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8 करोड़ के धान खरीदी घोटाले में सरकारी जांच का सच, 5 दिन से लापता अधिकारी

जांच टीम में शामिल अधिकारी मिलर्स के फर्म व समितियों की जांच छोड़कर दूसरे कार्यों में व्यस्त.

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dhankharidi ghotala

गोदाम में धान की जांच करते जांच टीम के अधिकारी.

कटनी. सरकारी धान खरीदी में महज एक दिन 3 फरवरी को 15 समितियों से 7 मिलर्स को जारी धान डिलेवरी आर्डर (डीओ) में 8 करोड़ 31 लाख रुपए से ज्यादा की गड़बड़ी मामले में सरकारी जांच का सच हैरान करने वाली है। नागरिक आपूर्ति निगम (नान) भोपाल से जारी निर्देश पर गठित जांच टीम के तीन अधिकारी बीते पांच दिन जांच स्थल से लापता हैं। अलग-अलग कार्यों में व्यस्त हैं। एक अधिकारी अवकाश पर चले गए हैं। जांच में प्रगति भी कामचलाऊ है।

जिला आपूर्ति अधिकारी बालेंदु शुक्ला ने 11 फरवरी को पत्रिका से चर्चा में बताया कि वे भोपाल में हैं। उनका कहना था कि वैसे भी इस मामले में नान के अधिकारी ही बताएंगे कि जांच उनको कैसे आगे बढ़ानी है।

11 फरवरी को यह रही जांच अधिकारियों की स्थिति
- एलएल अहिरवार क्षेत्रीय अधिकारी (आरओ) नान जबलपुर में रहे.
- संजय सिंह जांच अधिकारी डीएम नान रीवा कार्यालय रीवा में रहे.
- बालेंदु शुक्ला जिला आपूर्ति अधिकारी कटनी शुक्रवार को भोपाल में रहे.
- मुधर खर्द डीएम नान कटनी अवकाश पर हैं, भोपाल तबादले की चर्चा.

जांच प्रभावित करने दबाव से लेकर जुगाड़ का खेल
- सरकारी खजाने में महज एक दिन के डीओ में 8 करोड़ 31 लाख रुपए से ज्यादा की क्षति पहुंचाने मामले में जांच को प्रभावित करने दबाव बनाने का खेल शुरू हो गया है।
- एक जनप्रतिनिधि का नाम चर्चाओं में हैं, जो हर हाल में मामले को दबाने की कोशिशों में जुट गए हैं। इस पूरे मामले को आगामी चुनाव से जोड़कर दागियों को बचाने के प्रयास तेज हो गए हैं।

पत्रिका व्यू
सिस्टम में सेंध, फिर भी जांच में लापरवाही!
सरकारी धान खरीदी में आम जनता के टैक्स के पैसे में सेंध लगाने का यह मामला सीधे तौर पर सिस्टम को चुनौती देने जैसा है। महज एक दिन के डीओ में 8 करोड़ 31 लाख रुपए से ज्यादा की धान भौतिक रुप से उपलब्ध नहीं होने के बाद भी समितियों से मिलर्स को जाती है और मिलर्स प्राप्त करना स्वीकारते हैं। मामला खुलता है और जांच टीम धान देखने जाती है तो पांच मिलर्स मिल बंद कर चले जाते हैं। शायद इसलिए कि धान है नहीं तो दिखाएंगे क्या? जो मिल खुली मिली वहां धान नहीं था। जाहिर है गड़बड़ी हुई है, और इसलिए तीन एफआइआर दर्ज हुई, लेकिन आगे क्या? सिस्टम में सेंध लगाने वाले प्रत्येक चेहरे को बेनाकाब करने में आखिर यह कैसी लापरवाही?