
Arbitrary Conduct at Lallu Bhaiya's Pond
कटनी. शहर के बीडी अग्रवाल वार्ड स्थित ऐतिहासिक लल्लू भैया की तलैया की कहानी केवल अतिक्रमण और भराव तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड में वर्षों तक हुए फेरबदल ने भी इसके अस्तित्व को प्रभावित किया। मिशल बंदोबस्त वर्ष 1907-08 में मूल खसरा नंबर 1318, रकबा 2.60 एकड़ में भूमि के प्रकार कॉलम में स्पष्ट रूप से पानी दर्ज था और कैफियत कॉलम में इसे तलैया बताया गया था। लेकिन बाद के वर्षों में कैफियत कॉलम में हुए बदलावों और प्रशासनिक आदेशों के बीच यह ऐतिहासिक जलस्रोत धीरे-धीरे सिकुड़ता चला गया। आज स्थिति यह है कि करीब 1 लाख 3 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल वाली तलैया में केवल लगभग 13 हजार वर्गफीट हिस्सा ही जलस्रोत जैसा दिखाई देता है, जबकि शेष करीब 90 हजार वर्गफीट क्षेत्र मलबे, डस्ट और मुरम से पाट दिया गया है। हाल ही में नगर निगम ने जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत तलैया के सौंदर्यीकरण के लिए सफाई और गहरीकरण का कार्य शुरू कराया है, लेकिन कार्रवाई केवल उसी हिस्से तक सीमित है जहां वर्तमान में आकृति दिखाई दे रही है। शनिवार को भी नररनिगम द्वारा तलैया के गहरीकरण व सफाई का कार्य कराया जाता रहा।
जानकारी के अनुसार 2 मई 1979 तक यह क्षेत्र आम निस्तार की तलैया के रूप में दर्ज था। इसी दौरान तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी मुड़वारा द्वारा आदेश पारित कर कैफियत कॉलम से आम निस्तार का उल्लेख अलग कर दिया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसके बाद तलैया की जमीन पर धीरे-धीरे भराव और कब्जे की गतिविधियां बढऩे लगीं। मामले को लेकर उठी आपत्तियों के बाद 30 अप्रैल 1994 को तत्कालीन एसडीएम राजस्व ने पूर्व आदेश का पुनर्विलोकन करते हुए उसे निरस्त कर दिया और तलैया को फिर से आम निस्तार में दर्ज किया गया। हालांकि इसके बाद भी स्थिति स्थायी नहीं रही।
30 मार्च 1999 को संभागीय आयुक्त जबलपुर राजस्व द्वारा पारित आदेश में तलैया को पुन: विलोपित कर दिया गया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रिकॉर्ड में बार-बार हुए इन बदलावों का फायदा उठाकर धीरे-धीरे तलैया का प्राकृतिक स्वरूप खत्म किया गया। आरोप हैं कि प्रभावशाली लोगों और भूमाफियाओं की मिलीभगत से वर्षों तक मलबा, डस्ट और मुरम डालकर जलस्रोत को पाटा जाता रहा।
लगातार विवाद और आपत्तियों के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में पहुंचा। इसके बाद 18 नवंबर 2019 को खसरे में सुधार करते हुए कैफियत कॉलम में पुन: निस्तार तलैया दर्ज किया गया। लेकिन तब तक तलैया का बड़ा हिस्सा भराव की भेंट चढ़ चुका था। स्थानीय लोगों का कहना है कि रिकॉर्ड में दोबारा दर्ज होने के बावजूद संरक्षण की दिशा में गंभीर कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार कुछ वर्ष पहले तक तलैया के बड़े हिस्से में पानी भरा रहता था, लेकिन पिछले पांच वर्षों में इसका स्वरूप तेजी से बदल गया। अब अधिकांश हिस्सा समतल मैदान जैसा दिखाई देता है। कई स्थानों पर निर्माण मलबा और डस्ट डालकर जमीन को समतल कर दिया गया। वर्तमान में केवल एक छोटा हिस्सा ही तलैया के रूप में दिखाई देता है।
तलैया संरक्षण का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। पार्षद मौसूफ अहमद बिट्टू द्वारा दायर जनहित याचिका में तलैया के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और अतिक्रमण हटाने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया कि लगातार भराव किए जाने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय जबलपुर की युगल पीठ ने मध्यप्रदेश शासन, कलेक्टर कटनी, नगर निगम आयुक्त, राज्य वेटलैंड प्राधिकरण भोपाल और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किए हैं। हालांकि वर्तमान में चल रहे गहरीकरण कार्य को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अलग कार्रवाई की जा रही है और इसे सीधे न्यायालय के किसी आदेश से जोडकऱ नहीं देखा जा रहा।
शनिवार को भी नगर निगम द्वारा तलैया में मशीन लगाकर सफाई और गहरीकरण का काम कराया गया। निगम अधिकारियों के अनुसार जलस्रोत संरक्षण के उद्देश्य से यह कार्रवाई की जा रही है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल 13 हजार वर्गफीट हिस्से की सफाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। नागरिकों का कहना है कि असली जरूरत पूरे एक लाख वर्गफीट क्षेत्र का सीमांकन कर मूल स्वरूप बहाल करने की है। यदि बाकी पाटे गए हिस्से को नहीं हटाया गया तो आने वाले वर्षों में तलैया पूरी तरह समाप्त हो सकती है।
लल्लू भैया की तलैया की सफाई और गहरीकरण का कार्य कराया जा रहा है। कुछ स्थानों पर मलबा डाला गया था। जलस्रोत संरक्षण के उद्देश्य से कार्रवाई की जा रही है।
Published on:
24 May 2026 07:16 pm
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