कटनी. 8 अक्टूबर 2015 से नगर निगम कटनी में अनुबंधित कंपनी एमएसडब्ल्यू प्रा. लिमिटेड द्वारा डोर-टू-डोर कचरे का कलेक्शन किया जा रहा है। इसमें नगर निगम लगभग 45 माह का अबतक 11 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर चुकी है। शहर में लगातार गंदगी का बना रहना, अनुबंध से 30 से 35 टन अधिक प्रतिदिन कचरे का निकलना व लगातार नगर निगम द्वारा बगैर जांच व कटौती के भुगतान किए जाने से कई सवाल खड़े हुए। इसमें शिकायतें भी हुईं। पत्रिका ने नगर निगम के एमएसडब्ल्यू सहित प्रभारी अधिकारियों की मिलीभगत से चल रही मनमानी को लगातार उजागर किया गया। जिसके बाद आयुक्त ने जांच टीम बनाई। बुधवार को टीम जांच करने पहुंचे तो गड़बड़ी की पोल खुलकर सामने आई। 8 बजे से टीम व शहर के लोगों की उपस्थिति में कचरे के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले तो एमएसडब्ल्यू का एक कम्पेक्टर ही नहीं मिला। वहीं जो कम्पेक्टर थे उनमें पहले से ही कचरा भरके रखा गया था। जिसमें टीम ने आपत्ति जताई। जांच के दौरान पाया गया कि कंपनी द्वारा प्रायमरी कलेक्शन रिपोर्ट और सेकंडरी कलेक्शन रिपोर्ट नहीं बनाई गई। प्रायमरी कलेक्शन में इस बात का उल्लेख करना है कि डोर-टू-डोर कचरा एकत्रित किया गया है वह किस मोहल्ला से है, कौन सी गाड़ी से कितना कचरा कितने घरों से एकत्रित किया गया। सेकंडरी कलेक्शन रिपोर्ट में यह लिखना अनिवार्य है कि छोटी गाड़ी से बड़ी गाड़ी में भरा गया उसकी सीट तैयार करना है, वह भी नहीं मिली। यहां पर सबकुछ अंदाज में चलना पाया गया। जांच में प्रतिदिन से आठ टन कचरा कम निकला। हर दिन 80 से 85 टन बताया जा रहा था, लेकिन जांच में 72 टन ही निकला।

कचरा भी नहीं मिला अलग-अलग
नगर निगम द्वारा कागजी रिपोर्ट में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग एकत्रित करने का दावा किया गया है, लेकिन जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला। स्वतंत्र एजेंसी के इंजीनियर देवदत्त पात्रा सहित अन्य कर्मचारियों द्वारा की जा रही मॉनीटरिंग पर भी सवाल खड़े हुए। क्योंकि नियमानुसार हर दिन में मलमा पाए जाने उस वाहन शून्य माना जाना था, गलत कचरा पाए जाने पर गाड़ी को निल करना था, लेनिक आज तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। कुछ दिनों से माह के अंत में कुछ प्रतिशत की अंदाज से कटौती कर भुगतान की परंपरा जरुर शुरू की गई। बता दें कि इन्फ्रा इन इंडिया बैंगलोर को मॉनीटरिंग के लिए स्वतंत्र एजेंसी सरकार ने नियुक्त की है। इसमें 10 कमर्चारियों का अनुबंध है। हर पांच लाख 20 हजार रुपये का भुगतान हो रहा है। कर्मचारियों को देखना है कि गीला-कचरा मलमा तो नहीं है, शतप्रतिशत घरों से कचरा उठाया है कि नहीं, सिल्ट की मात्रा कितनी है, उसकी कटौती करना है, लेकिन एजेंसी कुछ भी नहीं कर रही।

खास-खास:
– 2011 के सर्वे अनुसार 45 हजार घर मानकर कचरा कलेक्शन का अनुबंध था, अब अंदाज से बगैर किसी सर्वे क 57 हजार मानकर कचरे कलेक्शन का बिल लगाया जा रहा है।
– प्रत्येक घर से 300 ग्राम कचरा मानकर किया जा रहा एकत्र, अंदाज से बढ़े मान लिए कलेक्शन सेंटर।
– कई गाडिय़ों में पुराना कचरा पाया गया, जो कई दिनों से डंप था, नाली और नगर निगम के सफाई कर्मियों द्वारा उठाया गया कचरा पाया गया।
जांच टीम में ये रहे शामिल
जांच के लिए सात सदस्यीय टीम आयुक्त आरपी सिंह ने बनाई है। इसमें उपायुक्त अशफाक परवेज कुरैशी जांच समिति अध्यक्ष, सुधीर मिश्रा प्रभारी कार्यपालन यंत्री, संध्या सरयाम सहायक आयुक्त, सुरेंद्र मिश्रा उपयंत्री, आदेश जैन उपयंत्री, एमएल निगम स्वच्छता निरीक्षक, संजय चौदहा सहायक ग्रेड-3 को शामिल किया गया है।
इनका कहना है
एमएसडब्ल्यू के शिकायत मामले की जांच कराई जा रही है। यह जांच 15 दिनों तक चलेगी। कचरे के नापतौल की हकीकत देखी जा रही है। पहले दिन कम्पेक्टर एक कम मिला, कुछ वाहनों में रात का कचरा भरा हुआ था। वहीं प्रायमरी व सेकंडरी कलेक्शन रिपोर्ट नहीं मिली, स्वतंत्र एजेंसी को भी निर्देश दिए गए हैं।
अशफाक परवेज कुरैशी, उपायुक्त व जांच कमेटी अध्यक्ष।