
अगामी 16 अक्टूबर से आम बजट पर काम शुरू होगा।
कटनी. वैश्विक महामारी कोविड-19 का दंश झेल रहे जिलावासियों को आज एक फरवरी को केंद्र सरकार के आम बजट से आम व्यक्ति से लेकर व्यापारी और उद्योग क्षेत्र सहित नौकरी-पेशा लोग बड़ी राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं। बड़ा मुद्दा कोरोना संक्रमण और पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, तेल, किराना जैसी चीजों के दामों में तेजी आना है। आम आदमी का कहना है कि उसकी आय सीमित है। उसमें इस महंगाई के दौर में घर चलाना मुश्किल है। गृहणी चाहती है कि रसोई का बजट कम हो। युवा वर्ग और नौकरीपेशा वर्ग ने उम्मीद है कि कि स्वरोजगार व रोजगार के अवसर बढ़ें, और इनकम टैक्स के लिए आय की सीमा बढ़े। उद्योग और व्यापार वर्ग सरकार से किसी बड़े पैकेज की मांग कर रहा है। आर्थिक मोर्चों पर मात खाए लोग को इस बजट से भारी उम्मीदें हैं। बजट में उच्च शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, विकास और हर हाथ को काम की आस है।
यह है लोगों की उम्मीदें
बजट विकास और आर्थिक मोर्चों पर राहतभरा होना चाहिए, विकास मूलक बजट में उच्च शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, स्वरोजगार मूलक होना चाहिए। देश को संकट से उबारने के लिए रोजगार व व्यापार की संभावना भरा होना चाहिए।
जगदीशचंद्र गोमे, जिला पंचायत सीइओ।
बजट देश के विकास को तेजी से आगे बढ़ाने वाला होना चाहिए। महिला सशक्तिरण और महिला सम्मान का विशेष प्रावधान होना चाहिए। नारी बढ़ेगी तो देश और तेजी से विकास पथ पर अग्रसर होगा। रोजगार व स्वरोजगार पर फोकस हो।
संघमित्रा गौतम, संयुक्त कलेक्टर।
बहुत ही अच्छा देशहित में बजट आने वाला है। बजट में गरीबों, मजदूरों, व्यापारियों, कर्मचारियों सहित सभी वर्ग के लोगों के हित में बजट रहेगा। इसे हितकारी बजट कहा जाएगा। देश को विकासपथ पर और तेजी से आगे बढ़ाने वाला होगा।
रामरतन पायल, जिलाध्यक्ष भाजपा।
देश की अर्थव्यवस्था चौपट है। बजट से कोई खास उम्मीद नही है। जनता को अपने बलबूते पर आत्मनिर्भर होना पड़ेगा। सरकार के भरोसे कोई न रहें। जनता के मन का बजट होना चाहिए। मंहगई में विराम बहुत जरूरी है।
मिथलेश जैन, कांग्रेस जिलाध्यक्ष।
बजट में मंहगाई पर रोक लगनी चाहिए। जीवन उपयोगी वस्तुओं के दाम घटने चाहिए। दूसरे देशों में डीजल-पेट्रोल, गैस, दवा आदि के दाम सस्ते हैं, यहां महंगे। गरीब, गरीब हो रहा और अमीर अमीर।
मीरा भार्गव, समाजसेवी।
बजट में गरीब, किसान, मजदूर, नौकरी-पेशा सभी वर्ग के लोगों का ध्यान होगा। देश अभी संकटकाल से गुजर रहा था, अब कैसे पटरी पर आएगा इस पर विशेष फोकस होगा, ताकि हम फिर बेहतरी की ओर बढ़ सकें।
घनश्याम चावला, समाजसेवी।
छोटे उद्योगों को कर भुगतान की छूट होना चाहिए। जीएसटी का स्लैब है छोटे, बड़े, मझोले श्रेणी को अलग-अलग रखते हुए छाटे उद्योगों को रियायत रखनी चाहिए। बैंक दरों में छोटे उद्योगों की सीमित वित्तीय मांग पर ब्याज की छूट मिले।
सुधीर कुमार मिश्रा, प्रदेश सचिव मप्र लघु उद्योग संघ।
अधिक से अधिक रोजगार श्रजित करने की योजना बजट में लाई जाए, ताकि बेरोजगारों को रोजगार मिल सके। पढ़े-लिखे, टैक्नीकल हाथों को काम मिले। व्यापार में जो रुकवाटें है वे दूर हों। लोकल फॉर वोकल यथार्थ में लागू हो।
मनीष गेई, उद्योगपति।
मंहगाई चरम पर है। रसोई का पूरा बजट बिगड़ गया है। रसोई गैस से लेकर तेल, किराना, अनाज सहित अन्य घरेलू उपयोग की सामग्री के दाम बढ़े हैं। मंहगाई पर विराम लगे, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर फोकस हो।
नीलम जगवानी, गृहणी।
बजट से काफी उम्मीदें हैं, इसमें सबका ख्याल रखा गया होगा। लेकिन मंहगाई पर विराम आवश्यक है। गैस सिलेंडर न सिर्फ मंहगा हुआ है बल्कि सब्सिडी भी बंद है। इससे मध्यमवर्गीय परिवार का हाल बेहाल है।
आभा सोनी, गृहणी।
बजट छात्रों व युवाओं के हित वाला होना चाहिए। छात्रवृत्ति में बढ़ोत्तरी, नई शिक्षा नीति को शीघ्र लागू करना चाहिए, नए उद्योगों को बढ़ावा देते हुए बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने की योजना शामिल हो।
अजय माली, स्थानीय युवा।
देश को आगे बढ़ाने में युवाओं की भूमिका अहम है। उनके हाथों को काम जरूरी है। बजट युवाओं के लिए आशापूर्ण रहे। रोजगार में शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नया हो। उद्योगों को बढ़ावा और रोजगार श्रजन वाला बजट होना चाहिए।
विकास दुबे, स्थानीय युवा।
बजट में खेती को और बेहतर करने की योजना हो। किसानों को पर्याप्त बिजली, पानी, खाद मिले। उपज का वाजिब दाम मिले। एमएसपी रेट से किसानों के उपज बिके। उन्नत कृषि व उद्यानिकी फसलों पर फोकस हो।
पुरषोत्तम सिंह, किसान।
बजट किसानों के हित में होगा। देश में सबसे ज्यादा संख्या किसानों की है। कृषि देश के विकास की रीढ़ है, इसलिए इसमें विशेष संभावनाओं को जगह देनी होगी। बजट में उन्नत कृषि पर फोकस हो। सुविधाओं का विस्तार हो।
पंकज दुबे, किसान
Published on:
01 Feb 2021 10:07 am
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