
स्कूली वाहन में लगी गैस किट।
कटनी. बच्चों को लेकर जा रही वेन में बुधवार दोपहर को आग लगने की घटना के बाद अब जिले के स्कूलों में लगे वाहनों में मासूमों की सुरक्षा को प्रश्न चिंह लग रहा है। वाहनों में नियमों का पालन न कर थोड़ी बचत के लिए चालक मासूमों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। चोरी छिपे गैस किट से वाहनों को चलाया जा रहा है और उससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। वेन में आग लग जाने की घटना के बाद पत्रिका ने जब पड़ताल की तो सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों के वेन व छात्रों को ले जाने वाले कई वाहनों में चोरी-छिपे गैस किट लगाई गई है। जिनमें रिफलिंग का काम भी लोकल स्तर पर होता है और उससे कभी मासूम हादसे का शिकार हो सकते हैं। रीठी क्षेत्र के एक निजी स्कूल के छात्रों को ढोने वाले वाहन में गैस किट लगी पाई गई। जिसे बच्चों की सीट के पीछे लगाया गया था। ऐसे ही कई अन्य स्कूली वाहन हैं, जिनको पैसा बचाने के लिए चालक चोरी से गैस किट लगाकर चला रहे हैं। इस तरह के वाहनों का कोई पंजीयन भी परिवहन विभाग में नहीं है। दूसरी ओर वाहनों का सही रखरखाव न होने से शार्ट सर्किट होने व सीएनजी या पेट्रोल चलने वाले वाहनों में आग लगने की घटना होने की आशंका बनती है।
इक्का दुक्का ही हैं पंजीकृत
वाहनों में गैस किट का उपयोग करने के लिए बकायदा परिवहन विभाग में उनका पंजीयन भी होना चाहिए लेकिन जिले में इक्का-दुक्का वाहन ही पंजीकृत हैं। वर्तमान में कंपनियों के नए ऑटो आ रहे हैं, उनमें सीएनजी किट लगी होती है। जिसके चलते नवीन सीएनजी किट के लगभग डेढ़ सैकड़ा ऑटो ही आरटीओ में पंजीकृत हैं।
गैस किट में ऐसे हो सकता हैं हादसे
- गाड़ी का रखरखाव न करना। गाड़ी के कई तार चलते-चलते घिस जाते हैं और ऐसे में उनमें शॉर्ट सर्किट होने का खतरा रहता है।
- गाड़ी के अंदर ही ज्वलनशील वस्तुएं रखने या अधिक समय तक हीटर चलाना
- पैसे बचाने के चक्कर में पेट्रोल-डीजल कार में सीएनजी किट लगवाना
- सड़क किनारे के छोटे मैकेनिकों से किट लगवाना। जिसमें सही से फिटिंग और किट इंस्टालेशन न हो पाने से लीकेज की आशंका व आग लगने का खतरा बना रहता है।
- ओवर फ्यूलिंग और पुर्जे सही से फिट न हो पाने के कारण भी सीएनजी गैस लीक हो सकती है और आग लगने का खतरा हो सकता है
यह करें बचाव-
- किसी भी स्थिति में तय सीमा के प्रेशर से अधिक गैस न भराएं
- छोटे मैकेनिकों या डीलर से किट या सिलेंडर फिट न कराएं
- केवल कंपनी के और विश्वसनीय ब्रांड के सिलेंडर को प्राथमिकता दें
- पेट्रोल-डीजल गाड़ी को अगर सीएनजी में तब्दील करा रहे हों तो सिलेंडर टेस्ट सर्टिफिकेट जरूर लें
- सड़क किनारे बैठे मैकेनिकों से इलेक्ट्रिकल काम करवाने से बचें
- एक्स्ट्रा लाइट, प्रेशर हॉर्न जैसे सजावटी सामान लगवाने से बचें
- समय-समय पर खुद भी वाहन की वाइरिंग चैक करते रहें
इनका कहना है...
गैस किट या नियम का पालन न करने वाले स्कूली वाहनों के खिलाफ कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। ऐसे चालकों के लाइसेंस रद्द करने व फिटनेस, परमिट कैंसिल करने की भी कार्रवाई की जाएगी।
एमडी मिश्रा, अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी
Published on:
14 Dec 2019 12:14 pm
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