19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Eco Friendly Ganpati: मिट्टी से बनाए भगवान उसमें भरा विश्वास और दृढ़ आस्था का रंग

वर्कशॉप में स्टूडेंट्स व पैरेंट्स ने लिया हिस्सा, गणपति बनाकर किया घरों में स्थापित

2 min read
Google source verification
Eco Friendly Ganpati, Workshop, Students, Parents, Lord Ganesh

Eco Friendly Ganpati, Workshop, Students, Parents, Lord Ganesh

कटनी। विश्वास और दृढ़ आस्था पत्थर और मिट्टी को भी भगवान बना देती है। मिट्टी हो या कागज की लुग्दी ईश्वर का प्रतिबिंब नजर आता है। पर्यावरण संरक्षण को श्रद्धा से जोडक़र और फिर प्रदूषण मुक्त गणेश प्रतिमा का आकार देने वाली सोच अनुकरणीय है। शहर में कार्यशालाओं के जरिए इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बरही रोड रोड स्थित स्कूल में इको फ्रेंडली गजानन प्रतिमा तैयार की गईं। गणपति की मूर्ति से पर्यावरण वंदना का यह तरीका खास दिखा। पर्यावरण को बचाने के लिए, लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने के लिए तरह-तरह के आयोजन हुए। इसी कड़ी में लोगों को पर्यावरण के प्रति हमदर्दी और उसे नुकसान से बचाने के लिए इको फ्रेंडली गणेश मूर्ति बनाने के लिए वर्कशॉप लगाकर सिटीजंस को अनूठा संदेश दिया। शिखा पलटा ने बताया कि हमने पर्यावरण को सहेजने के लिए इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाने का निर्णय लिया और वर्कशॉप का आयोजन किया। वर्कशॉप से पहले लोगों को जोडऩा शुरू किया, उसके बाद गणेश चतुर्थी पर मिट्टी के गणेश की स्थापना करने के लिए वर्कशॉप लगाई। इसमें काली, पीली और मुल्तानी मिट्टी, कागज की लुग्दी सहित इन्य इको फ्रेंडली सामग्री से भगवान गणेश की एक से बढक़र स्टूडेंट्स व पैरेंट्स ने मूर्ति बनाईं। प्रतिमा बनाने की वर्कशॉप में बच्चे से लेकर बड़े तक बड़े उत्साह से हिस्सा लेते नजर आए।

मिट्टी और हर्बल रंग से तैयार मूर्तियां
मिट्टी और हर्बल कलर से तैयार गणेश प्रतिमाएं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय कदम रहा। इससे नदी प्रदूषण थमने के साथ ही हरियाली को भी बढ़ावा मिलेगा। इनोवेशन की ओर से कार्यशालाओं में इको फ्रेंडली प्रतिमाएं बनाना सिखाया जा रहा है। प्रियंका अग्रवालन बताती हैं कि अपने इको फ्रेंडली तैयार प्रतिमाओं को बच्चे घर भी ले गए हैं। शिखा ने कहा कि 10 आर सिस्टम में इको फ्रेंडली गणपति तैयार हुए। यही संदेश हर किसी को दिया जा रहा है। इसमें रिथिंक, रिडिसाइड, रिवाइव, रिपेयर, रिफ्यूज, रिड्यूस, रिइनोवेट, रिएक्ट, रिसाइकिल और रेज योर व्वाइस शामिल हैं।

इसलिए जुरूरी इको-फ्रेंडली मूर्तियां
- प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्ति पानी में जाने के बाद पानी को प्रदूषित करती है। पीओपी में कई केमिकल होते हैं जो पानी में रहने वाले जीवों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए गणपति या अन्य मूर्ति बनाते समय यदि प्राकृतिक मिट्टी का प्रयोग किया जाए तो यह पानी में जाती ही घुल जाएगी और किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होगा।
- पीओपी से बनी मूर्ति जब पानी में जाएगी तो ना केवल पानी के जीवों को इससे नुकसान होगा, साथ ही यह पानी जब इंसानों द्वारा इस्तेमाल में आएगा तो इसका उनकी सेहत पर भी खराब असर होगा।
- इको-फ्रेंडली गणपति बनाने के एक फायदा यह भी है कि आप ऐसी मूर्ति घर पर ही बना सकते हैं। इसके लिए आपको किसी मूर्तिकार की आवश्यकता नहीं है।