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शहर के आश्रयगृह की बेटियों ने किया वो कमाल की देखते रह गए लोग…पढि़ए खबर

लिटिल स्टार फाउंडेशन आश्रयगृह की तीनों बेटियों का मप्र राज्य घुड़सवारी एकेडमी में हुआ चयन

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कटनी

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Mukesh Tiwari

Aug 09, 2018

Choosing daughters in Horse Riding Academy

Choosing daughters in Horse Riding Academy

कटनी. चार साल की उम्र में जिस बेटी को पुलिस ने स्टेशन में लावारिस पाकर शहर के लिटिल स्टार फाउंडेशन आश्रयगृह को सौंपा था और उसे करीना नाम मिला। अब वहीं बेटी मप्र राज्य घुड़सवारी एकेडमी भोपाल की शोभा बढ़ाएगी। फाउंडेशन की करीना, कंचन राजपूत और लक्ष्मी केवट का खेल व युवा कल्याण विभाग की एकेडमी में आवासीय प्रशिक्षण के लिए चयन हुआ है। प्रदेश भर में एकेडमी में आवासीय प्रशिक्षण की मात्र पांच सीट होती हैं और उनमें से अपनी योग्यता के बल पर तीनों ने प्रवेश पाया है। तीनों कोच कैप्टन भागीरथ की देखरेख में एक साल का निशुल्क प्रशिक्षण लेंगी। जिसमें वह राज्य व राष्ट्रीय स्तर की घुड़सवारी प्रतियोगिताओं में सहभागिता करेंगी। उम्दा प्रदर्शन में तीनों को एक साल का और समय अपनी प्रतिभा का निखारने दिया जाएगा। पिछले वर्ष भी आश्रयगृह की आकांक्षा विश्वकर्मा, ज्योति विश्वकर्मा, प्रीति ब्रह्म का चयन हुआ था। उसमें से आकांक्षा ने बेहतर प्रदर्शन कर नेशनल जूनियर चैम्पियनशिप में सिल्वर मैडल पाया था जबकि ज्योति चौथे स्थान पर रही। दोनों का चयन एकेडमी में दूसरे वर्ष के लिए किया गया है।
माता पिता ने छोड़ दिया था साथ
करीना 2006 में पुलिस को चार साल की उम्र में स्टेशन में मिली थी, जिसके माता पिता का आज तक पता नहीं लग सका है। कंचन 2010 में सात साल की उम्र में फाउंडेशन आई थी। उसके माता पिता ट्रेनों मेंं सामग्री बेचते हैं लेकिन अपने साथ नहीं रखते हैं। लक्ष्मी की मां की मृत्यु के बाद उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी और दूसरी मां उसे अपने साथ नहीं रखना चाहती। इस कारण से वह 2015 से रह रही है और उसकी उम्र अभी १३ साल है।
रोजाना की छह घंटे मेहनत
लिटिल स्टार फाउंडेशन हिरवारा एकमात्र ऐसा आश्रयगृह है, जहां पर बेटियों को हार्स राइडिंग की सुविधा है। दो घोड़ों के साथ यहां पर कोच की व्यवस्था की गई है। जिसमें तीनों किशोरियां पढ़ाई के साथ ही साथ रोजाना छह घंटे घुड़सवारी के लिए मेहनत करती थीं। एकेडमी में कड़े फिजिकल टेस्ट से गुजरना पड़ता है, जिसके चलते तीनों का चयन पिछले साल नहीं हो पाया था। जिसके बाद तीनों को फाउंडेशन प्रबंधन ने कोच मेजर भंवरलाल से जयपुर में एक माह का प्रशिक्षण लिया था और उसके बाद उनका चयन हुआ।
इनका कहना है...
विपरीत परिस्थितियों में मिली बालिकाओं की उम्र अधिक होती है। ऐसे में पढ़ाई के बल पर उनका कैरियर बनाना कठिन होता है। हॉर्स राइडिंग के माध्यम से ऐसी बेटियों को सक्षम बनाने का कार्य किया जा रहा है और भी ऐसे ही तैयारी अन्य बेटियों को कराई जा रही है।
डॉ. समीर चौधरी, संचालक लिटिल स्टार फाउंडेशन हिरवारा