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लाल की हिफाजत का नहीं ध्यान, डाल रहे जोखिम में जान…

ऑटो, वेन से सुरक्षा के साथ क्षमता से अधिक छात्रों को ले जाने वाले चालकों के साथ भेज रहे बच्चे, स्कूल प्रबंधन भी नहीं दे रहे ध्यान

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कटनी

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Mukesh Tiwari

Dec 18, 2019

Children not safe in auto

चालक सीट तक बैठे बच्चे।

कटनी. स्कूली वाहनों के दुर्घटना का शिकार होने के समय हंगामा मचाने वाले सिटी के अभिभावक खुद ही अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर संजीदा नहीं हैं। घर के सामने से सुरक्षा के उपाय न होने व क्षमता से अधिक बच्चे लेकर चलने वाले स्कूली वाहनों में अपने लाल को भेज रहे हैं। शहर मेंं सुबह से दौडऩे वाले अधिकांश ऑटो में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे भरे होते हैं। एक सप्ताह पूर्व गायत्री नगर पुलिया में स्कूली छात्रों से भरी वेन में आग लगने की घटना के बाद भी अभिभावक इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
बच्चे कम होने पर बढ़ जाती है राशि
शहर में एक हजार के लगभग ऑटो स्कूलों में बच्चों को लाने ले जाने में लगे हैं। ऑटो में नियमानुसार पीछे मात्र चार बच्चे ही बैठाए जाने चाहिए लेकिन आठ से दस बच्चों को लेकर चालक चलते हैं। एक बच्चे को स्कूल तक छोडऩे व लाने में 800 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक ऑटो चालक हर माह वसूलते हैं। यातायात व आरटीओ ने एक साल पूर्व लगातार कार्रवाई कर निर्धारित बच्चे ही बैठाने को चालकों को कहा था। ऐसे में चालकों ने किराया बढ़ाकर डेढ़ हजार तक कर दिया था। राशि बचाने अभिभावक भी बच्चों की जान का जोखिम उठा रहे हैं। चालक उनकी इसी मजबूरी का लाभ उठा रहे हैं।

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चालक सीट तक बैठा रहे बच्चे
स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा की स्थिति यह है कि चालक अपनी सीट तक में छोटे-छोटे बच्चों को बैठाकर वाहन दौड़ा रहे हैं। अधिक राशि को लेकर चालक जहां बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे हैं तो अभिभावक व निजी स्कूल प्रबंधन भी इसपर ध्यान नहीं दे रहे जबकि चालक उनके सामने ही बच्चों को लेकर निकलते हैं।
इनका कहना है...
स्कूलों में लगे वाहनों में सुरक्षा के इंतजाम हैं या नहीं। क्षमता से अधिक बच्चों को लेकर चालक चलते हैं। ऐसे वाहनों पर प्रशासन की कार्रवाई के साथ ही अभिभावकों व स्कूल प्रबंधन की भी जिम्मेदारी बनती है। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
प्राची खरे, अभिभावक, निवासी कुठला

जिस वाहन से हम अपने बच्चे को स्कूल भेज रहे हैं, उसमें वह कितना सुरक्षित है, इस पर हमारी भी नजर होनी चाहिए। चालक कम बच्चे होने पर मासिक किराया बढ़ा देते हैं। किराया का निर्धारण भी होना चाहिए ताकि अभिभावक परेशान न हों।
अमित टुड़हा, अभिभावक, निवासी आजाद चौक

स्कूली वाहनों की जांच और कार्रवाई आए दिन विभाग करता है। इसके साथ ही अभिभावकों व स्कूल प्रबंधन को भी इस पर ध्यान देना चाहिए कि उनका बच्चा सुरक्षित रूप से आना-जाना कर रहा है या नहीं।
एमडी मिश्रा, एआरटीओ