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आधुनिकता की दौड़ और अस्तित्व की लड़ाई लड़ते ऐतिहासिक महत्व के स्थान, देखें वीडियो

घंटाघर और गोलबाजार। कटनी शहर में ऐतिहासिक महत्व के ये दोनों ही स्थान इन दिनों अस्मिता की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह अलग बात है कि कटनी शहर का नाम आते ही जेहन में इन दोनों की स्थानों की तस्वीर ही उभरती है। बदलते समय के साथ शहर आधुनिकता की दौड़ में आगे बढ़ा तो जिम्मेदार धरोहरों को सहेजने की भूल करते रहे।

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गोलबाजार

कटनी. डेढ़ सौ साल पहले का गोलबाजार अपने दामन में गौरवशाली व्यापारिक प्रतिष्ठा का सम्मान लिए आगे बढ़ रहा है तो वर्तमान में स्थिति यह है कि आवागमन के बेहतर इंतजाम नहीं होने से ग्राहक गोलबाजार की संकरी गलियों में प्रवेश करना पसंद नहीं करते। पल-पल में जाम अब इस ऐतिहासिक बाजार की पहचान बनती जा रही है। कमोबेश ऐसी की स्थिति घंटाघर की है। एक सदी पुरानी शहर की इस अमूल्य धरोहर को सहेजने में नगर निगम के जिम्मेदारों की बेपरवाही से शहर के नागरिक चिंतित हैं।

इस बारे में नगर निगम के कार्यपालन यंत्री राकेश शर्मा बताते हैं कि गोलबाजार में इसके महत्व को बरकरार रखते हुए काम करने की योजना बनी है। जल्द ही काम प्रारंभ होगा। नगर निगम अपने हिस्से काम जल्द प्रारंभ करेगा। विस्तृत काम के लिए डीपीआर बनाकर आगे बढऩे की तैयारी है।

स्वच्छता के दावों के बीच तीन सौ दुकानों के लिए तीन सुविधाघर - एक ओर पूरे शहर में स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में बेहतर रैंकिंग लाने के दावे किए जा रहे हैं। दूसरी ओर गोलबाजार में स्थिति यह है कि यहां तीन सौ से ज्यादा दुकानों के बीच सार्वजनिक सुविधाघर में तीन स्थान ही हैं। व्यापारी कहते हैं कि वहां भी गंदगी का आलम यह रहता है कि लोग जरुरत पडऩे पर जाना पसंद नहीं करते। कई बार तो ग्राहक बेहतर सुविधाघर नहीं होने के कारण भी बाजार आना पसंद नहीं करते।

व्यापारियों की पीड़ा
- दुकानदार भी चाहते हैं कि उनके लिए स्थाई व्यवस्था बन जाए। कई बार मांग भी की गई, ध्यान नहीं दिया गया।
प्रहलाद पटेल दुकानदार गोलबाजार.
- रामलीला के समय हमारी दुकानें नहीं चल पाती। हम भी चाहते हैं कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए व्यवस्थित करें।
सुरेश विश्वकर्मा दुकानदार गोलबाजार.
- कुछ दिन पहले सभी दुकानों को यह कहकर उठा दिया गया कि पार्किंग बनाएंगे। हम उचित स्थान की मांग कई वर्षों से कर रहे हैं।
सरस्वती विश्वकर्मा दुकानदार गोलबाजार

IMAGE CREDIT: Raghavendra

घंटाघर : बंद घड़ी और गंदगी का आलम - घंटाघर से शहर की पहचान जुड़ी है। फिर भी इस स्थान को आकर्षक बनाने में जिम्मेदारों की बेपरवाही आए दिन सामने आती है। ऐतिहासिक महत्व की अनदेखी कर हो रहे निर्माण और आसपास गंदगी का अंबार ही अब इस स्थान की पहचान बनती जा रही है। घंटाघर के आसपास परेशानी को लेकर नागरिक कई बार सोशल मीडिया में अपनी परेशानी बताते रहे हैं।

घंटाघर के समीप रहने वाले कष्ण लाल गुप्ता व उनके भाई बताते हैं कि यहां पास में ही एक कुआं है। उसका पानी मीठा है, लेकिन व्यवस्था नहीं होने से वह भी उपयोग लायक नहीं बचा। नगर निगम ने रेलिंग लगवाई थी। वह 15 दिन में ही टूट गई। यह स्थान बहुत पुराना है। लोग बताते हैं कि पीरामल सेठ ने बनवाकर प्रशासन को दान में दे दिया। अब नगर निगम इंतजाम करने में विफल है। घड़ी चलती नहीं है। दुर्दशा है एक तरह से।

यह है नागरिकों की मांग
- गोलबाजार के एतिहासिक महत्व को बरकरार रखते हुए विकास की योजना बनाकर काम किया जाए।
- दुकानों को विशेष रंग देकर आवागमन के लिए बेहतर इंतजाम किया जाए। लोग यहां आने से कतराएं नहीं बल्कि बाजार की सुंदरता देखने आएं।
- घंटाघर में पुराने स्वरूप को वापस लाने प्रयास किया जाए। बड़ी घड़ी को चालू करने के इंतजाम किए जाएं।
- आसपास के स्थान को विशेषज्ञों की राय लेकर आकर्षक बनाया जाए।