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इस जिले में बनकर तैयार हुईं शानदार गौशालाएं, बनी हैं दार्शनिक, शीघ्र शुरू होगा संचालन

शहर की सड़कों पर आवारा विचरण करने वाले पशुओं के प्रबंधन और गांवों में किसानों की फसल नष्ट करने वाले मवेशियों पशुओं के नियंत्रण एवं प्रबंधन के लिए जिले में 30 गौशालाओं का निर्माण किया जा रहा हैं। सभी गौशालाओं को 15 दिसम्बर तक पूर्ण कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। जिले में 14 गौशालाओं का निर्माण लगभग पूर्ण है।

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कटनी

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Balmeek Pandey

Dec 01, 2019

Gaushalas constructed in Katni district

Gaushalas constructed in Katni district

कटनी. शहर की सड़कों पर आवारा विचरण करने वाले पशुओं के प्रबंधन और गांवों में किसानों की फसल नष्ट करने वाले मवेशियों पशुओं के नियंत्रण एवं प्रबंधन के लिए जिले में 30 गौशालाओं का निर्माण किया जा रहा हैं। सभी गौशालाओं को 15 दिसम्बर तक पूर्ण कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। जिले में 14 गौशालाओं का निर्माण लगभग पूर्ण है। वहीं 16 गौशालाओं का निर्माण द्रुत गति से जारी है जो 15 दिन में पूर्ण हो जाएगा। पड़वार और लखाखेरा-बड़वारा की गौशालाएं कार्य संचालन के लिये तैयार हो चुकी हैं। जिले में 30 गौशालाएं 6-6 एकड़ क्षेत्र में तैयार की जा रही हैं। जिनमें एक एकड़ क्षेत्र में गौशाला के पक्के शेड और 5 एकड़ में चरागाह विकसित किया गया है। ताकि गौशाला के पशुओं को पर्याप्त चारा मिल सके। सभी गौशालाओं में पेयजल की व्यवस्था के लिए एक लाख रुपये प्रत्येक के मान से ट्यूब बैल खनन के लिए गौसंवर्धन बोर्ड द्वारा 29 लाख 62 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। जबकि सबमर्सिबल पम्प लगाने पृथक से गौशाला को 50 हजार रुपये की राशि दी जायेगी।

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होंगी ये व्यवस्थाएं
उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ. आरपीए गहरवार ने बताया कि गौशालाओं की फेन्सिंग कराकर शेड की दीवालों पर आकर्षक चित्रकारी भी की गई है। इन सभी गौशालाओं में पशुओं की जांच और उपचार के लिए पशु चिकित्सा विभाग द्वारा ट्रेविस भी स्थापित किया जाएगा। गौशाला के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की समिति को सौंपा गया है। सरपंच और सचिव के संयुक्त खाते से गौशालाओं का संचालन होगा। गौशाला में आने वाले गौवंशीय पशुओं को चारागाह के अलावा प्रतिदिन के मान से प्रति पशु 20 रुपये की राशि भी दी जाएगी। जिसमें 15 रुपये चारा और भूसा, 5 रुपये की राशि पशु आहार दाने के लिये प्रतिपशु मिलेगी। सभी गौशालाओं में विद्युत प्रकाश व्यवस्था और विद्युत सप्लाई की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। गौशालाओं में विद्युत पोल से 300 मीटर कम दूरी होने पर विद्युत कम्पनी द्वारा कनेक्शन दिया जाएगा। जबकि 300 मीटर से अधिक दूरी होने पर गौशाला में सोलर सिस्टम से प्रकाश और पम्प की व्यवस्था की जाएगी।

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इनका कहना है
गौशालाओं का निर्माण अंतिम दौर में चल रहा है। दो का कार्य पूर्ण हो गाया है। एक पखवाड़े में सभी बन जाएंगी। शीघ्र संचालन शुरू होगा। गौशालाओं के संचालन से गौवंशीय पशुओं का संरक्षण होगा। वहीं आवारा पशुओं से सड़कों में होने वाली दुर्घटना और किसानों की फसल का पशुक्षति से बचाव भी होगा।
जगदीश चंद्र गोमे, जिला पंचायत सीइओ।