
भेड़ा बाइपास, जहां आए दिन हो रहे हादसे।
कटनी. सपाट सड़क व वाहनों की बढ़ी रफ्तार के साथ हादसों को रोकने पर्याप्त इंतजाम न होने से लोगों की आए दिन जान जा रही हैं। हादसों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर माह लगभग एक दर्जन लोगों की जान जा रही हैं। अधिकांश हादसे फोरलाइन व नई सड़कों के निर्माण के साथ बढ़ रही वाहनों की रफ्तार व हादसों को रोकने के लिए इंतजाम न होने से हो रहे हैं। दो माह में ही जिले में 180 हादसे हुए हैं और उनमें से अधिकांश नई सड़कों में हुए।
केस नंबर-01
14 दिसंबर को कटनी-मैहर रोड पर देर शाम कुठला थाना के बड़ेरा मोड़ पर एक कार को तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी। जिसें कार पलट गई। दुर्घटना में कार में सवार एक दर्जन लोगों को चोट आई। जिसमेंं से तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए और उनको इलाज के लिए जबलपुर भेजा गया।
केस नंबर-02
12 दिसंबर को एनकेजे थाना के जुहला बाइपास में एक तेज रफ्तार कैप्शूल वाहन ने पहले मकान को टक्कर मारी और उसके बाद बाइक सवार तीन चचेरे भाइयों को कुचल दिया। दुर्घटना मेंं दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि तीसरे ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। घटना स्थल पर बाइपास को जोड़ती सड़क है।
केस नंबर-03
15-16 दिसंबर की रात 2 बजे स्लीमनाबाद फोरलेन के पड़वार बाइपास मार्ग पर दो वाहनों में आमने-सामने भिड़ंत हो गई। दोनों वाहन पलट गए और एक केप्शूल वाहन के सड़क पर पलटने से यातायात बाधित रहा। मौके पर पहुंची पुलिस ने सोमवार की सुबह मार्ग खुलवाया। दुर्घटना मेंं दोनों वाहन के चालक सुरक्षित रहे।
खास-खास
- सितंबर माह तक जिले में हुई 750 सड़क दुर्घटनाएं
- दस माह में 110 लोगों की हुई मौत और 846 लोग हुए घायल
- अक्टूबर-नवंबर माह में 180 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज
- दो माह में हुई 24 लोगों की मौत और 223 लोग हुए घायल
- जिले में 13 स्थानों पर चिन्हित किए गए ब्लैक स्पॉट
- चिन्हित स्थलों पर पीडब्ल्यूडी, एनएचआइ, नगर निगम व यातायात विभाग को करना था सुरक्षा के इंतजाम, अब नहीं पर्याप्त सुरक्षा
- शहडोल व जबलपुर-रीवा रोड पर रफ्तार बढऩे से आए दिन हो रहीं दुर्घटनाएं
इनका कहना है...
एनएच के निर्माण के साथ ही अधिकांश गांवों से बाइपास निकला है। अंदर से निकले मार्गों में भी काफी ऊपर से वाहन चलते हैं। हादसे लोगों की खुद की गलती से होते हैं। इसके लिए लोगों को नियमों का पालन कर वाहन चलाने होंगे। लोगों को जागरुक करने वेन भी हाइवे पर भ्रमण करता है।
सुमेश बाझल, प्रोजेक्टर डारेक्टर, एनएचएआई
Published on:
18 Dec 2019 12:17 pm
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