
अजब है यहां तो मामला: हे राम! 54 लाख रुपए में हुआ दो शवों का अंतिम संस्कार!
कटनी. नदीपार स्थित मुक्तिधाम में नगर निगम का अजब कारनामा सामने आया है। यहां 54 लाख रुपए में दो शवों का अंतिम संस्कार हुआ है! ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योकि मुक्तिधाम में नगर निगम द्वारा 2017-18 में 54 लाख रुपए खर्च करके गैस चलित शवदाह गृह बनवाया गया है। यह कवायद प्रदूषण को कम करने व लकडिय़ों की खपत घटाने की गई है, लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि नगर निगम के लापरवाही अधिकारियों व बेपरवाह जनप्रतिनिधियों की वजह से छह साल से लगी मशीन शोपीस बनी हुई है। शुरुआती दौर में मात्र दो शवों का मशीन में अंतिम संस्कार हुआ है, उसके बाद मशीन कबाड़ की तरह पड़ी है। इसकी मुख्य वजह है कि अबतक उसे कैसे चलाना है इसके लिए ऑपरेटर नियुक्त नहीं हुआ है। ऑपरेटर इसलिए नहीं है क्योंकि ट्रेनिंग देने वाला चार साल से कटनी नहीं आ पाया।
उल्लेखनीय है कि मुक्तिधाम में हर माह 100 से लेकर 150 से अधिक अंतिम संस्कार हो रहे हैं। एक शव के संस्कार में तीन से 4 क्विंटल लकड़ी लग रहीं हैं। सार्वजनिक मुक्तिधाम में लकड़ी भी व्यवस्था एक निजी व्यक्ति के हाथों है, जो पत्थरों से तौल कर मुहैया कराई जाती है। यहां पर 3500 रुपए से चार हजार रुपए में तीन क्विंटल लकड़ी दी जा रही है, संकट की घड़ी में परिजनों को खासी परेशानी हुई, इसके बाद भी जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। मशीन में एक बॉडी को जलाने में नॉर्मल में डेढ़ घंटे का समय लगना है और मात्र एक गैस सिलेंडर की खपत होनी है, याने कि लगभग एक हजार रुपए का ही खर्च आएगा, बावजूद इसके अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे।
ननि नियुक्त नहीं कर पाया एजेंसी
पहले गैस चलित शवदाह गृह बनाने में बेपरवाही और निर्माण में देरी हुई और अब संचालन में बड़ी बेपरवाही सामने आई है। नगर निगम के अधिकारियों की मानें तो उसके संचालन के लिए एजेंसी और कर्मचारी नियुक्त करना है, जो नहीं हो पाया। गुजरात से ट्रेनर आना था, लेकिन छह साल बाद भी नहीं आ या।
खराब होने की कगार में पहुंची मशीन
मुक्तिधाम विकास समिति संस्थापक कवि मनोहर मनोज ने बताया कि नंदा नामदेव के द्वारा यहां पर लकड़ी की व्यवस्था की जा रही है। नगर निगम द्वारा लाखों रुपए से लगवाई गई मशीन खराब होने की कगार पर आ रही है, लकडिय़ों के दुरुपयोग को रोकने व प्रदूषण कम करने की पहल फेल हो गई है। मुक्तिधाम विकास समिति द्वारा यहां सौंदर्यीकरण सहित देखरेख की जिम्मेदारी संभाली जा रही है।
महापौर को नहीं सरोकार
नगर निगम के द्वारा इतनी बड़ी रकम से गैस चलित शवदाहगृह सिस्टम बनाया गया है। बनने के बाद से ही यह शोपी पड़ा है। शटर में हमेशा ताला डला रहता है। जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई से आने वाले टैक्स को खर्च कर नगर निगम व सरकार ने रकम फूंक दी, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो रहा है। नगर निगम द्वारा व समिति द्वारा इसका संचालन व संधारण क्यों नहीं किया जा रहा है, इसको लेकर महापौर प्रीति सूरी को भी कोई सरोकार नहीं है।
वर्जन
हमारे विभाग द्वारा गैस चलित शवदाह गृह का निर्माण कराते हुए स्वास्थ्य विभाग के हैंडोवर कर दिया गया है। बाकी की व्यवस्था उनको देखनी है। सिस्टम क्यों नहीं चल रहा है, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।
सुनील सिंह, प्रभारी सहायक यंत्री नगर निगम।
वर्जन
गैस चलित शवदाह गृह जब से बना है, तबसे आजतक चला ही नहीं है। उसमें कुछ फाल्ट है उसके सुधार के लिए तीन बार कंपनी को पत्राचार किया गया है। संचालन के लिए कर्मचारी की व्यवस्था करना है, वह नहीं हो पाई है।
संजय सोनी, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम।
वर्जन
इतनी बड़ी रकम से गैस चलित शवदाहगृह बनाया गया है, इसकी जानकारी नहीं है। यदि बना है और चल नहीं रहा है तो इसका पता लगाएंगे। यह शीघ्र चले इसके लिए आवश्यक पहल की जाएगी।
विनोद शुक्ला, आयुक्त नगर निगम।
Published on:
09 Feb 2024 08:58 pm
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