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रविवार 17 मार्च, 2019 का पंचांगः जानिए मुहूर्त, राहु काल, आज आमलकी एकादशी, क्या करें और क्या न करें

17 मार्च : आमलकी एकादशी (व्रत करके आँवले के वृक्ष के पास रात्रि-जागरण, उसकी १०८ या २८ परिक्रमा से सब पापों से मुक्ति और १००० गोदान का फल)

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aaj ka panchang

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रविवार, 17 मार्च 2019
विक्रम संवत - 2075
शक संवत -1940
अयन - उत्तरायण
ऋतु - वसंत
मास - फाल्गुन
पक्ष - शुक्ल
तिथि - एकादशी रात्रि 08:51 तक तत्पश्चात द्वादशी
नक्षत्र - पुष्य रात्रि 12:12 तक तत्पश्चात अश्लेशा
योग - अतिगण्ड 18 मार्च रात्रि 01:06 तक तत्पश्चात सुकर्मा
राहुकाल - शाम 04:58 से शाम 06:27 तक
सूर्योदय - 06:47
सूर्यास्त - 18:47
दिशाशूल - पश्चिम दिशा में
व्रत पर्व विवरण - आमलकी एकादशी, रविपुषयामृत योग (सूर्योदय से रात्रि 12:12 तक)

विशेष

हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l

राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।
आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l
एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए। एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है। जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।

आमलकी एकादशी
१७ मार्च : आमलकी एकादशी (व्रत करके आँवले के वृक्ष के पास रात्रि-जागरण, उसकी १०८ या २८ परिक्रमा से सब पापों से मुक्ति और १००० गोदान का फल)

पुष्य नक्षत्र योग
17 मार्च 2019 रविवार को सूर्योदय से रात्रि 12:12 तक रविपुष्यमृत योग है ।
१०८ मोती की माला लेकर जो गुरुमंत्र का जप करता है, श्रद्धापूर्वक तो २७ नक्षत्र के देवता उस पर खुश होते हैं और नक्षत्रों में मुख्य है पुष्य नक्षत्र, और पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं देवगुरु ब्रहस्पति | पुष्य नक्षत्र समृद्धि देनेवाला है, सम्पति बढ़ानेवाला है | उस दिन ब्रहस्पति का पूजन करना चाहिये | बृहस्पति को तो हमने देखा नहीं तो सद्गुरु को ही देखकर उनका पूजन करें और मन ही मन ये मंत्र बोले –
*ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम :| ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |

रविपुष्यामृत योग
शिव पुराणसमें पुष्य नक्षत्र को भगवान शिव की विभूति बताया गया है | पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से अनिष्ट-से-अनिष्टकर दोष भी समाप्त और निष्फल-से हो जाते हैं, वे हमारे लिए पुष्य नक्षत्र के पूरक बनकर अनुकूल फलदायी हो जाते हैं | ‘सर्वसिद्धिकर: पुष्य: |’ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है | पुष्य नक्षत्र में किये गए श्राद्ध से पितरों को अक्षय तृप्ति होती है तथा कर्ता को धन, पुत्रादि की प्राप्ति होती है | इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं |