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सरकार अपनी उपलब्धियां तो गिना रही, लेकिन पानी पर दावे फुस्स काहे? राजस्थान में ये हजारों गांव पानी बिन बिलबिला रहे हैं

जिन गांव-कस्बों में सावन में खेत-खार और गड्ढों में पानी ही पानी नजर आता था, भयंकर गर्मी से अब 2-4 इंच मिट्टी की पपड़ी ही खड़ी रह गई हैं वहां....

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करौली

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Vijay ram

Jun 04, 2018

water crisis

Diagnosis of drinking water crisis in Behra Mal and Kisalpuri

जयपुर/करौली.
राजस्थान में पानी का मानो स्थाई अकाल ही पड़ गया है। हर साल प्रदेश का जलस्तर लगातार घट रहा है, जो बढ़कर 167 मीटर की गहराई तक पहुंच गया है।

तापमान 45-47 होने के साथ ही कुछ शहर, गांव और कस्बों में हफ्तेभर में भी पीने का पानी नहीं मिल पाया। वहीं करौली, हिंडौन और दौसा के गांवों में साफ पेयजल के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। सिरोही में लोगों को बोरिंगों के खारे व फ्लोराइडयुक्त पानी पीकर काम चलाना पड़ रहा है। इससे उनका जीवन तो चल रहा है, लेकिन इससे ग्रामीण विभिन रोगों से भी ग्रसित हो रहे हैं।

वहीं, भूजल विभाग व जलदाय विभाग के आंकड़ों में झालावाड़ जिले में लगभग 800 गांव बिन पानी बिलबिला गए हैं, बाड़मेर जिले के 2309 गांवों में भी अकाल के हालात हैं। राजस्थान के 295 में से ज्यादातर ब्लॉक डार्क जोन में जा चुके हैं, कई जिलों से धरती में पानी शायद रीत ही गया है।

पत्रिका जर्नलिस्ट्स की विभिन्न इलाकों से प्राप्त रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन इलाकों में अब पेयजल की स्थिति विकट होती जा रही है, वहां सरकारी कारिंदों की गंभीर लापरवाही है। पेयजल वितरण व्यवस्था की बद्इंतजामियों पर लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।

कोशिशें बेकार
ऐसे समय में कुछ जगहों पर सरकार ने ध्यान भी दिया, लेकिन फिर भी प्यास बुझाने में असफल रही है। बीसलपुर पेयजल योजना का पानी उपलबध कराने को लेकर एक वर्ष पूर्व अलग-अलग स्थानों पर करीब 15 पानी के प्वाइंट बनाए गए, लेकिन सिरोही में आज तक इन प्वाइंट से पानी की बंूद तक नहीं आई।

धीमा जहर घुला इस पानी में
करौली, हिंडौन व सिरोही के गांवों में जैसे—तैसे निकल रहा पानी पीने योग्य नहीं है। फ्लोराइडयुक्त पानी के सेवन से ग्रामीणों में दांत खराब होना, पीला पडऩा, दांतों में दर्द, महिलाओं के घुटने जाम होना, बालों का पकना आदि बीमारियों हो रही हैं। इसके अलावा इस पानी के सेवन से पशुओं में भी बीमारियों के लक्षण दिख रहे हैं।

पानी तो आया नहीं, गर्मी भी रुला रही
करौली में कई स्थानों पर तापमान 47 से भी ज्यादा चला गया तो लोग घरों में ही झुलसने लगे। एक तो पीने का पानी नहीं और उूपर से भीषण गर्मी से भी लोग बेहाल हो गए हैं।

तापमान कम नहीं होने से आज भी गर्मी से राहत नहीं मिली। सुबह से ही चिलचिलाती धूप से लोग परेशान रहे। दोपहर को लोगों की आवाजाही कम रहने से सड़कें सूनी रही। गर्मी से बचने के लिए कोई दोपहर को घर से निकलना पसंद नहीं कर रहा तो कोई ठंडे पेय पदार्थों का सहारा ले रहा है। गर्म हवा के बचने के लिए लोगों को सिर पर कपड़ा ढकना पड़ता है।

मरीजों की संख्या बढ़ी
तेज गर्मी के कारण बिजली-पानी का संकट बढ़ रहा है, वहीं अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। पानी की समस्या के सम्बन्ध में मीरापुरा और करनपुर में लोगों ने नीचे से लेकर ऊपर तक सभी जनप्रतिनिधि व अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन इसका आज तक निराकरण नहीं हुआ।
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