
children being adopted
बालमीक पांडेय@ कटनी. किस्मत ने जिन मासूमों को धोखा दिया, जिगर के टुकड़े को कचरे के ढेर में फेंक, वही मासूम अब किसी की गोद में खिलखिला रहे हैं, यह चमत्कार संभव हो रहा है महिला बाल विकास विभाग और कारा पोर्टल, कलेक्टर व एडीएम कोर्ट की पहल से, कटनी के मासूमों को अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिवार भी अपना चुके हैं…। जिन मासूमों को मां-बाप ने लावारिश छोड़ दिया था, उनकी किस्मत अब कारा पोर्टल और महिला बाल विकास विभाग की पहल से संवर रही है। वर्ष 2013 से अब तक जिले में 40 बच्चों को गोद दिलाया जा चुका है। वर्तमान में 10 बच्चों को लीगल फ्री कराते हुए एडॉप्शन की प्रक्रिया चल रही है। गोद लेने वाले दंपत्ति कारा पोर्टल में ऑनलाइन बच्चों का चयन कर रहे हैं। इसके बाद कलेक्टर और एडीएम कोर्ट के आदेश से कानूनी प्रक्रिया पूरी कर बच्चों को दत्तक माता-पिता के सुपुर्द किया जा रहा है। यह प्रक्रिया केवल बच्चों को परिवार देने तक सीमित नहीं है, इससे उन परिवारों को भी संपूर्ण बनाया जा रहा जिनके आंगन में संतान की कमी थी। अब वहां हर सुबह मासूमों की खिलखिलाहट गूंजती है और हर शाम मां-बाप की ममता से घर महकता है।
कटनी से गोद लिए गए बच्चों में कुछ की किलकारियां देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक गूंज रही हैं। जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी वनश्री कुर्वेती के अनुसार माल्टा, एरीजोना (यूएसए), नॉर्थ कैरोलीना (यूएसए), स्पेन के दंपत्तियों ने भी यहां के बच्चों को अपनी गोद में लिया है। वहीं दिल्ली, मुंबई, बैंगलुरू, बड़ोदरा, गुजरात, छत्तीसगढ़, नोएडा, चेन्नई सहित देश के महानगरों के परिवारों ने भी इन मासूमों को नया जीवन दिया है।
अब तक मां-बाप के प्यार से वंचित इन बच्चों की आंखों में खुशी साफ झलक रही है। जिन्हें कभी लावारिश छोड़ दिया गया था, आज वे नई मां की ममता और पिता के स्नेह में पल रहे हैं। उनके जीवन में जो खालीपन था, अब वहां हंसी-खुशी की किलकारियां गूंज रही हैं। दत्तक ग्रहण की इस प्रक्रिया ने उन परिवारों में भी खुशियां भर दी हैं, जो संतान सुख से वंचित थे। इन मासूमों ने न केवल नया घर पाया है, बल्कि कई घरों में मां-बाप बनने का सपना भी पूरा कर दिया है।
केस 01
एक 18 माह की बच्ची का बड़वारा थाना क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया। एक महिला उसे मैहर रेलवे स्टेशन से ले आई थी और अपने पास रखे हुए थी। ग्राम बाल संरक्षण समिति के लोगों की सूचना के बाद विभाग ने रेस्क्यू कराया। बच्ची को सीडब्लडयूसी के माध्यम से शिशुगृह में रखा गया। बच्ची के परिजनों का पता न चलने पर लीगल फ्री कराया गया। फरवरी माह में यूएस के दंपत्ति ने बच्ची को गोद लिया है।
केस 02
रीठी बायपास में 10 नवंबर को एक दो दिन का नवजात शिशु मिला था। इस पर विभाग द्वारा रेस्क्यू कराते हुए परिजनों का पता लगवाया गया। मालूम न चलने पर विधि मुक्त कराते हुए गोद दिया गया। इस बच्चे को जबलपुर के रेलवे फरवरी माह में गोद लेकर नया आसरा दिया है।
केस 03
परिवर्तित नाम राहुल आयु 4 माह को जन्म के कुछ समय उपरांत ही सरेंडर कर दिया गया था। बाल कल्याण समिति द्वारा किशोर न्याय के प्रावधानों के अनुरूप लीगल फ्री कराया गया। कारा पोर्टल पर विवरण दर्ज किया गया। राहुल को महाराष्ट्र के दंपत्ति द्वारा गोद लिया गया।
लावारिश मिले बच्चों का महिला बाल विकास विभाग द्वारा रेस्क्यू कराए जाने के बाद उन्हें बाल कल्याण समिति के माध्यम से शिशु गृह में रखवाया जाता है। वहां देखभाल होती है। 2 साल तक के बच्चों को 60 दिन में व बड़े बच्चों को 4 माह में लीगल फ्री कराया जा रहा है। माता-पिता का पता न चलने पर केंद्रीय दत्तक गृहण अभिकरण (कारा) पोर्टल में बच्चों का पंजीयन किया जाता है। गोद लेने वाले दंपत्ति भी इस पोर्टल में पंजीयन करते हैं। वेटिंग लिस्ट के अनुसार नंबर आने पर ऑनलाइन बच्चे दिखाए जाते हैं। दंपत्ति को 24 घंटे में बच्चे को रिजर्व करना पड़ता है और फिर एक माह में स्वीकृति कराते हुए कलेक्टर व एडीएम कोर्ट से गोद दिलाया जा रहा है। बाल संरक्षण अधिकारी मनीष तिवारी बताते हैं कि यदि लोगों को रिश्तेदारों के बच्चे गोद लेना हो तो वे भी कारा में पंजीयन कराकर ही ले सकते हैं।
वर्जन
2013 से अबतक 40 बच्चों को गोद दिलाया गया है। 10 बच्चों की प्रक्रिया चल रही है। कभी अनाथालय की दीवारों के सहारे जी रहे ये बच्चे अब मां की ममता और पिता के स्नेह में पल रहे हैं। मासूम आंखों में जो खालीपन था, अब वहां चमक है, मुस्कान है और भविष्य की नई उम्मीदें हैं।
प्रतिभा पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग।
Published on:
30 Aug 2025 07:21 am
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