
ETS machine will demarcate land in katni
कटनी. जमीन की नापजोख और सीमांकन अबतक जरीब (लोहे के जंजीर) के माध्यम से होती थी। इससे लोगों में हमेशा त्रुटि की संभावना रहती थी। इसको लेकर कई बार विवाद की स्थिति भी बनी है और आलम यह है कि जिले में 317 मामले कई वर्षों से पेंडिंग पड़े हैं। जिनका अबतक सीमांकन नहीं हो पाया, लेकिन प्रशासन ने एक और पहल करते हुए इस समस्या से निबटने के लिए इटीएस मशीन का सहारा लेने जा रही है। नए साल से जिले में इटीएस (इलेक्ट्रानिक टोटल स्टेशन मशीन) से जमीनों का सीमांकन होगा। इसमें लंबित प्रकरणों के साथ-साथ हर तरह के सीमांकन में मशीन का प्रयोग किया जाएगा। डिजिटलाइजेशन के इस युग में इटीएस मशीन का उपयोग बहुत कारगर बताया जा रहा है। इससे भूमि का माप करने में गलती की संभावना लगभग शून्य रहेगी वहीं शासन के पास दुरुस्त स्थिति में संबंधी भूमि का रिकार्ड ऑटोमेटिक रूप से पहुंच जाएगा। जिससे भविष्य में अन्य पटवारी या अन्य राजस्व अधिकारी को उसी क्षेत्र में काम करने में परेशानी नहीं होग। खास बात यह है इससे जनता और प्रशासन दोनों का फायदा होगा। इसके अलावा इस मशीन के उपयोग से भूमि के बंटवारे से जुड़े सभी पक्ष संतुष्ट हो सकेंगे। जिससे राजस्व न्यायालयों किसी तरह की अपील या वाद पेश करने की संभावना भी नगण्य हो सकेगी। इटीएस मशीन से सीमांकन कराने के लिए जिले की आठ तहसील के लिए 8 मशीनें राजस्व विभाग को मिली हैं। इसमें बड़वारा, बरही, विजयराघवगढ़, रीठी, बहोरीबंद, ढीमरखेड़ा, मुड़वारा, कटनी शामिल हैं। हालांकि अभी तक इन मशीनों को ऑपरेट करेन के लिए राजस्व निरीक्षक ही प्रशिक्षित किए गए हैं। दो दिन का समय शेष है और पटवारियों को अभी मशीन के संबंध में क,ख,ग भी नहीं आ रहा। हालांकि भू-अभिलेख विभाग शीघ्र पटवारियों को ट्रेंड करने की बात कह रहा है। आरआइ को प्रशिक्षित करने के लिए ग्वालियर स्थित आयुक्त भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त कार्यालय में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आरआइ पटवारियों को इस मशीन के उपयोग के बारे में मौके पर जाकर विस्तार से जानकारी देंगे।
इटीएस लेजर किरणों से करती है माप
इटीएस मशीन एक लेजर किरण बेस्ड मशीन है। जिसमें एक पोल से दूसरे पोल के बीच लेजर किरण को प्रोजेक्ट किया जाता है। इसके बाद यह मशीन इस लेजर किरण की दूरी की गणना कर लेती है, जिससे सीमांकन पूरी तरह डिजिटलाइज्ड हो जाता है। जिसे बाद में भू-अभिलेख के मुख्य कंम्प्यूटर में फीड करना और भी आसान हो जाता है। यहां बता दें कि फिलहाल सीमांकन का काम जरीब यानी लोहे की जंजीर से किया जा रहा है। जिससे होने वाला माप पर अक्सर अंगुलियां उठती रहती हैं। बेशकीमती जमीनों के मामले अक्सर भू-स्वामी जरीब से किए जाने वाले सीमांकन पर संशय जताते रहे हैं। इसी के चलते सीमांकन के मामले बढ़ गए हैं।
इनका कहना है
शीघ्र ही जिले में इटीएस मशीनों से सीमांकन कार्य शुरू होगा। 8 मशीनें आ चुकी हैं। आरआइ इसकी ट्रेनिंग ले चुके हैं जो अब हलका पटवारियों को प्रशिक्षित करने का काम कर रहे हैं। 26 से पटवारियों को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। इस संबंध में कलेक्टर ने शीघ्र पहल करने के निर्देश दिए हैं। सबसे पहले 300 से अधिक लंबिता सीमांकनों का निराकरण कराया जाएगा।
मायाराम कोल, जिला भू-अभिलेख अधिकारी।
Updated on:
25 Dec 2018 04:38 pm
Published on:
25 Dec 2018 04:37 pm
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