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कटनी प्रशासन को नहीं पीएम के आदेश की परवाह, खजुराहो शिल्पी के वंशजों की कर दी उपेक्षा, देखें वीडियो

- आधारशिला के लिए चुना क्षेत्र का पत्थर, उपेक्षित छोड़े गए खजुराहो शिल्पियों के वंशज- प्रधानमंत्री की अवधारणा लोकल फॉर वोकल को जिला प्रशासन ने नहीं दिया तवज्जो, बिलहरी के शिल्पकारों को बुलाने में हुई मात्र औपचारिकता, तीन दिन पहले हुई बुलाने की औपचारिकता- कल्चुरी काल के राजाओं का था केंद्र, तब से उकेरी जा रही कलाकृति

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Balmeek Pandey

Nov 27, 2021

कटनी. खजुराहो मंदिर जो भी पहुंचता है वहां की नक्काशी देखकर दांतो तले अंगुलिया दबा लेता है, उन्हीं के वंशज आज भी पत्थर में जान फूंकने का काम कर रहे हैं। जी हा शहर से चंद किलोमीटर दूर स्थित राजा कर्ण की पुष्पावती नगरी बिलहरी, जहां का बर्मन परिवार छेनी-हथौड़ी से पत्थर को भगवान व महापुरुषों सहित एटिंक आकार देकर अपनी शिल्पकला का लोहा मनवा रहे हैं। पांच पीढिय़ों से आश्चर्यचकित कर देने वाली नक्काशी के शिल्पकार जिला प्रशासन की उपेक्षा का शिकार महसूस कर रहे हैं। पत्रिका ने मंगलवार को बिलहरी में शिल्पकारों से बात की तो बताया कि उन्हें कटनी जागृति पार्क में आयोजित हुए स्टोन आर्ट फेस्टीवल (अधारशिला) में उपेक्षित रखा गया है। उन्हें तीन दिन पहले बुलाने की औपचारिकता हुई है। जनसंपर्क विभाग से कुछ लोग पहुंचे थे तो उन्होंने यह जरूर कहा था कि स्टोन फेस्टीवल हो रहा है तो आप लोग भी पहुंचना। जबकि 9 नवंबर से फेस्टीवल चल रहा है।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक जिला एक उत्पाद, लोकल फॉर वोकल, आत्मनिभर्रता को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन शायद जिला प्रशासन इससे विशेष सरोकार नहीं रखता। कार्यक्रम पार्क में अवश्य हो रहा है, लेकिन जिस क्षेत्र के पत्थर की खूबी और नक्काशी देश के कोने-कोने में शुमार है, उन्हें ही उपेक्षित रखा गया। हर एक शिल्पकार प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े का रहा है। जिला प्रशासन द्वारा पत्थर को एक जिला एक उत्पाद में शामिल किया गया लेकिन शिल्पकार नहीं।

 

कटनी प्रशासन को नहीं पीएम के आदेश की परवाह, खजुराहो शिल्पी के वंशजों की कर दी उपेक्षा, देखें वीडियो

शिल्पकारों ने बयां कि पीड़ा
42 वर्षीय राजेश बर्मन बताते हैं कि 25 साल से वे पुस्तैरी विरासत संभालकर मूर्तियां बनाते हैं। कई जिलों में मूर्तियां भेजते हैं। बिलहरी की नक्काशी लोगों को भाती है। खजुराहों में शिल्पकला दिखाने वालों के ही वंशज हैं। पांच पीढ़ी से बिलहरी में हैं। लेकिन उन्हें अधारशिला कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया। तीन दिन पहले नायब तहसीलदार कार्यालय से एक व्यक्ति पहुंचा था तो उन्होंने यह कहा कि पत्थर-मूर्ति लेकर आप लोग जागृति पार्क चले जाओ, वहां बुलाया गया है।

 

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पहले नहीं दी जानकारी, निभा रहे रस्म
20 साल से शिल्पकारी कर रहे बिलहरी निवासी जितेंद्र बर्मन ने बताया कि हमें दुख इस बात का है कि मेला के लिए प्रशासन ने पत्थर से लेकर हर व्यवस्था जुटा दी। हम मूर्तिकार वर्षों से पत्थर के लिए परेशान हैं। छोटा वाहन लेकर रीठी के घनिया, परेबागार, डांग आदि में पत्थर लेने जाते हैं तो कार्रवाई हो जाती है। अधारशिला में जाने के लिए न तो आमंत्रण मिला और ना ही कोई अधिकारी आया। एक कर्मचारी मौखिक सूचना देकर चला गया है। हम शिल्पकारों के लिए न तो कोई योजना न कोई मदद।

 

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मूर्ति ले गए, रुपये जमा किए न लौटाए
शिल्पकार शकुन बर्मन पति राजकुमार बर्मन ने कहा कि पति के साथ कई वर्षों से मूर्तियां बनाने का काम करती है। तीन पीढ़ी से काम हो रहा है। गोल्डन स्व सहायता समूह में भी जोड़ा गया है, लेकिन आजतक कोई लाभ नहीं हुआ। एनआरएलएम द्वारा घर से अजीविका मिशन केंद्र के लिए मूर्तियां ले गए हैं। उसकी राशि जमा की न मूर्तियां लौटाईं। पार्क में होने वाले खर्च के बारे में पूछा तो बताया नहीं। राजकुमार बर्मन ने कहा कि कोई भी अधिकारी पहुंचा न आमंत्रण मिला, सिर्फ औपचारिकता निभाई गई है।

निभाई है औपचारिकता
40 साल से बिलहरी में मूर्ति बनाने वाले जगदीश प्रसाद बर्मन ने कहा कि अधारशिला कार्यक्रम में स्थानीय शिल्पकारों की उपेक्षा की गई है। दो दिन पहले तहसील ऑफिस से एक कर्मचारी घर पहुंचा था। कहा कि आप लोग भी पत्थर मूर्तियां लेकर जागृति पार्क चले जाएं कार्यक्रम में। जब बेटों ने उनसे पूछा कि फायदा क्या होगा, किराया-खर्चा कौन वहन करेगा तो कुछ नहीं बताए। समापन के दिनों में बुलाना यह कहां तक उचित है।

पत्थर चुना, लेकिन कलाकार क्यों उपेक्षित:विधायक
इस मामले को लेकर बहोरीबंद विधायक प्रणय पांडेय का कहना है कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही कलेक्टर व एसडीएम को कहा गया था कि इस कार्यक्रम के लिए कटनी का खासकर बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र का पत्थर चुना गया है। बिलहरी में कई पीढिय़ों से शिल्पकारी हो रही है। सदियों पूर्व पत्थर को तराशा गया तो दुनिया में यहां के पत्थर का महत्व बढ़ा, हमारे क्षेत्र के कलाकार बना रहे हैं, उनके उत्पाद भी लिए जाने कहा था। बिलहरी के कलाकारों को बलाने में औपचारिकता नहीं चलेगी। कलेक्टर, एसडीएम से बात कर इसमें आवश्यक पहल करेंगे।