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सरकार नहीं कर पा रही गोवंश के चारा-पानी का इंतजाम, उधारी पर चल रहीं गोशालाएं : VIDEO

-22 गोशालाओं को संचालन के लिए पांच माह से राशि का इंतजार, बकाया 60 लाख रुपए से ज्यादा.

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Goshalas running on credit

पथराड़ी पिपरिया स्थित गोशाला.

राघवेंद्र चतुर्वेदी @ कटनी. किसानों के लिए फसलों की सुरक्षा में लाभदायक गोशालाएं बंद होने की कगार पर है। क्योंकि, इनके संचालन के लिए सरकार समय पर राशि नहीं जारी कर रही। कटनी जिले में 22 गोशालाओं का संचालन स्वसहायता समूह व पंचायतें कर रही हैं। यहां रखे गए दो हजार से ज्यादा गोवंशों के चारा-पानी के लिए पांच माह से राशि नहीं आई। इसके चलते ज्यादातर गोशालाओं का संचालन उधारी की व्यवस्था पर टिका है। सरकार से मिलने वाली राशि 60 लाख रुपए से अधिक है।

पथराड़ी पिपरिया में संचालित गोशाला दुर्गा स्व सहायता समूह की सदस्य ललिता बाई बताती हैं कि गोशाला संचालन के लिए समय पर पैसे नहीं मिलने से मवेशियों के लिए भूसे का इंतजाम बड़ी चुनौती है। मवेशियों को भूखे नहीं देख सकते, इसलिए उधारी में इंतजाम करते हैं।

गोशाला में काम देख रहे चौकीदार सुक्खन भी समय पर पैसे नहीं मिलने से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि गोशाला में मवेशियों की देखभाल का काम एक साल से कर रहे हैं। कभी भी हर माह समय पर वेतन नहीं मिलता। अभी तीन माह से वेतन नहीं मिला।

इस पर जिला पंचायत के सीइओ जगदीश चंद्र गोमे का कहना है कि गोशाला संचालन के लिए समूह और पंचायतों से आने वाले डिमांड प्रपत्र समय पर भेज देते हैं। ऊपर से राशि आने के साथ ही सम्बंधित के खाते में ट्रासफर कर दिया जाता है।

गोशाला संचालन में बजट की समस्या से ऐसे समझें खेती में किसानों की परेशानी -
विजयराघवगढ़ के बम्हनगवां गांव के किसान गंगाधर बडग़ैया 14 से ज्यादा मवेशियों को बांधकर घर पर ही चारा पानी दे रहे हैं, जिससे उनकी फसल सुरक्षित रह सके।

बहोरीबंद के टिकरिया गांव के किसान रामगौतम, जेहर यादव और इंदरलाल बताते हैं कि गेहूं की खेती के लिए पूरी तैयारी थी। बीज और खाद का इंतजाम कर लिया था, लेकिन आवारा मवेशियों के कारण बोवनी नहीं कर पाए।

कलहरा गांव के किसान ज्वाला सिंह बताते हैं कि आवारा मवेशियों ने डेढ़ एकड़ में गेहूं की फसल बर्बाद कर दी। अब चिंता इस बात की है कि फसल में नुकसान की भरपाई कैसे होगी।

पथराड़ी पिपरिया में गोशाला के पास गेहूं की खेती करने वाले किसान झारिया लाल बताते हैं कि गोशाला में आधे मवेशी ही रह पाते हैं। ज्यादातर के बाहर रहने के कारण कड़ाके की ठंड में फसल की तकवारी करनी पड़ती है।

सकरवारा जलाशय नहर के किनारे के खेतों में किसानों ने सिर्फ इसलिए गेहूं की बोवनी नहीं की, क्योंकि अवारा मवेशियों के कारण फसलों की सुरक्षा मुश्किल हो जाती है. IMAGE CREDIT: Raghavendra

2 साल में चालू नहीं हुई 7 गोशालाएं, 22 का संचालन भी कामचलाऊ, इससे किसानों को खेती में सीधा नुकसान

- 7 गोशालाओं का संचालन दो साल में शुरू नहीं हो सका। इसमें घुनौर, कन्हवारा, बडग़ांव व पोड़ी के साथ ही ढीमरखेड़ा विकासखंड में प्रस्तावित 3 गोशालाएं शामिल हैं।
- 22 गोशालाओं में 20 का संचालन स्व सहायता समूह और 2 का संचालन ग्राम पंचायतें कर रही हैं। समय पर राशि नहीं आने से उधारी पर टिकी है मवेशियों के आहार का इंतजाम।
- 60 लाख 48 हजार रुपए सितंबर से जनवरी 5 माह का बकाया है। एक मवेशी बीस रुपए प्रतिदिन के मान मिलने वाली राशि के समय पर नहीं आने से संचालन में दिक्कतें।
- 7 साल में प्रदेश में अवारा मवेशियों की संख्या 4 लाख 16 हजार बढ़कर 2019 में 20वीं पशुगणना में 8 लाख 53 हजार पहुंच गई। इससे पहले 2012 में 19वीं पशुगणना में अवारा मवेशियों की संख्या 4 लाख 37 हजार थी।