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घर गिरवी रखकर कराया मां का इलाज, मौत हुई तो अस्पताल ने बंधक बनाया शव!

एक्सीडेंट में घायल वृद्धा की मौत के बाद संवेदनहीनता, रात 3 बजे हो गई थी मौत, सुबह 10 बजे दी पुलिस को सूचनापरिजनों का आरोप: बिल बकाया होने पर एमजीएम अस्पताल नहीं दे रहा था लाश

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 24, 2024

घर गिरवी रखकर कराया मां का इलाज, मौत हुई तो अस्पताल ने बंधक बनाया शव!

घर गिरवी रखकर कराया मां का इलाज, मौत हुई तो अस्पताल ने बंधक बनाया शव!

कटनी. सडक़ हादसे में घायल हुई महिला का इलाज कराने के लिए परिजनों को मकान, टै्रक्टर गिरवी रखना पड़ गया, दोस्तों से कर्ज लेना पड़ा। अस्पताल में तीन लाख रुपए से अधिक की राशि देने के बाद भी महिला की जान नहीं बची। मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने लाश का तमाशा बना दिया। मजबूर परिजनों से बिल के शेष 54 हजार रुपए देने के बाद ही लाश ले जाने कहा। अस्पताल में बंधक लाश को छुड़वाने के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। लंबी जद्दोजहद के बाद मां को लाश नसीब हुई। जानकारी के अनुसार पुत्ती बाई पति रामचरण साहू (62) निवासी बंजारी थाना विजयराघवगढ़ को घर के सामने बाइक चालक ने टक्कर मार दी थी। महिला के सिर में चोट आ गई थी। तत्काल परिजन सिविल अस्पताल विजयराघवगढ़ लेकर पहुंचे, जहां पर प्राथमिक उपचार के बाद कटनी रैफर कर दिया गया।

एमजीएम में कराया भर्ती
15 जनवरी को परिजनों द्वारा महिला को एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। महिला के सिर में चोट होने पर डॉक्टर द्वारा ऑपरेशन किया गया। परिजनों ने कहा कि इसके बाद हालत बिगडऩे लगी। गंभीर बताते हुए वेंटीलेटर पर रखा गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि महिला की मौत हो जाने के बाद भी वेंटीलेटर में रखा गया। परिजनों ने कहा कि साढ़े तीन लाख रुपए दे चुके चुके थे, 78 हजार रुपए का अभी और बिल बनाया गया था।

दोस्त से की चर्चा तो पता चला हो गई है मौत
मृतिका के पुत्र ओमप्रकाश साहू ने बताया कि एमजीएम प्रबंधन द्वारा 10 दिन का इस्टीमेट साढ़े तीन लाख रुपए का बनवाकर क्षेत्रीय विधायक कार्यालय में जमा करवाया गया। कहा गया था कि मुख्यमंत्री योजना के तहत इलाज होगा, लेकिन विधायक के यहां से भी कोई सुनवाई नहीं हुई ना ही मदद मिली। हमसे साढ़े तीन लाख रुपए भी जमा करा लिए गए। सिर फाडकऱ बड़ा ऑपरेशन कर दिया गया, 9 दिनों तक वेंटीलेटर में रखे रहे। जब दोस्त आया तो हम लोगों ने देखा कि वेंटीलेटर नहीं चल रहा है, तो फिर यहां रखने का क्या मतलब। नर्सिंग स्टॉफ को चिल्लाया तो उन्होंने बताया कि मौत हो गई है।

रात में तीन बजे मौत, सूचना 10.30 बजे
महिला की सोमवार रात 3 बजे मौत हो गई थी। निजी अस्पताल प्रबंधन द्वारा तत्काल व उसके कुछ समय बाद ही पुलिस को सूचना दे देनी थी, ताकि समय रहते वैधानिक कार्रवाई हो सके। अस्पताल चौकी प्रभारी रणदमन सिंह पोर्ते ने बताया कि सूचना मंगलवार साढ़े 10 बजे दी गई। सवा 12 बजे तक पीएम कराकर शव परिजनों को सौंपा गया।

कलेक्टर ने संज्ञान में लिया मामला
ओमप्रकाश साहू ने बताया कि 3 लाख 33 हजार रुपए जमा करने के बाद 78 हजार रुपए का बिल बनाए हुए थे। लाश को नहीं दे रहे थे। अस्पताल के तिवारी द्वारा कहा जा रहा था कि रुपए जब जमा करेंगे, तभी लाश मिलेगी। परेशान होकर कलेक्टर अवि प्रसाद को फोन लगाया, तो उन्होंने मामले को संज्ञान में लिया व मां की लाश दिलवाई।

गिरवी रखना हो गई थी मजबूरी
ओमप्रकाश साहू ने बताया कि खेती-किसानी आदि करके परिवार चलाते हैं। हर हाल में कोशिश थी कि मां की जान बच जाए। मां के इलाज के लिए साढ़े तीन लाख रुपए में मकान व ट्रैक्टर गिरवी रख दिया है। यह अभी हमारे पास है, लेकिन दोस्त से कर्ज यही बात कहकर लिए हैं कि गिरवी रख रहे हैं। परिजनों ने कहा कि मदद के लिए वे जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, साहू समाज के लोग से गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया, वोट लेने वाले भी ध्यान नहीं दे रहे। पुत्र ओमप्रकाश साहू मां की लाश पाने के लिए एमजीएम अस्पताल के बाहर रोता-विलखता रहा।

वृद्ध की सिसकियां देख भावुक हुए लोग
महिला की मौत हो जाने के बाद वृद्ध की हालत भी एकदम बेहाल थी। पुत्ती बाई की मौत का वियोग और फिर अंतिम संस्कार के लिए लाश न दिए जाने से दुखी वृद्ध सिसकियां भरता रहा। जिसे देख लोग भी भावुक हो गए। परिजन यही कहते रहे कि यहां तो सिर्फ लूट हो रही है, हमारी कोई मदद नहीं कर रहा।

आरोप निराधार
संजय तिवारी प्रबंधक एमजीएम का कहना है कि दुर्घटना में घायल महिला को परिजनों द्वारा 15 जनवरी को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। यहां गहन ऑपरेशन किया गया था। महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजन पोस्टमार्टम कराने से मना कर रहे थे, इसलिए उनको शव नहीं दिया जा रहा। उन्हें बताया गया कि शव पुलिस को दिया जाएगा। मरीज के इलाज का बिल बकाया है यह सही बात है, लेकिन इसके कारण शव नहीं रोका गया। वैधानिक कार्रवाई के चलते शव परिजनों को नहीं दिया गया। परिजनों का आरोप निराधार है।

वर्जन
मामला संज्ञान में आया है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरके अठया, सीएमएचओ।