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डाकघर खजांची ने किया बड़ा घोटाला, सरकारी रुपए गायब कर शेयर बाजार में झोंका

- गबन के आरोपी कटनी निवासी अख्तर पर सीबीआई का शिकंजा कसा- प्रारंभिक छानबीन में दो करोड़ रुपए से ज्यादा की हेराफेरी पकड़ी गई हैं

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कटनी

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Balmeek Pandey

Apr 29, 2022

Crores of rupees scam in Post Office Katni

Crores of rupees scam in Post Office Katni

कटनी. कटनी प्रधान डाकघर के एक खजांची ने आम लोगों के बचत के रुपए गायब करके शेयरबाजार में झोंक दिए। गबन की गई राशि का बड़ा हिस्सा एशोआराम पर उड़ा दिया। बड़े घोटाले के खुलासे के बाद सीबीआई ने आरोपी खजांची भट्टा मोहल्ला निवासी जावेद अख्तर के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। सीबीआई ने प्रारंभिक छानबीन में डाकघर से दो करोड़ रुपए से ज्यादा रकम की हेराफेरी पकड़ी हैं। मामले में आरोपी खजांची अतर के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का शिकंजा कस गया है।

प्रवर अधीक्षक की शिकायत पर कार्रवाई शुरू
कटनी डाकघर में बड़े घोटाले की जांच प्रवर अधीक्षक डाकघर जबलपुर सभाग आरपीएस चौहान की शिकायत के बाद शुरु हुई। प्रवर अधीक्षक ने 22 अप्रेल को मामले में सीबीआई को शिकायत सौंपी। जांच के बाद सीबीआई ने कटनी के प्रधान डाकघर में पदस्थ खजांची अतर के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया हैं।

तीन साल में किया खेल
सीबीआई ने बताया कि जबलपुर डाक सभाग में कटनी एवं जबलपुर के सभी प्रधान, उप और शाखा डाकघर आते हैं। कटनी प्रधान डाकघर में अलग-अलग शाखाएं हैं। कटनी प्रधान डाकघर के अंतर्गत वित्तीय लेनदेन के लिए खजाना शाखा में करीब तीन वर्ष पूर्व जावेद अतर को पदस्थ किया गया। वह एक फरवरी 2020 तक वहां पदस्थ रहा। इस दौरान उसने दो करोड़ 19 लाख 75 हजार रुपए की शासकीय राशि का गबन कर लिया।

तीन बार में गायब की रकम
आरोपी खजांची अख्तर ने तीन अलग-अलग तरीकों से राशिक का गबन किया। एक करोड़ 73 लाख 70 हजार रुपए का गबन पहले तरीके से 30 जून, 2020 से 19 दिसबर, 2021 के बीच कुल 234 बार में किया। दूसरा तरीका अपनाकर 7 नवबर, 2021 से 15 दिसबर तक कुल 14 बार में 18 लाख 55 हजार रुपए और 26 अगस्त, 2021 से 13 दिसबर, 2021 तक तीसरे तरीके से छह बार में 27 लाख 50 हजार रुपए की राशि का गबन किया।

पहले मामला दबाया, फिर निलंबित किया
डाकघर में लंबे समय से चल रही गड़बड़ी की अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों को भनक लग चुकी थीं। सूत्रों के अनुसार शुरुआत में मामले को छिपाने और दबाने की कोशिशें हुईं। लेकिन बड़ी राशि का घोटाला होने से बाद में अधिकारियों ने भी खजांची को बचाने से हाथ खींच लिया। जांच के लपेटे में आने से बचने के लिए 17 दिसंबर, 2021 को अतर को निलंबित कर दिया गया था।