बताई ये बातें
करौली. डांग विकास संस्थान की ओर से सिलिकोसिस रोकथाम के लिए जिले के खनन बाहुल्य गांवों में जागरुकता पखवाड़े का आयोजन किया जा रहा है।
डांग विकास संस्थान के कार्यक्रम समन्वयक राजेश कुमार ने बताया कि अभियान के अंतर्गत गुरुवार को चौधरीपुरा के खान मजदूरों को सिलिकोसिस बीमारी, टीबी में अंतर, टीवी के उपचार के बारे जानकारी दी गई। बताया कि टीबी का उपचार से व्यक्ति स्वस्थ्य हो जाता है, लेकिन सिलिकोसिस बीमारी लाइलाज है।
यह सिलिका मिश्रित धूल भरे वातावरण में काम करने से होती है। इसका बचाव ही उपचार है। धूल भरे वातावरण कार्य के दौरान अगर बीमारी होती है तो जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने ऑनलाइन आवेदन आदि के बारे में भी बताया। साथ ही राज्य सरकार की सिलिकोसिस पुनर्वास नीति के बारे में बताया। सिलिकोसिस पीडि़त व मृतक के आश्रित को 5 लाख, सिलिकोसिस पीडि़त को 1500 रुपए पेंशन. खाद्य सुरक्षा पालनहार योजना का लाभ दिया जाता है।
इस दौरान राजेश कुमार ने डांग विकास संस्थान द्वारा तैयार डिवाइस की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मजदूर खान में कार्य करते समय उसका उपयोग करें, जिससे 50 फीसदी तक सिलिका धूल शरीर में प्रवेश से रोकी जा सकती है।
वर्तमान में करीब 700 मजदूर इसका उपयोग कर रहे हैं। कार्यक्रम में संस्था के विक्रम सिंह, बृजभूषण शर्मा भी मौजूद थे।
Published on:
06 Feb 2020 08:23 pm
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